भोपाल/चित्रकूट: शनिवार 29 अगस्त की सुबह से लेकर रविवार की दोपहर तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पूरी तरह से ' सुपरफास्ट एक्शन मोड' में नज़र आ रहे हैं। नक्सलवाद की चुनौतियों से निपटने से लेकर बाढ़ की विभीषिका के बीच ग्राउंड ज़ीरो पर खुद मोर्चा संभालने तक, मुख्यमंत्री ने पिछले 24 घंटों में जो तत्परता दिखाई है, वह उनके 'पीपल्स-फर्स्ट' (People's First) के कमिटमेंट को साबित करती है। श्री रामचरितमानस में इसी भावना को श्री राम भक्त हनुमान ने व्यक्त किया है।
हनूमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रनाम।
राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ बिश्राम॥
1. बालाघाट में आदिवासियों के बीच: "डेवलपमेंट का मॉडल आप ही तय करेंगे"
शनिवार, 29 अगस्त की सुबह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बालाघाट के उन सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में पहुंचे, जो पिछले 40 वर्षों से नक्सलवाद (Naxalism) के साए में जी रहे थे। इसी साल इस पूरे क्षेत्र को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त कराया गया है। मुख्यमंत्री ने आदिवासियों के बीच पहुंचकर सीधे संवाद किया और स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र का विकास (Development) किस तरह होना चाहिए, इसका निर्णय खुद आदिवासी समाज ही करेगा। समस्याओं के सॉल्यूशन भी वे खुद बताएंगे और सरकार उसी ब्लूप्रिंट के अनुसार काम करेगी, ताकि आदिवासियों को प्रशासन या सरकार से कोई शिकायत न रहे।
2. बिना किसी पेंडेंसी के एक्शन, दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह से मुलाक़ात
बालाघाट के आदिवासियों की समस्याओं को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री ने मामले को एक दिन भी पेंडिंग (Pending) नहीं रहने दिया। शनिवार को ही वे बालाघाट से सीधे दिल्ली पहुंचे। वहां उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह से मुलाक़ात की। बैठक में मुख्यमंत्री ने नक्सल-मुक्त हुए क्षेत्रों की चुनौतियों और उनके स्थायी समाधान (Solutions) को लेकर विस्तार से चर्चा की।
3. दिल्ली से रीवा: रद्द किए सारे प्रोग्राम, रात में ही की इमरजेंसी मीटिंग
दिल्ली से लौटते ही, जैसे ही मुख्यमंत्री को सतना और चित्रकूट में भारी बारिश (Heavy Rain) और मंदाकिनी नदी में आई भीषण बाढ़ की खबर मिली, उन्होंने शनिवार शाम के अपने सभी पूर्व-निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिए और सीधे रीवा पहुंचे। रीवा पहुंचते ही उन्होंने बिना वक्त गंवाए देर रात को ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक आपात बैठक (Emergency Meeting) बुलाई। मुख्यमंत्री ने चित्रकूट और सतना जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति और वहां जारी रेस्क्यू ऑपरेशन्स (Rescue Operations) की गहन समीक्षा की।
4. चित्रकूट के 'ग्राउंड ज़ीरो' पर मुख्यमंत्री
रविवार, 30 अगस्त की सुबह होते ही मुख्यमंत्री सीधे चित्रकूट के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पीड़ितों के बीच पहुंचे। चित्रकूट में मंदाकिनी और सेमरावल नदियों में आई इस भारी बाढ़ ने पिछले कई सालों के पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। नदी का पानी लोगों के घरों में घुसने से उनके सामान को काफी क्षति पहुंची है। मुख्यमंत्री ने तुरंत एक्शन लेते हुए मौके पर निम्नलिखित बड़े कदम उठाए और दिशा-निर्देश दिए:
सीएम ने चित्रकूट विकास प्राधिकरण के आश्रय स्थलों (Shelter Homes) का दौरा कर वहां रुके प्रभावित लोगों से बात की। चित्रकूट में प्रशासन द्वारा ऐसे 6 आश्रय स्थल बनाए गए हैं, जहां लोगों के रुकने, भोजन और मेडिकल (Medical) सुविधाओं की पूरी व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री ने बाढ़ पीड़ितों को ढाढस बंधाया और उन्हें राहत सामग्री तथा सूखा राशन (Dry Ration) वितरित किया।
चित्रकूट में सेना के हेलीकॉप्टर और जबलपुर से आई एसडीईआरएफ (SDRF) की टीमें लगातार बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। मंदाकिनी नदी का जलस्तर फिलहाल अधिकतम फ्लड लेवल 136 मीटर के करीब पहुंच रहा है। राहत की बात यह रही कि वेदर फोरकास्ट (Weather forecast) और प्रशासन की अलर्टनेस (Alertness) के कारण कोई जनहानि (Loss of life) नहीं हुई है। सहायता के लिए कंट्रोल रूम का टेलीफोन नंबर 07672-223211 भी जारी किया गया है।
लॉस का सर्वे और फाइनेंशियल असिस्टेंस:
सीएम डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि बाढ़ का पानी कम होते ही प्रभावित लोगों को सुरक्षित उनके घरों तक पहुंचाया जाएगा। जिन लोगों के घरों, सामान या पशुओं की हानि (Loss) हुई है, उसका प्रशासन द्वारा तुरंत एक प्रॉपर सर्वे (Proper Survey) कराया जाएगा और नियम के अनुसार आर्थिक सहायता (Financial Assistance) दी जाएगी।
Dr Mohan Yadav on a 24-Hour Nonstop Schedule: Balaghat to Delhi, Then Bhopal, Rewa and Chitrakoot
बालाघाट के आदिवासियों को नक्सलवाद के साए से बाहर निकालकर विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के संकल्प से लेकर, चित्रकूट के बाढ़ पीड़ितों के आंसू पोंछने तक, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कि यह दौड़ भाग, स्पष्ट करती है कि वह REEL में नहीं बल्कि रियल में काम करना चाहते हैं।
