September 7, 2026

271 नदियों में पॉल्यूशन के 296 हॉटस्पॉट: क्या बिट्टू तबाही मॉडल से इसे साफ किया जा सकता है?

271 नदियों में पॉल्यूशन के 296 हॉटस्पॉट: क्या बिट्टू तबाही मॉडल से इसे साफ किया जा सकता है?

नदियों को साफ करने का बिट्टू मॉडल क्या है?

मध्यप्रदेश के ब्यावरा के रहने वाले 21 साल के सुरेंद्र सिंह चौधरी आजकल सोशल मीडिया पर वायरल हैं. आप उन्हें सोशल मीडिया पर बिट्टू तबाही के नाम से जानते हैं. खुद का नाम भले ही तबाही रखा है, लेकिन सच ये हैं कि सुरेंद्र नदियों को तबाही से बचा रहें हैं. बीएसई सेकेंड ईयर में पढ़ने वाले बिट्टू ने अजनार नदी की गंदी हालत देखी तो इसी साल 26 जनवरी से उसकी सफाई का बीड़ा उठाया.

महीनों तक उन्होनें नदी से प्लास्टिक, बोतलें, जलकुंभी और हर तरह का कचरा निकाला. उनकी इस कोशिश ने वायरल होते होते इंडस्ट्रियलिस्ट आनंद महिंद्रा समेत कई लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा और अब इसे इंटरनेशनल पहचान भी मिल रही है.

बिट्टू की कहानी खास है क्योंकि इसमें कोई बड़ा प्रोजेक्ट, भारी मशीनरी या सरकारी अभियान नहीं, बल्कि एक व्यक्ति का लगातार किया गया काम दिखाई देता है, लेकिन सवाल यही कि एक तरफ तो सफाई हो रही हैं दूसरी ओर नदियों में और कचरा ना पहुंचे इसकी गारंटी कैसे?

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की 2025 की रिपोर्ट के हिसाब से 623 नदियों के आंकलन में 271 नदियों पर 296 पॉल्यूटेड स्ट्रेच मिले. हालांकि ये राहत की बात यह है कि साल 2018 में इनकी गिनती 351 थी. यानी आंकड़ों में कमी आई है. कई पुराने दूषित हिस्सों में सुधार भी हुआ है, लेकिन आकड़े बताते हैं परेशानी खत्म नहीं हुई है।

सबसे ज्यादा प्रदूषित नदी स्ट्रेच में महाराष्ट्र के 54, केरल के 32, मध्य प्रदेश के 18, मणिपुर के 18 और उत्तर प्रदेश के 16 स्ट्रेच शामिल हैं.

नदियों की कहानी सिर्फ गंगाजी या यमुनाजी तक सीमित नहीं है. देश के अलग-अलग हिस्सों में अरबन सीवेज, इंडस्ट्रियल डिस्चार्ज और दूसरे पॉल्यूशन सोर्सेज़ नदियों पर दबाव बना रहे हैं.

यमुना से मूसी तक, गंदगी का पैटर्न

हाल की वाटर-क्वालिटी रिपोर्ट में कुछ जगहों पर नदी के पानी में ऑर्गेनिक प्रदूषण का स्तर बेहद ज्यादा पाया गया. यमुना के आगरा और इटावा वाले हिस्सों में बीओडी यानी बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड काफी ऊंची दर्ज हुई. नोएडा के पास हिंडन में भी ऊंचा बीओडी रिकॉर्ड किया गया. बीओडी जितना ज्यादा होगा पानी में ऑर्गेनिक पॉल्यूशन का दबाव उतना ज्यादा माना जाता है.

अब नदियों का नया खतरा सिर्फ प्लास्टिक और सीवेज नहीं है. अगस्त 2026 में आई इंनवायरमेंटल केमेस्ट्री एंड इकोटॉक्सिकोलॉजी की एक स्टडी में सात बड़ी नदियों की जांच के बाद तेलंगाना की मूसी नदी में फार्मास्यूटिकल प्रदूषण का सबसे ज्यादा भार पाया गया। यानी शहरों की दवाइयां और दूसरे केमिकल भी नदी तक पहुंच रहे हैं.

गंगा सफाई की सबसे बड़ी चुनौती सीवेज

सरकार के मुताबिक नमामि गंगे के तहत 218 सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, करीब 35,698 करोड़ रुपये की लागत से लिए गए हैं. इनमें 138 प्रोजेक्ट चालू हो चुके हैं. फिर भी अगस्त 2026 में नोएडा के एक्टिविस्ट अमित गुप्ता द्वारा 21 जुलाई 2026 को दाखिल की गई आरटीआई के आकड़े चैलेंज बताते हैं.

गंगा नदी से जुड़े उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में मिलाकर रोज करीब 11,785.5 एमएलडी यानि मिलियन लीटर डेली सीवेज निकलता है, जबकि इन राज्यों की मिलाकर ट्रीटमेंट कैपेसिटी करीब 8,026.7 एमएलडी है. यानी सीवेज और उसके ट्रीटमेंट की कैपेसिटी में करीब 32 फीसदी का अंतर है. इसी गैप में नदी की सफाई की कोशिशें कमजोर पड़ सकती हैं.

बिट्टू तबाही और सिस्टम

बिट्टू पर्यावरण के लिए ही काम करना चाहते हैं उनकी कहानी आपको मोटिवेट कर सकती हैं क्योंकि शुरू में उन्हें भी कई लोगों ने रोका टोका तुमसे ना हो पाएगा जैसे कमेंट भी किए हैं लेकिन उन्होनें कर दिखाया. प्रैक्टिकल प्रॉब्लम ये हैं कि हर नदी किनारे एक बिट्टू नहीं हो सकता कचरा नदी में पहुंचने से पहले क्यों नहीं रोका जाता? नदी की सफाई से जरूरी है सीवेज ट्रीटमेंट, इंडस्ट्रियल डिस्चार्ज की निगरानी, कचरे का मैनेजमेंट और शहरों की प्लानिंग.

क्योंकि एक इंसान एक नदी से कचरा निकाल सकता है, लेकिन पूरे शहर का कचरा नदी में जाने से रोकना सिस्टम और इंसान दोनों का काम है. ताकि अगली बार नदी को साफ करने के लिए किसी बिट्टू को नदी में उतरना ही न पड़े.

प्रमिला दीक्षित

प्रमिला दीक्षित

दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय... कश्मीर से केदारनाथ और काशी तक, अपराध से आतंकवाद तक, दंगों की क्रूरता से दरियादिली की कहानी तक, राजनीति से साहित्य की रवानी तक, तथ्य, तर्क और संवेदना के साथ हर विषय पर रिपोर्टिंग करती रही हैं. वीडियो, रेडियो, ब्लॉग- लेख, कविता और मॉडरेशन उनकी अभिव्यक्ति के माध्यम है.

Read More

google button