September 19, 2026

कंगना रनौत के खिलाफ रिवीजन वाद में हुई लंबी बहस: वादी अधिवक्ता ने अधूरी पुलिस आख्या पर उठाए सवाल, अब 23 सितंबर को फिर होगी सुनवाई - Agra News

भाजपा सांसद और फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ जिला जज की कोर्ट में प्रस्तुत रिवीजन पर शुक्रवार को अपर जिला जज प्रथम पुष्कर उपाध्याय की कोर्ट में सुनवाई हुई। मामले में कोर्ट में काफी लंबी बहस हुई। इसके बाद अपर जिला जज प्रथम ने सुनवाई के लिए 23 सि

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सुनवाई के दौरान दलील दी गई कि अवर न्यायालय स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए के न्यायाधीश अनुज कुमार सिंह द्वारा सेशन जज एमपी-एमएलए कोर्ट के 12 नवंबर 2025 के आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है। आरोप लगाया गया कि पुलिस की अधूरी आख्या के आधार पर मामले में सुनवाई की जा रही है।

मामले में कोर्ट में काफी लंबी बहस हुई। इसके बाद अपर जिला जज प्रथम ने सुनवाई के लिए 23 सितंबर 2026 की तारीख नियत की है।

मामले में कोर्ट में काफी लंबी बहस हुई। इसके बाद अपर जिला जज प्रथम ने सुनवाई के लिए 23 सितंबर 2026 की तारीख नियत की है।

वादी अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने 6 जून 2026 को स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए अनुज कुमार सिंह की अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। इसमें कहा गया था कि धारा 225(1) के प्रावधानों और सेशन कोर्ट एमपी-एमएलए के आदेश के तहत पुलिस की अधूरी आख्या पर सुनवाई नहीं की जानी चाहिए।

प्रार्थना पत्र में यह भी कहा गया था कि धारा 225(1) के प्रावधान को पूरा करने के लिए न्यायालय को कंगना रनौत को तलब कर उनका स्वयं बयान लेना चाहिए या वीडियो कांन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उनका बयान दर्ज कर आगे की कार्रवाई करनी चाहिए।

बताया गया कि स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए अनुज कुमार सिंह ने 6 जून 2026 के प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया था। इसके बाद बहस के लिए अंतिम अवसर देते हुए 22 सितंबर 2026 की तारीख नियत की गई थी।

इसी आदेश के खिलाफ प्रस्तुत रिवीजन पर शुक्रवार को अपर जिला जज प्रथम पुष्कर उपाध्याय की कोर्ट में सुनवाई हुई। लंबी बहस सुनने के बाद कोर्ट ने मामले में पुनः सुनवाई के लिए 23 सितंबर 2026 की तारीख तय कर दी। वादी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुखबीर सिंह चौहान, राजवीर सिंह, प्रीति गुप्ता, पंकज बघेल समेत कई अधिवक्ताओं ने बहस की।

किसान आंदोलन के बयान से जुड़ा है मामला कंगना के खिलाफ यह परिवाद अगस्त 2024 में किसान आंदोलन को लेकर दिए गए उनके बयान पर दाखिल किया गया था। वादी रमाशंकर शर्मा ने सितंबर 2024 में कोर्ट में शिकायत की थी। आरोप है कि कंगना की टिप्पणी से किसानों की भावनाएं आहत हुईं।

कंगना ने किसान आंदोलन को लेकर कहा था कि आंदोलन के दौरान हिंसा, हत्या और बलात्कार जैसी घटनाएं हुईं और यदि देश का नेतृत्व मजबूत नहीं होता तो भारत में बांग्लादेश जैसे हालात पैदा हो सकते थे। बाद में उन्होंने अपने बयान की गलत व्याख्या किए जाने की बात कही थी।