September 11, 2026

Pratapgarh Assembly Caste Equations: प्रतापगढ़ के जातिगत समीकरण और 2027 का चुनावी गणित

Pratapgarh Assembly Caste Equations में पटेल-कुर्मी, मौर्य और अन्य OBC मतदाता चुनावी राजनीति की बड़ी धुरी हैं। इनके साथ अनुसूचित जाति, ब्राह्मण, मुस्लिम, क्षत्रिय, यादव और वैश्य मतदाता भी परिणाम पर सीधा असर डालते हैं। पुराने सामाजिक आकलन में अनुसूचित जाति करीब 53 हजार, अन्य पिछड़ी जातियां 47 हजार, ब्राह्मण 35 हजार, मुस्लिम 33 हजार, पटेल 29 हजार, क्षत्रिय 25 हजार, यादव 22 हजार और वैश्य मतदाता करीब 18 हजार बताए गए थे। 2026 की अंतिम मतदाता सूची में प्रतापगढ़ विधानसभा का वास्तविक वोटर बेस 3,04,324 है।

प्रतापगढ़ विधानसभा संख्या 248 है और यह प्रतापगढ़ लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। सीट सामान्य श्रेणी की है। वर्तमान विधायक भाजपा के राजेंद्र कुमार मौर्य हैं। 2022 में उन्होंने SP गठबंधन की अपना दल (कमेरावादी) उम्मीदवार कृष्णा पटेल को 25,063 वोट से हराया था। लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में इसी विधानसभा खंड में समाजवादी पार्टी ने BJP पर 9,069 वोट की बढ़त बना ली। इस बदलाव ने 2027 के चुनाव को पहले की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी बना दिया है।

उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के चुनावी परिणाम काफी हद तक जटिल जातिगत समीकरणों और ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर निर्भर करते हैं, जिन्हें आगामी 2027 के चुनाव की दिशा तय करने में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।

राज्य के सभी 75 जिलों में चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के तहत मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन किया गया है, जिससे कुल मतदाताओं की संख्या में बदलाव दर्ज हुआ हैं।

प्रतापगढ़ जिले के   प्रतापगढ़ विधानसभा के 2007 से 2022 तक का तुलनात्मक विश्लेषण में बदलाव दर्ज हुआ है। उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के 2007 से 2022 तक के चुनावी इतिहास, विजेता-उपविजेता प्रत्याशियों और मत प्रतिशत के तुलनात्मक विश्लेषण के लिए मदद ली जा सकती है।

प्रतापगढ़ विधानसभा एक नजर में

विवरणजानकारी
विधानसभाप्रतापगढ़
विधानसभा संख्या248
जिलाप्रतापगढ़
लोकसभा क्षेत्रप्रतापगढ़
आरक्षणसामान्य
वर्तमान विधायकराजेंद्र कुमार मौर्य
पार्टीभाजपा
2026 कुल मतदाता3,04,324
SIR से पहले वोटर बेस3,69,178
SIR में शुद्ध कमी64,854
कमी17.57%
2022 विजेताराजेंद्र कुमार मौर्य, BJP
2022 उपविजेताकृष्णा पटेल, AD(K)
2022 जीत का अंतर25,063 वोट
2024 लोकसभा खंड SP वोट89,439
2024 BJP वोट80,370
2024 BSP वोट14,422
2024 SP की BJP पर बढ़त9,069 वोट
प्रमुख सामाजिक समूहपटेल-कुर्मी, मौर्य/OBC, SC, ब्राह्मण, मुस्लिम, क्षत्रिय, यादव, वैश्य

2026 की अंतिम मतदाता सूची में प्रतापगढ़ जिले की सात विधानसभा सीटों पर कुल 21,75,863 मतदाता हैं। इनमें प्रतापगढ़ विधानसभा के 3,04,324 वोटर हैं।

