October 23, 2026

245 KM लंबाई, 21 इंटरचेंज और 322 अंडरपास... बिहार को मिलेगा पहला नेशनल एक्सप्रेस-वे, पटना से पूर्णिया का सफर 3 घंटे में

Patna Purnia Expressway: बिहार के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठने जा रहा है. राज्य को अपना पहला नेशनल एक्सप्रेस-वे (NE-9) मिलने वाला है. पटना से पूर्णिया तक बनने वाला यह एक्सप्रेस-वे बिहार की सड़क कनेक्टिविटी की तस्वीर बदलने के साथ ही कोसी और सीमांचल के आर्थिक एवं सामाजिक विकास का नया आधार बनेगा. करीब 31,987 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण कार्य का शुभारंभ 20 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे.

करीब 245 किलोमीटर लंबा पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे चार लेन का ग्रीनफील्ड मार्ग होगा. इसे भविष्य में छह लेन तक विस्तारित करने की व्यवस्था रखी गई है. एक्सप्रेस-वे पर वाहनों के लिए 120 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन गति निर्धारित की गई है. इसके निर्माण के बाद पटना से पूर्णिया का सफर करीब तीन घंटे में पूरा होने की उम्मीद है. फिलहाल इस दूरी को तय करने में सड़क मार्ग से सात से साढ़े आठ घंटे तक का समय लग जाता है.

यह परियोजना बिहार के लिए इसलिए भी खास है, क्योंकि पहली बार राज्य की सीमाओं के भीतर ही एक ग्रीनफील्ड नेशनल एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया जा रहा है.

हाजीपुर से पूर्णिया तक बनेगा NE-9

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे वैशाली जिले के मीरनगर अरेजी, हाजीपुर के पास एनएच-22 से शुरू होगा. यहां से यह नरहरपुर, हरलोचनपुर, बाजिदपुर, सरौंजा, रसना, परोरा और फतेहपुर होते हुए पूर्णिया जिले के हंसदाह में एनएच-27 यानी ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर से जुड़ेगा. इस एक्सप्रेस-वे की कुल लंबाई 244.96 किलोमीटर निर्धारित की गई है. पटना रिंग रोड से जुड़ाव होने के कारण राजधानी पटना के साथ-साथ पूर्णिया और किशनगंज की ओर जाने वाले यात्रियों को भी इसका लाभ मिलेगा.

केंद्र सरकार ने 29 जुलाई 2025 को जारी अधिसूचना के माध्यम से हाजीपुर से पूर्णिया तक के इस ग्रीनफील्ड मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग NE-9 के रूप में अधिसूचित किया था. इससे पहले मार्च 2025 में भूमि अधिग्रहण से संबंधित अधिसूचनाएं जारी की गई थीं.

31,987 करोड़ की परियोजना

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे की अनुमानित पूंजीगत लागत करीब 31,987 करोड़ रुपये बताई गई है. वहीं, सड़क के जमीनी निर्माण पर 12,052 करोड़ रुपये खर्च होने का आंकड़ा परियोजना से संबंधित विवरणों में दिया गया है. इस परियोजना का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत किया जाएगा. इस मॉडल में सरकार 40 प्रतिशत राशि खर्च करेगी, जबकि निर्माण एजेंसी को 60 प्रतिशत राशि का निवेश करना होगा. निर्माण एजेंसी अपनी लागत की वसूली टोल के माध्यम से करेगी.

एक्सप्रेस-वे का निर्माण तीन पैकेज में प्रस्तावित है.

  • पहला पैकेज: मीरनगर अरेजी से भिरहा तक 84.500 किलोमीटर. अनुमानित लागत 10,083.96 करोड़ रुपये.
  • दूसरा पैकेज: भिरहा से सरौंजा तक 51.835 किलोमीटर. अनुमानित लागत 8,564.82 करोड़ रुपये.
  • तीसरा पैकेज: सरौंजा से हंसदाह तक 108.625 किलोमीटर. अनुमानित लागत 13,338.32 करोड़ रुपये.

दूसरे पैकेज में कुशेश्वरस्थान से सिमरी बख्तियारपुर के बीच कोसी नदी पर 7.020 किलोमीटर लंबा छह लेन का पुल भी प्रस्तावित है.

छह जिलों के 29 प्रखंडों में जमीन अधिग्रहण

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए बिहार के छह जिलों के 29 प्रखंडों में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है. परियोजना के लिए 250 से अधिक गांवों की जमीन चिह्नित की गई है.

जिलावार प्रखंडों की संख्या इस प्रकार है—

  • वैशाली: 6 प्रखंड
  • समस्तीपुर: 8 प्रखंड
  • सहरसा: 5 प्रखंड
  • पूर्णिया: 6 प्रखंड
  • दरभंगा: 2 प्रखंड
  • मधेपुरा: 2 प्रखंड

परियोजना के लिए कुल 2,236.003 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता बताई गई है. इसमें 53.091 हेक्टेयर वन भूमि, 37.18 हेक्टेयर सरकारी जमीन और 2,117.218 हेक्टेयर निजी जमीन शामिल है. भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के तहत आगे बढ़ाई जा रही है. संबंधित जमीन का मुआवजा निर्धारित नियमों और मूल्यांकन के आधार पर तय किया जाएगा.

