August 18, 2026

'खाने में नमक कम...', बच्चों ने बोला तो रसोइया ने डाल दिया सर्फ, 24 से ज्यादा छात्र-छात्राएं बीमार

Nalanda News: बिहार के नालंदा जिले से स्कूल में मिड डे मील को लेकर लापरवाही का मामला सामने आया है. नूरसराय थाना क्षेत्र के मध्य विद्यालय परासी में मंगलवार को खाना खाने के बाद दो दर्जन से ज्यादा छात्र-छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई. बच्चों ने उल्टी और चक्कर आने की शिकायत की. इसके बाद स्कूल में अफरातफरी मच गई. आनन-फानन में बीमार बच्चों को बिहारशरीफ सदर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज किया जा रहा है. सिविल सर्जन डॉ. जयप्रकाश सिंह भी अस्पताल पहुंचे और बच्चों का हाल जाना. उन्होंने बताया कि सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं.

नमक की जगह सर्फ डालने से बिगड़ी बच्चों की तबीयत

विद्यालय के प्राचार्य शैलेंद्र कुमार सिंह के मुताबिक, स्कूल में मिड डे मील पास के एक एनजीओ की ओर से उपलब्ध कराया जाता है. मंगलवार को मेन्यू के अनुसार बच्चों को सोयाबीन-चावल परोसा गया था. कुछ बच्चे खाना खा चुके थे, जबकि दूसरी पंक्ति के बच्चे भोजन कर रहे थे. इसी दौरान बच्चों ने खाने में नमक कम होने की शिकायत की. बताया गया कि रसोईघर में नमक और सर्फ के डिब्बे एक ही जगह रखे हुए थे. बच्चों की शिकायत के बाद रसोइया ने गलती से नमक की जगह सर्फ डाल दिया और वही भोजन बच्चों को परोस दिया.

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खाना खाने के कुछ देर बाद होने लगी उल्टी

सर्फ मिला खाना खाने के कुछ देर बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी. कई बच्चों को उल्टी और चक्कर आने लगे. स्कूल में मौजूद कर्मचारियों ने तत्काल प्राथमिक उपचार देने की कोशिश की, लेकिन बच्चों की हालत में सुधार नहीं हुआ. इसके बाद उन्हें इलाज के लिए बिहारशरीफ सदर अस्पताल भेजा गया. अस्पताल में प्रीति कुमारी, आयुषी कुमारी, लक्ष्मी कुमारी, नीतू कुमारी, शिवानी कुमारी, चांदनी कुमारी, सजनी कुमारी, सुहानी, अनु कुमारी, राखी कुमारी और वैष्णवी कुमारी समेत दो दर्जन से अधिक बच्चों का इलाज किया गया.

एक बेड पर दो-तीन बच्चों को देखकर भड़के परिजन

बच्चों के अस्पताल पहुंचने की जानकारी मिलते ही उनके परिजन भी सदर अस्पताल पहुंचने लगे. अस्पताल में बच्चों की संख्या बढ़ने पर कई जगह एक बेड पर दो से तीन बच्चियों का इलाज किया जा रहा था. इसे देखकर परिजन नाराज हो गए और उन्होंने अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए हंगामा किया.

परिजनों का आरोप था कि बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार होने के बावजूद अस्पताल में पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई. हंगामे की जानकारी मिलने पर सिविल सर्जन डॉ. जयप्रकाश सिंह मौके पर पहुंचे. उन्होंने परिजनों को बच्चों का बेहतर इलाज कराने का भरोसा दिया, जिसके बाद मामला शांत हुआ.

एंबुलेंस नहीं मिली तो ई-रिक्शा से अस्पताल पहुंचे बच्चे

इस घटना में स्वास्थ्य विभाग की आपात व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं. बच्चों के बीमार होने की सूचना मिलने के बावजूद नूरसराय अस्पताल की ओर से स्कूल में एंबुलेंस या मेडिकल टीम भेजे जाने की बात सामने नहीं आई. एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण कई अभिभावक अपने बच्चों को ई-रिक्शा और ऑटो से लेकर सदर अस्पताल पहुंचे.

जांच और लापरवाही पर उठे सवाल

घटना के बाद स्कूल की रसोई व्यवस्था और मिड डे मील की निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. नमक और सर्फ को एक ही जगह रखने की वजह से यह गलती हुई. अब यह भी सवाल है कि रसोई में खाद्य सामग्री और सफाई के सामान को अलग-अलग रखने की व्यवस्था क्यों नहीं थी? फिलहाल सभी बच्चे खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं और डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है. घटना ने स्कूलों में मिड डे मील की तैयारी और आपात स्थिति में स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

(रिपोर्ट- रविकांत कुमार/नालंदा)

आशीष कुमार मिश्रा

आशीष कुमार मिश्रा

आशीष कुमार मिश्रा की 6 साल से जर्नलिज्म की Journey जारी है. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को बनाने में अहम योगदान भारत के राज्यों का है. इन राज्यों से जुड़ी हर खटपट, चाहे राजनीतिक हो या सामाजिक, वो आप तक पहुंचाने में जुटा हुआ हूं. उत्तर प्रदेश समेत देश के तमाम बड़े राज्यों की सियासत को समझता हूं और बेबाकी से उसे लिखता हूं. जर्नलिज्म की Journey 2017 में न्यूज चैनल समाचार टुडे से स्टार्ट हुई, फिर नेशनल वॉइस के साथ भी काम करने का मौका मिला. दो न्यूज चैनलों में काम करने के बाद डिजिटल की तरफ में रुख किया. 2018 में पहली बार हैदराबाद में ईटीवी भारत की डिजिटल विंग टीम से जुड़ा. यहां साढ़े 3 साल का समय बिताने के बाद 2021 में दैनिक भास्कर (लखनऊ) की टीम से जुड़ा. अब यह सफर 2022 से टीवी9 भारतवर्ष के साथ चल रहा है. पत्रकारिता का मैंने ककहरा दैनिक जागरण इंस्टीट्यूट से सीखा. यहीं से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की.

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