September 29, 2026

देश के पहले चुनाव आयुक्त ने वोटर लिस्ट से हटा दिए थे 28 लाख महिला वोटरों के नाम, वजह कर देगी हैरान - first eci removed 28 lakh female voters from electoral list know the surprise reason

भारत के पहले लोकसभा चुनाव (1951-52) में 28 लाख से अधिक महिलाओं को उनके नाम के बजाय पुरुषों से संबंध ...और पढ़ें

वोटर लिस्ट से हटा दिए थे 28 लाख महिला वोटरों के नाम। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

वोटर लिस्ट से हटा दिए थे 28 लाख महिला वोटरों के नाम। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

HighLights

  1. पहले चुनाव में 28 लाख महिलाओं का नाम सूची से हटा

  2. पंजीकरण पुरुषों से संबंध के आधार पर किया गया था

  3. सुकुमार सेन ने व्यक्तिगत रूप से महिलाओं को समझाया

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में साल 1951-52 में पहली बार लोकसभा के चुनाव हुए। उस समय लोकसभा में कुल 489 सीटें थीं लेकिन संसदीय क्षेत्रों की संख्या 401 थी। 314 संसदीय क्षेत्रों में एक-एक प्रतिनिधि चुने गए वहीं 86 सीटों पर दो-दो प्रतिनिधि चुने गए।

इन चुनावों में 28 लाख से अधिक महिलाओं को वोट डालने का अवसर ही नहीं मिला। इसका कारण था कि उस समय महिलाओं का पंजीकरण उनके अपने नाम के बिना, पुरुषों के साथ उनके संबंधों के आधार पर किया गया था और बाद में उनके नाम हटा दिए गए थे।

स्वतंत्र भारत के पहले चुनाव में ऐसा कुछ हुआ जो दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा था। 21 साल और उससे अधिक उम्र का हर वयस्क वोटर बन सकता था। पहले चुनाव में 17 करोड़ लोगों ने वोट डाला, जिनमें 8 करोड़ महिलाएं शामिल थीं।

भारत ने वो कर दिखाया जिस पर दुनिया को संदेह था

दुनिया को संदेह था कि क्या भारत ऐसा कर पाएगा, लेकिन भारत ने केवल इसे सफलतापूर्वक अंजाम दिया बल्कि दुनिया को दिखा दिया का भारत ऐसा कर सकता है। ऐसा करने में मदद की भारत के पहले चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन ने, उन्होंने पहाड़ों, नदियों और जंगलों के पार मतपेटियां पहुंचाने के लिए सड़कें और पुल बनवाए जिससे लोग अपने वोट के अधिकार का प्रयोग कर सकें।

सुकुमार सेन के कंधों पर जिम्मेदारी थी कि इस युवा देश में प्रत्येक मतदाता को एक व्यक्ति के रूप में मान्यता दें। जिसकी अपनी निजी पहचान हो, न कि किसी की पत्नी या मां या बेटी के रूप में। इस सिस्टम को अजीब बताते हुए सेन ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वोटर लिस्ट में महिलाओं का विवरण उनके अपने नामों से किया जाए।

28 लाख महिला वोटरों का नाम लिस्ट से हटाया

वोटर लिस्ट में जब ये सुधार लेकर चुनाव आयोग महिलाओं से सामने आया तो अधिकांश महिलाओं ने अपना नाम वोटर लिस्ट में दर्ज कराने से इनकार कर दिया, जिसके बाद 28 लाख महिला वोटरों का नाम लिस्ट से हटा दिया गया।

इसके बाद सुकुमार सेन ने निजी रूप से इन महिलाओं से मुलाकात की और उन्हें समझाया जिसका परिणाम ये हुआ कि 28 लाख महिलाओं में से करीब 85 प्रतिशत महिलाओं ने अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज करा लिया और दूसरे लोकसभा चुनाव में मतदान किया।

(यह विवरण कोलकाता स्थित शिक्षाविद निलय कुमार साहा ने 'सुकुमार सेन: द मैन बिहाइंड द स्क्रीन ऑफ इंडियन पार्लियामेंट्री डेमोक्रेसी' नामक पत्रिका में लिखा है, जो कि एशियाटिक सोसाइटी का प्रकाशन है।)