20 नदियों पर पुल, 21 इंटरचेंज और 322 अंडरपास

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा. इसके निर्माण में 21 बड़े पुल, 140 छोटे पुल, 11 रेलवे ओवरब्रिज, 21 इंटरचेंज और 322 अंडरपास शामिल हैं. मार्ग में बागमती, कमला, कोसी, बूढ़ी गंडक, पिपरा, बाया, नून, जमुआरी, करेहा, जिरवा, तिलबह, सउरा, सतरस धार, अर धार, हरैली, हाहा धार, भणेश धार, गुलेला धार, लिबरी धार और खाता धार सहित 20 नदियों एवं जलधाराओं पर पुल बनाए जाएंगे.

सड़क का डिजाइन इस तरह तैयार किया जाएगा कि वाहन 120 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन गति से चल सकें. भविष्य में इसे छह लेन तक विस्तारित करने की योजना भी है.

समस्तीपुर, सहरसा और मधेपुरा को मिलेगी सीधी कनेक्टिविटी

इस एक्सप्रेस-वे की एक बड़ी विशेषता यह है कि समस्तीपुर, सहरसा और मधेपुरा जिला मुख्यालयों को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए अलग-अलग संपर्क मार्ग यानी स्पर बनाए जाएंगे. इससे इन जिलों के लोगों को एक्सप्रेस-वे तक पहुंचने के लिए लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा. बेहतर कनेक्टिविटी से स्थानीय व्यापार, उद्योग और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

18 शहरों और कस्बों को मिलेगा सीधा फायदा

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे छह जिलों के 18 शहरों और कस्बों को सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगा. इनमें हाजीपुर, राजापाकर, जंदाहा, मोरवा, सरायरंजन, उजियारपुर, विभूतिपुर, रोसड़ा, कुशेश्वरस्थान, सिमरी बख्तियारपुर, सौर बाजार, ग्वालपाड़ा, बिहारीगंज, बड़हरा, धमदाहा, कृत्यानंदनगर, कस्बा और पूर्णिया शामिल हैं.

इन क्षेत्रों के लोगों को एक्सप्रेस-वे तक सीधी पहुंच मिलने से व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी. स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी.

नौ नेशनल हाईवे और आठ स्टेट हाईवे से जुड़ेगा एक्सप्रेस-वे

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे को नौ राष्ट्रीय राजमार्गों और आठ राज्य राजमार्गों से जोड़ने की योजना है. इसके अलावा राज्य के पांच एयरपोर्ट से आने-जाने वाले यात्रियों को भी इस एक्सप्रेस-वे का लाभ मिलेगा. इससे बिहार के सड़क परिवहन नेटवर्क को व्यापक मजबूती मिलेगी. पटना, पूर्णिया और कोसी-सीमांचल के बीच तेज सड़क संपर्क बनने से व्यापार, इलाज, शिक्षा और रोजगार के लिए आवागमन आसान होगा

वर्तमान में पटना से पूर्णिया पहुंचने के लिए यात्रियों को दो प्रमुख सड़क मार्गों का विकल्प मिलता है. मुजफ्फरपुर, दरभंगा और सुपौल होते हुए एनएच-22 एवं एनएच-27 के रास्ते पूर्णिया पहुंचने में करीब 8 से साढ़े 8 घंटे का समय लगता है. वहीं, बख्तियारपुर, मोकामा, खगड़िया और कटिहार होते हुए एनएच-31 एवं एनएच-231 के रास्ते पूर्णिया पहुंचने में करीब सात घंटे लगते हैं.

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे बनने के बाद यह सफर महज तीन घंटे में पूरा किया जा सकेगा. इससे यात्रियों के समय और ईंधन की बड़ी बचत होगी. कोसी और सीमांचल के किसानों, व्यापारियों और निवेशकों को मिलेगा फायदा पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे को बिहार के आर्थिक विकास की नई लाइफलाइन के रूप में देखा जा रहा है. खासकर कोसी और सीमांचल के किसानों के लिए यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा.

पूर्णिया, सहरसा, मधेपुरा और आसपास के इलाकों में कृषि उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी. तेज परिवहन सुविधा से कृषि आधारित व्यापार, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. व्यापारियों और निवेशकों के लिए भी यह मार्ग अहम होगा. बेहतर सड़क कनेक्टिविटी के कारण उद्योगों की स्थापना, माल परिवहन और बाजार तक पहुंच आसान होगी. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.

बिहार के विकास को मिलेगी नई रफ्तार

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर बिहार और सीमांचल के आर्थिक एवं सामाजिक कायाकल्प का आधार बनने जा रहा है. पटना से पूर्णिया की दूरी तीन घंटे में सिमटने से कोसी और सीमांचल के लोगों को राजधानी तक पहुंचने में बड़ी सुविधा मिलेगी. इलाज, शिक्षा, व्यापार और प्रशासनिक कार्यों के लिए पटना आने-जाने वाले लोगों का समय बचेगा.

बेहतर सड़क संपर्क से निवेश, रोजगार और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. खासकर पूर्णिया और सीमांचल के लिए यह परियोजना आने वाले वर्षों में विकास की दिशा बदलने वाली साबित होगी. बिहार को पहला नेशनल एक्सप्रेस-वे मिलने की यह पहल राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ ही विकास की नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाली है.

मोहित पंडित

मोहित पंडित

मोहित पंडित ने साल 2004 से अपनी पत्रकारिता की शुरुआत की. नई बात, सन्मार्ग, सोनभद्र जैसे अखबारों में वे अपनी सेवा दे चुके हैं. वे सीमांचल के समाचारों को सकारात्मक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हैं और स्थानीय घटनाओं को उच्च स्तर पर रिपोर्ट करने में निपुण हैं. उनकी लेखनी में संवेदनशीलता और नैतिकता झलकती है.

Read More

google button