Pratapgarh Assembly Caste Equations: पटेल-OBC वोट सबसे अहम धुरी

Pratapgarh Assembly Caste Equations की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता पटेल और व्यापक OBC प्रभाव है। पुराने राजनीतिक आकलनों में प्रतापगढ़ सदर को स्पष्ट रूप से पटेल बहुल सीट माना गया है। इसके साथ मौर्य, यादव और दूसरे पिछड़े समुदाय चुनावी समीकरण को और मजबूत बनाते हैं।

2022 में BJP ने राजेंद्र कुमार मौर्य को उम्मीदवार बनाया। आधिकारिक राजनीतिक परिचय में उनकी सामाजिक पहचान पिछड़ी जाति, मौर्य दर्ज है। दूसरी तरफ SP गठबंधन ने कृष्णा पटेल को मैदान में उतारा था। यानी उस चुनाव में OBC-पटेल राजनीति दोनों मुख्य खेमों की रणनीति के केंद्र में थी।

2024 में SP उम्मीदवार ने इसी विधानसभा खंड से बढ़त बनाई। इससे संकेत मिलता है कि पटेल-OBC वोट पर किसी एक राजनीतिक खेमे का स्थायी कब्जा नहीं है।

प्रतापगढ़ विधानसभा का संकेतात्मक जातिगत समीकरण

पुराने चुनावी आकलनों में प्रतापगढ़ सदर की सामाजिक तस्वीर इस प्रकार बताई गई थी:

जाति/समुदायपुराना संकेतात्मक अनुमान
अनुसूचित जातिकरीब 53,000
अन्य पिछड़ी जातियांकरीब 47,000
ब्राह्मणकरीब 35,000
मुस्लिमकरीब 33,000
पटेलकरीब 29,000
क्षत्रियकरीब 25,000
यादवकरीब 22,000
वैश्यकरीब 18,000
मौर्य व अन्य OBC समूहव्यापक OBC राजनीति में महत्वपूर्ण
2026 आधिकारिक कुल वोटर3,04,324

ये आंकड़े 2026 की आधिकारिक जाति-वार मतदाता सूची नहीं हैं। निर्वाचन नामावली जाति के आधार पर जारी नहीं होती। ये पुराने चुनावी-सामाजिक अनुमान हैं और वर्तमान कुल मतदाता संख्या पुराने वोटर बेस से काफी बदल चुकी है। इसलिए इन संख्याओं को 2026 का सटीक जातिवार डेटा नहीं माना जाना चाहिए।

इसी तरह “अन्य पिछड़ी जातियां” की पुरानी श्रेणी और अलग से दिए गए पटेल या यादव आंकड़ों को जोड़ते समय दोहरी गणना से बचना जरूरी है।

प्रतापगढ़ वोटर लिस्ट 2026 में 3,04,324 मतदाता

2027 के चुनाव से पहले प्रतापगढ़ विधानसभा में सबसे बड़ा तथ्यात्मक बदलाव मतदाता सूची में आया है।

SIR के बाद अंतिम सूची में 3,04,324 मतदाता दर्ज हैं। प्रतापगढ़ विधानसभा में 64,854 वोटरों की शुद्ध कमी, यानी करीब 17.57 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। इस हिसाब से पुनरीक्षण से पहले वोटर बेस करीब 3,69,178 था।

मतदाता सूचीसंख्या
SIR से पहले वोटर बेस3,69,178
2026 अंतिम मतदाता3,04,324
शुद्ध कमी64,854
कमी17.57%

यह बदलाव 2022 के 25,063 वोट के जीत अंतर और 2024 के 9,069 वोट के SP-BJP अंतर—दोनों से काफी बड़ा है।

इसका मतलब यह नहीं है कि कम हुए मतदाता किसी खास जाति या पार्टी से संबंधित थे। ऐसी कोई आधिकारिक जाति-वार जानकारी उपलब्ध नहीं है। लेकिन 2027 में पुराने बूथवार हिसाब और वोट प्रतिशत को नई मतदाता सूची के अनुसार दोबारा देखना जरूरी होगा।

पटेल-कुर्मी वोट क्यों है सबसे ज्यादा चर्चा में?

