July 13, 2026

बिहार में पत्थर खनन होगा, 2300 करोड़ राजस्व मिलेगा: यूपी-झारखंड पर निर्भरता होगी खत्म; मुख्यमंत्री ने छह जिलों में 44 नई खदानों को दी हरी झंडी - Patna News

बिहार में पत्थर खनन होगा, 2300 करोड़ राजस्व मिलेगा:यूपी-झारखंड पर निर्भरता होगी खत्म; मुख्यमंत्री ने छह जिलों में 44 नई खदानों को दी हरी झंडी

पटना35 मिनट पहले

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फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar

फाइल फोटो।

बिहार अब पत्थर और गिट्टी के मामले में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। राज्य सरकार ने गयाजी, नवादा, रोहतास, औरंगाबाद, बांका और शेखपुरा सहित 6 जिलों में पत्थर खनन को विस्तार देने का फैसला किया है।

सीएम सम्राट चौधरी ने इन 6 जिलों की 44 चिन्हित जगहों पर खनन संचालन को मंजूरी दे दी है। इन 44 जगहों पर लगभग 520 एकड़ पहाड़ी पर खनन होगा। इससे सरकार को करीब 2300 करोड़ का राजस्व मिलेगा।

इस परियोजना को शुरू करने के लिए कानूनी और तकनीकी बाधाएं दूर कर ली गई हैं। जिला सर्वेक्षण प्रतिवेदन की रिपोर्ट के आधार पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने खनन के लिए एनओसी दे दी है। साथ ही, कला संस्कृति एवं पर्यटन विभाग ने भी अपनी मंजूरी दे दी है। अब खान एवं भूतत्व विभाग खनन पट्टों की बंदोबस्ती की प्रक्रिया में जुट गया है। भ्रष्टाचार रोकने और पारदर्शिता लाने के लिए सरकार ने ई-नीलामी का रास्ता चुना है।

सभी 44 भूखंडों की बंदोबस्ती केंद्र सरकार की एजेंसी एमएसटीसी के पोर्टल पर की जाएगी। खनन के लिए जो 44 नए भूखंड (प्लॉट) तय किए गए हैं, उनमें सबसे अधिक 17 भूखंड अकेले नवादा जिले में हैं। इसके अलावा शेखपुरा में 10, गयाजी में 9, रोहतास में 4, औरंगाबाद में 3 और बांका में 1 भूखंड पर खनन की प्रक्रिया शुरू होगी। अभी तक बिहार में पत्थर की जरूरतों के लिए उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता था। दूसरे राज्यों से पत्थर आने के कारण भारी परिवहन खर्च, एंट्री शुल्क और टोल टैक्स लगता था, जिससे पत्थर की कीमत बिहार पहुंचते-पहुंचते दोगुनी हो जाती थी। अब यह सस्ता होगा।

विकास की रफ्तार भी बढ़ेगी- बिहार सरकार का यह फैसला आर्थिक और बुनियादी ढांचे के लिहाज से मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। इसके तीन मुख्य असर होंगे

1 राजस्व का बड़ा स्रोत: 2300 करोड़ का सीधा राजस्व बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा। सरकार को सीधा लाभ होगा।

2 महंगाई पर लगाम: परिवहन और टैक्स का बोझ हटने से गिट्टी और पत्थर के दाम गिरेंगे, जिससे घर बनाना सस्ता होगा।

3 बिचौलियों का अंत: ई-नीलामी और एमएसटीसी पोर्टल के इस्तेमाल से ठेकेदारी में होने वाली धांधली रुकेगी और योग्य कंपनियां आएंगी।

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