इंडोनेशिया एक बार फिर भूकंप के तेज झटकों से हिल उठा है. महज 24 घंटे के भीतर देश में तीन बड़े भूकंप आए और इनके बाद 230 से ज्यादा आफ्टरशॉक्स ने धरती को लगातार हिलाए रखा. पहला और सबसे ताकतवर भूकंप 7.7 तीव्रता का था, जो 14-15 अगस्त 2026 की रात पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत के एंडे शहर से करीब 68 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में, फ्लोरेस द्वीप के पास आया. इसके कुछ ही घंटों बाद उत्तरी सुमात्रा में 6.9 तीव्रता का दूसरा भूकंप आया और फिर करीब 600 मील दूर 5.7 तीव्रता का तीसरा भूकंप दर्ज किया गया. यानी एक ही दिन में देश के अलग-अलग हिस्सों में तीन बड़े झटके महसूस किए गए.
इस भूकंप ने फ्लोरेस द्वीप पर भारी तबाही मचाई. अब तक 47 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों घर बर्बाद हो गए. हालात इतने गंभीर थे कि इंडोनेशिया के चार प्रांतों में सुनामी अलर्ट जारी करना पड़ा. इसके बाद ऑस्ट्रेलिया और तिमोर-लेस्ते जैसे पड़ोसी देशों की एजेंसियां भी हाई अलर्ट पर आ गईं. इस रिपोर्ट में जानेंगे कि भूकंप कहां-कहां आए, कितना नुकसान हुआ, कौन से देश अलर्ट पर रहे और सबसे अहम इतने कम समय में इतने भूकंप और सैकड़ों आफ्टरशॉक्स आने की वैज्ञानिक वजह क्या है.

कितने भयानक थे भूकंप के झटके
अमेरिकी भूगर्भीय सर्वे एजेंसी के मुताबिक मुख्य भूकंप 15 अगस्त 2026 को स्थानीय समय के अनुसार सुबह करीब 5:58 बजे आया. इसकी गहराई करीब 10 किलोमीटर थी. इसके तुरंत बाद झटकों का सिलसिला शुरू हो गया. फ्लोरेस द्वीप पर पूरे दिन 230 से ज्यादा आफ्टरशॉक्स दर्ज हुए. इनमें सबसे तेज झटका 6.2 तीव्रता का था. कुछ एजेंसियों ने आफ्टरशॉक्स की संख्या 340 तक बताई है.
स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक ये आफ्टरशॉक्स अगले कई दिनों तक जारी रह सकते हैं. भूकंप से फ्लोरेस के साथ-साथ मंग्गराई और सिक्का जैसे इलाकों में भी भारी नुकसान हुआ. कम से कम 157 घर पूरी तरह गिर गए और करीब 200 घरों को नुकसान पहुंचा. इसके चलते करीब 2,000 ग्रामीणों को अस्थायी कैंपों में जाना पड़ा. भूस्खलन की वजह से कई रास्ते बंद हो गए, जिससे राहत टीमों को दूरदराज के गांवों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है. ऐसे में मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका है.
4 प्रांत, 10 जगहों पर लहरें
भूकंप के सिर्फ दो मिनट 16 सेकंड बाद ही बीएमकेजी यानी इंडोनेशिया की मौसम एजेंसी ने सुनामी अलर्ट जारी कर दिया. यह अलर्ट पूर्वी नुसा तेंगारा, पश्चिमी नुसा तेंगारा, दक्षिण सुलावेसी और दक्षिण-पूर्व सुलावेसी के 22 तटीय इलाकों के लिए था. यह सिर्फ एक आशंका नहीं थी, बल्कि समुद्र में हलचल भी देखी गई. रियोक में 1.61 मीटर, मौरोले में 0.94 मीटर, लाबुआन बाजो में 30 सेंटीमीटर और डोम्पु में 17 सेंटीमीटर ऊंची लहरें उठीं. कुल 10 जगहों पर सुनामी का असर दर्ज किया गया. हालांकि करीब तीन घंटे बाद समुद्र के पानी का लेवल खतरनाक तरीके से बढ़ता नहीं दिखा, जिसके बाद सुनामी अलर्ट वापस ले लिया गया.

कौन से 2 देश हाई अलर्ट पर आए
भूकंप का सीधा असर इंडोनेशिया तक रहा, लेकिन इसके झटकों और सुनामी के खतरे को देखते हुए पड़ोसी देशों में भी अलर्ट जारी किया गया. ऑस्ट्रेलिया की सुनामी चेतावनी एजेंसी तुरंत एक्टिव हो गई. हालांकि एजेंसी ने साफ किया कि इस भूकंप से ऑस्ट्रेलिया की मुख्य जमीन, द्वीपों या क्षेत्रों पर सुनामी का कोई खतरा नहीं है. दूसरी तरफ, तिमोर-लेस्ते में मुख्य भूकंप के बाद आए एक तेज आफ्टरशॉक के झटके राजधानी दिली में भी महसूस किए गए. यह जगह भूकंप के केंद्र से करीब 441 किलोमीटर दूर है. हालांकि दोनों देशों में किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है.
आखिर वजह क्या है?
इतने कम समय में इतने भूकंप और सैकड़ों आफ्टरशॉक्स आने की सबसे बड़ी वजह इंडोनेशिया की भौगोलिक स्थिति है. यह देश प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर पर स्थित है. यहां यूरेशियन, प्रशांत और ऑस्ट्रेलियाई टेक्टोनिक प्लेट्स के बीच लगातार हलचल होती रहती है. फ्लोरेस क्षेत्र में स्ट्राइक-स्लिप और थ्रस्ट, दोनों तरह के फॉल्ट मौजूद हैं. बीएमकेजी के भूकंप और सुनामी निदेशक के मुताबिक यह भूकंप फ्लोरेस बैक-आर्क थ्रस्ट की एक्टिविटी से आया. इस फॉल्ट में आगे 7.8 से 7.9 तीव्रता तक के भूकंप आने की क्षमता बताई गई है. जब टेक्टोनिक प्लेट्स के बीच लंबे समय से जमा ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है तो एक बड़ा भूकंप आता है. इसके बाद जमीन के अंदर बची ऊर्जा एडजस्ट होती है और लगातार छोटे-बड़े आफ्टरशॉक्स आते हैं. इंडोनेशिया में फिलहाल यही सिलसिला देखने को मिल रहा है.

देवेश कुमार पांडेय
देवेश कुमार पांडेय TV9 Hindi में बतौर सब-एडिटर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के अमेठी के रहने वाले देवेश को राजनीति के अलावा इतिहास, साहित्य में दिलचस्पी है. साल 2024 में भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) के अमरावती कैंपस से पत्रकारिता की पढ़ाई की है. देवेश को घूमना, लिखना, पढ़ना और पॉडकास्ट सुनना पसंद है.
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