मध्य प्रदेश ने सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने के लिए सीएम सुगम परिवहन सेवा शुरू की है, जो शुरू में सात शहरों में 351 बसों का संचालन करेगी। इस योजना में अंतर-शहर और इंट्रा-सिटी सेवाएं, आईटीएमएस निगरानी, सीपीएल, जीपीएस ट्रैकिंग और सुरक्षा, दक्षता और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए पीपीपी जुड़ाव शामिल है।
By Oneindia Staff
Published: Wednesday, September 23, 2026, 0:01 [IST]
भोपाल, 22 सितंबर: मध्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत 25 सितंबर 2026 से होगी। भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 351 बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के शुरुआती चरण में प्रदेश में करीब 1,500 बसों का संचालन शुरू किया जाएगा। योजना का उद्देश्य प्रदेश के विभिन्न शहरों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत करना, यात्रियों को सुरक्षित और सुलभ परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना तथा पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है।
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत बसों का संचालन दो श्रेणियों में किया जाएगा। इनमें 120 इंटरसिटी बसें और 231 इंट्रासिटी बसें शामिल हैं। इंटरसिटी बसें दो या उससे अधिक शहरों के बीच आवागमन को आसान और तेज बनाएंगी। वहीं, इंट्रासिटी बसें शहरों के भीतर यात्रियों को सुरक्षित, सुलभ और किफायती सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराएंगी।
7 शहरों की 351 बसों को दिखाई जाएगी हरी झंडी
पहले चरण में प्रदेश के सात प्रमुख शहरों से संबंधित 351 बसों को हरी झंडी दिखाई जाएगी। इनमें इंदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड शामिल हैं। शहरवार बसों का विवरण इस प्रकार है:
- इंदौर: 145 बसें, जिनमें 50 इंटरसिटी और 95 इंट्रासिटी बसें शामिल हैं।
- भोपाल: 106 बसें, जिनमें 23 इंटरसिटी और 83 इंट्रासिटी बसें हैं।
- जबलपुर: 67 बसें, जिनमें 14 इंटरसिटी और 53 इंट्रासिटी बसें शामिल हैं।
- रीवा: 18 इंटरसिटी बसें।
- देवास: 10 इंटरसिटी बसें।
- कटनी: 3 इंटरसिटी बसें।
- भिंड: 2 इंटरसिटी बसें।
2031 तक 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़ने का लक्ष्य
सरकार के अनुसार, मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत वर्ष 2031 तक प्रदेश की 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के तहत प्रदेशभर में करीब 15,000 से अधिक आधुनिक सार्वजनिक बसों के संचालन की योजना है। इससे प्रतिदिन 30 लाख से अधिक यात्रियों को सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इसके अलावा 180 से अधिक आधुनिक बस स्टैंड, टर्मिनल और डिपो के कायाकल्प की योजना भी शामिल है।
इलेक्ट्रिक बसों और स्वच्छ ईंधन पर जोर
प्रदेश सरकार सार्वजनिक परिवहन को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए इलेक्ट्रिक बसों और स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल के विस्तार पर भी जोर देगी। इसका उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन को कम करना और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना है।
ITMS से होगी बसों की रियल-टाइम निगरानी
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत संचालित बसों की निगरानी इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) के जरिए की जाएगी। इसके लिए मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MPYPIL) और उसकी सात सहायक कंपनियों में आधुनिक कमांड-कंट्रोल सेंटर स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से बसों के संचालन, लोकेशन, समयबद्धता और अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों की रियल-टाइम निगरानी की जाएगी।
बसों में CCTV, पैनिक बटन और GPS ट्रैकिंग की सुविधा
सार्वजनिक बसों में महिला और बाल सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। योजना के तहत बसों को 7 CCTV कैमरों, पैनिक बटन और रियल-टाइम व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग (VLTD) सिस्टम से लैस किया जा रहा है। इसके अलावा यात्रियों की सुविधा के लिए पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम (PIS), ड्राइवरों की तकनीकी ट्रेनिंग और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र की व्यवस्था की जाएगी। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है।
PPP मॉडल से निजी बस ऑपरेटरों की भागीदारी
योजना में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के जरिए निजी बस ऑपरेटरों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। इसके लिए पारदर्शी अनुबंध प्रणाली और प्रोत्साहन योजनाएं लागू की जाएंगी। PPP मॉडल के तहत निजी ऑपरेटरों को राजस्व रिसाव रोकने, विज्ञापन और कार्गो जैसी नॉन-फेयर रेवेन्यू सेवाओं को बढ़ाने तथा आधुनिक डिपो और टर्मिनलों के इस्तेमाल की सुविधा मिलेगी। सरकार की ओर से प्रशासनिक सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा।
परिवहन क्षेत्र में रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ेंगे
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के विस्तार से परिवहन क्षेत्र में रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। बस संचालन के अलावा वाहन निर्माण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी सेवाओं और अन्य संबद्ध क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। सरकार के अनुसार, इससे परिवहन क्षेत्र से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा मिलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
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