August 30, 2026

देश में बढ़ेगी ऊर्जा स्टोरेज क्षमता: 2030 तक 208 गीगावाट घंटे का लक्ष्य, SECL विकसित करेगा 700 मेगावाट सौर ऊर्जा - Raipur News

रायपुर/बिलासपुर1 दिन पहलेलेखक: अनुपम सिंह

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देश में सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन बढ़ने के साथ बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) का तेजी से विस्तार किया जा रहा है।

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की राष्ट्रीय विद्युत योजना के अनुसार, वर्ष 2030 तक देश में करीब 208 गीगावाट घंटे की बैटरी स्टोरेज क्षमता विकसित हो जाएगी। यह क्षमता अतिरिक्त बिजली को संग्रहित कर जरूरत के समय उपलब्ध कराने में मदद करेगी। इससे 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति के साथ ग्रिड की स्थिरता भी बढ़ेगी।

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में एक मेगावाट घंटे से अधिक क्षमता वाली 798 मेगावाट घंटे की बैटरी स्टोरेज परियोजनाएं स्थापित हो चुकी हैं। वहीं, 35.8 गीगावाट घंटे की परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। छत्तीसगढ़ में भी 120 मेगावाट घंटे की क्षमता स्थापित की जा चुकी है।

यह परियोजना राजनांदगांव में है।इधर, कोल इंडिया की सहायक कंपनी एसईसीएल ने भी ग्रीन एनर्जी पोर्टफोलियो बढ़ाने की तैयारी की है। कंपनी ने वर्ष 2028-29 तक 700 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत ग्राउंड माउंटेड, रूफटॉप और फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।

2030 तक 500 गीगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य

देश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर है। ऐसे में दिन में उत्पादित अतिरिक्त बिजली बैटरियों में संग्रहित कर रात या कम उत्पादन वाले समय में इस्तेमाल की जा सकती है।

इससे ग्रिड की स्थिरता, वोल्टेज नियंत्रण, फ्रीक्वेंसी रेगुलेशन और ब्लैक स्टार्ट जैसी व्यवस्थाएं भी मजबूत होंगी।भारत ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म आधारित विद्युत क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य के साथ नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ेगी और बड़े पैमाने पर बिजली संग्रहित करने की जरूरत भी बढ़ेगी।

स्टोरेज सिस्टम को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा केंद्र सरकार ने ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया है। इससे परियोजनाओं के लिए अपेक्षाकृत सस्ती वित्तीय सहायता मिलने का रास्ता खुला है। वायबिलिटी गैप फंडिंग जैसी योजनाओं के जरिए भी इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

एसईसीएल का सौर ऊर्जा पोर्टफोलियो 200 मेगावाट के पार

एसईसीएल की संचालित, निर्माणाधीन और प्रस्तावित परियोजनाओं को मिलाकर सौर ऊर्जा पोर्टफोलियो 200 मेगावाट से अधिक हो गया है। कंपनी भटगांव, बिश्रामपुर, जोहिला और सोहागपुर क्षेत्रों में अलग-अलग सौर परियोजनाओं पर काम कर रही है।

भटगांव और बिश्रामपुर क्षेत्र में कुल 40 मेगावाट क्षमता के ग्राउंड माउंटेड प्लांट चालू हो चुके हैं। इनमें भटगांव में 20 मेगावाट, गोरखनाथपुर में 8 मेगावाट और शिवनंदनपुर में 12 मेगावाट क्षमता शामिल है। इन संयंत्रों से अब तक 90 मिलियन यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन हो चुका है। कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2028-29 तक अपनी सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ाकर 700 मेगावाट करना है।

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