September 27, 2026

बिहार के 264 निकायों पर आदेश लागू: सुप्रीम कोर्ट ने कहा रिहायशी इलाकों में अवैध कमर्शियल गतिविधि तुरंत सील करें - Patna News

पटना30 मिनट पहले

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23 नवंबर से पहले देनी होगी प्रोग्रेस रिपोर्ट

देश और बिहार के रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से चल रहीं दुकानों, कोचिंग सेंटरों, जिम और दफ्तरों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने देशव्यापी स्तर पर लैंड-यूज नियमों के उल्लंघन पर कड़ा आदेश जारी किया है। कोर्ट ने देशभर के नगर निगमों और निकायों को निर्देश दिया है कि आवासीय संपत्तियों में अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को रोकने के लिए प्राथमिकता से कार्रवाई करें और उल्लंघन मिलने पर ऐसी संपत्तियों को तुरंत सील व ध्वस्त करें।

यह आदेश राजधानी पटना समेत पूरे बिहार के सभी 264 शहरी निकायों पर समान रूप से लागू होगा। राज्य सरकार को सीलिंग की प्रोग्रेस रिपोर्ट 23 नवंबर से पहले सुप्रीम कोर्ट में जमा करनी होगी। मामले में अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर से कहा है कि मास्टर प्लान का उल्लंघन हुआ है तो मुकदमों का बहाना बनाकर सीलिंग की कार्रवाई नहीं रूकेगी। बिहार सरकार की पैरवी के लिए राज्य की ओर से महाधिवक्ता एसडी संजय, अधिवक्ता मनीष कुमार और दिव्यांश मिश्रा अदालत में उपस्थित रहे।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश क्या

तुरंत सीलिंग रिहायशी इलाकों में नियमों के खिलाफ चल रही कमर्शियल गतिविधि (दुकान, कोचिंग, जिम या ऑफिस) पर सबसे पहले सीलिंग होगी।

चेतावनी निकायों को बिना भेदभाव कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। रसूखदारों को छोड़ चुनिंदा कार्रवाई करने वाले अफसरों पर गाज गिरेगी।

बहाना खत्म विवाद का केस कोर्ट में लंबित होने पर भी अधिकारी सीलिंग नहीं रोक सकते। नक्शे या मास्टर प्लान का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई तय है।

राहत जिन इलाकों की श्रेणी स्पष्ट नहीं है, वहां जांच चलेगी लेकिन फिलहाल दंडात्मक सीलिंग नहीं होगी। राज्यों व नगर निकायों को व्यापक जांच का निर्देश दिया गया।

अन्य राज्यों के लिए निर्देश व प्रमुख घटनाक्रम

जयपुर (राजस्थान): कोचिंग सेंटर शिफ्टिंग की पैरवी कर रहे अधिवक्ता और वेलफेयर सोसाइटी सचिव को धमकी मिलने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। कार्रवाई के आश्वासन पर मुख्य सचिव और डीजीपी की पेशी टली।

उत्तराखंड: कोर्ट में पेश न होने और 50 हजार रुपए जमा न करने पर मुख्य सचिव को अवमानना का नोटिस जारी हुआ। भोपाल (मध्य प्रदेश): 1995 के बाद तैयार नए ड्राफ्ट मास्टर प्लान को प्रकाशित कर आपत्तियां मांगने की अनुमति मिली, हालांकि अंतिम मुहर सुप्रीम कोर्ट की होगी।

यह प्रशासनिक ढुलमुल रवैये पर सीधा प्रहार

रिहायशी इलाकों में अवैध व्यावसायिक गतिविधियों ने शहरों के मास्टर प्लान और शांति को ध्वस्त कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश प्रशासनिक ढुलमुल रवैये और लालफीताशाही पर सीधा प्रहार है। कोर्ट ने “पिक एंड चूज” नीति पर रोक लगाकर और लंबित मुकदमों के बहाने को खारिज करके अफसरों की जवाबदेही तय कर दी है। बिहार के 264 निकायों के लिए 23 नवंबर तक प्रोग्रेस रिपोर्ट देना परीक्षा जैसा है, क्योंकि अब तक रसूख के बल पर अवैध निर्माण बचते रहे हैं। यदि आदेश का कड़ाई से पालन हुआ, तो कॉलोनियों का आवासीय स्वरूप बहाल होगा और अवैध लैंड-यूज पर लगाम लगेगी।

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