प्रतापगढ़ सदर लंबे समय से पटेल प्रभाव वाली सीट मानी जाती रही है। 2017 में अपना दल (सोनेलाल) ने यह सीट जीती। 2019 के उपचुनाव में भी अपना दल (एस) ने जीत बरकरार रखी। 2022 में विपक्षी SP गठबंधन ने अपना दल (कमेरावादी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा पटेल को इसी सीट से उतारा।

यह इतिहास दिखाता है कि पटेल-कुर्मी वोट लगभग हर प्रमुख दल की टिकट रणनीति में महत्वपूर्ण रहा है।

लेकिन 2022 में BJP के राजेंद्र कुमार मौर्य ने 89,762 वोट लेकर जीत दर्ज की। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि गैर-पटेल OBC नेतृत्व के साथ सवर्ण, दलित, शहरी और दूसरे सामाजिक वोट जोड़कर सीट जीती जा सकती है।

2027 में BJP और SP दोनों के लिए पटेल-कुर्मी वोट में बढ़त हासिल करना मुख्य चुनावी लक्ष्य रहेगा।

मौर्य और दूसरे OBC वोट BJP के लिए क्यों अहम?

मौजूदा विधायक राजेंद्र कुमार मौर्य OBC-मौर्य समाज से आते हैं। 2022 में BJP की सफलता ने दिखाया कि पार्टी पटेल बहुल मानी जाने वाली सीट पर मौर्य नेतृत्व के जरिए व्यापक OBC गठजोड़ बनाने में सफल रही।

पुराने सामाजिक आकलन में पटेल के अलावा अन्य पिछड़ी जातियों की संख्या करीब 47 हजार बताई गई थी। यादव मतदाता भी करीब 22 हजार के पुराने अनुमान पर थे।

इसलिए प्रतापगढ़ का OBC वोट केवल पटेल समुदाय तक सीमित नहीं है। 2027 में मौर्य, पटेल, यादव और दूसरे पिछड़े समूहों का अलग-अलग मतदान व्यवहार नतीजे पर बड़ा प्रभाव डालेगा।

दलित, ब्राह्मण और मुस्लिम वोट भी निर्णायक

पुराने आकलन में अनुसूचित जाति मतदाता करीब 53 हजार, ब्राह्मण करीब 35 हजार और मुस्लिम मतदाता करीब 33 हजार बताए गए थे।

इन तीनों समूहों का चुनावी महत्व अलग है। BJP के लिए ब्राह्मण और दलित वोट में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखना जरूरी है, जबकि SP के लिए मुस्लिम मतदाताओं के साथ दलित और OBC वोट जोड़ना महत्वपूर्ण होगा।

BSP के कमजोर होने से दलित वोट का बंटवारा भी खुला हुआ है। 2022 में BSP को 19,249 वोट मिले और 2024 लोकसभा चुनाव में विधानसभा खंड से उसका वोट घटकर 14,422 रह गया।

यदि BSP 2027 में मजबूत उम्मीदवार उतारती है तो दलित और ब्राह्मण सहित कुछ सामाजिक समूहों में उसका प्रदर्शन BJP-SP मुकाबले को प्रभावित कर सकता है।

शहरी और ग्रामीण वोट का मिला-जुला असर

प्रतापगढ़ विधानसभा में जिला मुख्यालय का शहरी क्षेत्र भी आता है और बड़ी ग्रामीण आबादी भी शामिल है। एक पुराने निर्वाचन प्रोफाइल में क्षेत्र की आबादी लगभग 73 प्रतिशत ग्रामीण और 27 प्रतिशत शहरी बताई गई थी।

यही वजह है कि यहां जातिगत समीकरण के साथ शहरी व्यापारी, सरकारी कर्मचारी, किसान और ग्रामीण OBC-दलित मतदाताओं की अलग-अलग प्राथमिकताएं चुनाव में असर डालती हैं।

वैश्य मतदाताओं का पुराना अनुमान करीब 18 हजार था। शहरी क्षेत्रों में व्यापार, यातायात, बाजार और बुनियादी सुविधाएं इनके साथ दूसरे मतदाताओं के लिए भी चुनावी मुद्दा बन सकती हैं।

