September 27, 2026

निगम ने जिन 26745 लोगों को दिया था नोटिस: आवासीय इलाके में कॉमर्शियल काम; मिश्रित जोन में अभी सीलिंग नहीं, अवैध निर्माण पर कार्रवाई होगी - Patna News

पटना30 मिनट पहले

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पटना के रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वाले 26,745 भवन मालिकों को राहत मिलने वाली है। आवासीय परिसरों में कॉमर्शियल इस्तेमाल को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद नगर निगम ने अपनी कार्रवाई का दायरा सीमित कर दिया है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन इलाकों को मास्टर प्लान में आवासीय घोषित नहीं किया गया है, वहां फिलहाल सीलिंग या दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। इसके बाद नगर आयुक्त ने सभी अंचलों के कार्यपालक पदाधिकारियों, टाउन प्लानर्स और राजस्व अधिकारियों को आदेश का बारीकी से अध्ययन करने का निर्देश दिया है। अब निगम द्वारा पहले जारी किए गए सभी नोटिसों का नए सिरे से भौतिक और दस्तावेजी सत्यापन होगा। इसके बाद ही तय होगा कि कौन-सी प्रॉपर्टी मिक्स्ड जोन में आती है और कौन-सी विशुद्ध अवैध श्रेणी में।

बिल्डिंग बायलॉज 2026 नीतिगत समाधान की तैयारी

इस बीच राज्य सरकार के स्तर पर बिल्डिंग बायलॉज-2026 तैयार किया जा रहा है। इसमें ग्राउंड रियलिटी को देखते हुए मिश्रित लैंड-यूज के नियमों को अधिक व्यावहारिक और लचीला बनाने का प्रस्ताव है। नए प्रावधानों पर कैबिनेट की मुहर लगते ही आवासीय परिसर में स्वरोजगार या सीमित व्यावसायिक काम करने वालों को स्थायी नियमितीकरण का रास्ता मिल सकेगा।

राहत किसे और कार्रवाई किस पर

1: इन्हें मिलेगी राहत (मिश्रित क्षेत्र) : कोर्ट के अनुसार, जिन मोहल्लों या सड़कों को स्पष्ट रूप से केवल आवासीय या केवल व्यावसायिक श्रेणी में वर्गीकृत नहीं किया गया है, वहां नगर निकाय केवल जांच और डेटा जुटाने का काम जारी रख सकता है। वहां तुरंत सीलिंग जैसी दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। पटना के बड़े हिस्से में लोग मकान के अगले हिस्से में दुकान, क्लिनिक या कोचिंग चला रहे हैं, उन्हें इससे फौरी राहत मिलेगी। 2: इन पर चलेगा डंडा (विशुद्ध अवैध निर्माण) : मास्टर प्लान-2031 के अनुसार जो कॉलोनियां विशुद्ध आवासीय अधिसूचित हैं, यदि वहां स्वीकृत नक्शे के पूर्णतः विपरीत भारी व्यावसायिक निर्माण या विचलन किया गया है, तो उन पर सीलिंग और जब्ती की तलवार लटकी रहेगी।

यह था पूरा मामला

अगस्त 2026 में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों के अनुपालन में पटना नगर निगम ने शहर के 75 वार्डों में सघन सर्वे कराया था। इसमें 26,745 ऐसे मकान चिह्नित किए गए थे, जो आवासीय नक्शे पर स्वीकृत बिल्डिंग में व्यावसायिक प्रतिष्ठान चला रहे थे। निगम ने इन सभी को नोटिस जारी कर सीलिंग की चेतावनी दी थी। शीर्ष अदालत के आदेश की सूक्ष्मता से अध्ययन किया जा रहा है।

सभी अंचलों को कोर्ट के आदेश के अनुसार कार्रवाई करने कहा गया है। जिन लोगों को नगर निगम ने नोटिस दिया है, उनकी प्रॉपर्टी की नए सिरे से जांच होगी। इसके बाद कार्रवाई होगी। -यशपाल मीणा, नगर आयुक्त, पटना नगर निगम

मास्टर प्लान-2031 में पटना के प्रमुख आवासीय इलाके

1. मध्य और पश्चिमी पटना (आर-1 कोर रिहायशी क्षेत्र)

पाटलिपुत्र कॉलोनी, बोरिंग रोड और कैनाल रोड की भीतरी कॉलोनियां : अलकापुरी, महेश नगर, इंद्रपुरी, शिवपुरी आदि। यहां मुख्य सड़क पर कॉमर्शियल प्रभाव है, लेकिन आंतरिक लेआउट विशुद्ध आवासीय है।

राजीव नगर और केशरी नगर : शास्त्री नगर, एजी कॉलोनी, पटेल नगर, पुनाईचक और राजा बाजार का अंदरूनी हिस्सा।

कंकड़बाग हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी : पीसी कॉलोनी, लोहिया नगर, तिवारी बेचर, शिवाजी पार्क के आसपास का इलाका।

राजेंद्र नगर और कदमकुआं : व्यवस्थित रिहायशी ब्लॉक और पुराने आवासीय लेआउट।

पूर्वी और दक्षिणी पटना : हनुमान नगर, बहादुरपुर हाउसिंग कॉलोनी एवं संदलपुर क्षेत्र। न्यू जगनपुरा, रामकृष्णा नगर और मीठापुर-बाइपास का दक्षिणी अंदरूनी हिस्सा।

2. विस्तारित आवासीय गलियारा (आर-2 एवं विस्तारित नगर परिषद/निगम क्षेत्र)

दानापुर-खगौल कॉरिडोर : आरपीएस मोड़ से पश्चिम, सगुना मोड़ के भीतरी रिहायशी अपार्टमेंट पॉकेट्स, रूपसपुर और खगौल आवासीय क्लस्टर।

फुलवारीशरीफ-एम्स रोड (भीतरी इलाके) : आवासीय घोषित लेआउट (मुख्य सड़क को छोड़कर)।

बाइपास से दक्षिण और न्यू पटना ग्रिड : बैरिया, कन्हाईचक और फतुहा के पहले से अधिसूचित रिहायशी इलाके।

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