प्रतापगढ़ विधानसभा चुनाव 2022: BJP की 25,063 वोट से जीत

2022 में भाजपा के राजेंद्र कुमार मौर्य ने 89,762 वोट हासिल किए। SP गठबंधन की अपना दल (कमेरावादी) उम्मीदवार कृष्णा पटेल को 64,699 वोट मिले।

BSP के आशुतोष त्रिपाठी को 19,249, AIMIM के इसरार अहमद को 6,480 और कांग्रेस के नीरज त्रिपाठी को 6,326 वोट मिले। BJP की जीत का अंतर 25,063 वोट रहा।

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट शेयर
राजेंद्र कुमार मौर्यBJP89,76245.80%
कृष्णा पटेलAD(K)64,69933.01%
आशुतोष त्रिपाठीBSP19,2499.82%
इसरार अहमदAIMIM6,4803.31%
नीरज त्रिपाठीकांग्रेस6,3263.23%
NOTA1,3360.68%
BJP की जीत25,063

2022 में BJP ने लगभग 46 प्रतिशत वोट हासिल किए। विपक्षी वोट AD(K), BSP, AIMIM और कांग्रेस के बीच बंटा रहा, जो जीत के बड़े अंतर का एक कारण बना।

2012 से 2022 तक लगातार बदली पार्टी, लेकिन NDA मजबूत हुआ

प्रतापगढ़ विधानसभा का चुनावी इतिहास किसी एक दल की स्थायी पकड़ वाला नहीं रहा है।

2012 में SP ने सीट जीती। 2017 में BJP सहयोगी अपना दल (एस) विजयी हुआ। 2019 के उपचुनाव में भी अपना दल (एस) ने सीट बचाई और 2022 में BJP ने खुद प्रत्याशी उतारकर जीत दर्ज की।

चुनावविजेतापार्टीवोटजीत का अंतर
2012नागेंद्र सिंह ‘मुन्ना यादव’SP43,7547,510
2017संगम लाल गुप्ताAD(S)80,82834,554
2019 उपचुनावराजकुमार पालAD(S)52,94929,721
2022राजेंद्र कुमार मौर्यBJP89,76225,063

इस इतिहास का बड़ा संकेत यह है कि 2017 से 2022 तक NDA ने विधानसभा सीट लगातार अपने पास रखी, भले ही उम्मीदवार और सहयोगी दल बदलते रहे।

2017 में अपना दल ने 34,554 वोट से जीती सीट

2017 विधानसभा चुनाव में अपना दल (एस) के संगम लाल गुप्ता को 80,828 वोट मिले। SP के नागेंद्र सिंह मुन्ना यादव को 46,274 और BSP के अशोक त्रिपाठी को 41,750 वोट मिले।

जीत का अंतर 34,554 वोट रहा।

2017 प्रत्याशीपार्टीवोट
संगम लाल गुप्ताAD(S)80,828
नागेंद्र सिंह मुन्ना यादवSP46,274
अशोक त्रिपाठीBSP41,750
जीत का अंतर34,554

SP और BSP के बीच विपक्षी वोट का बड़ा बंटवारा उस चुनाव में NDA के पक्ष में गया।

2019 उपचुनाव में भी NDA ने बचाई सीट

2019 में संगम लाल गुप्ता के लोकसभा सदस्य बनने के बाद प्रतापगढ़ विधानसभा में उपचुनाव हुआ।

अपना दल (एस) के राजकुमार पाल ने 52,949 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। SP के बृजेश वर्मा को 23,228 और AIMIM के इसरार अहमद को 20,269 वोट मिले।

जीत का अंतर 29,721 वोट रहा।

2019 का उपचुनाव इस बात का संकेत था कि कम मतदान वाले उपचुनाव में भी NDA का संगठनात्मक आधार मजबूत बना रहा।

2024 लोकसभा चुनाव में SP ने पलटा विधानसभा-खंड ट्रेंड

2027 के चुनावी गणित का सबसे महत्वपूर्ण नया संकेत 2024 लोकसभा चुनाव से मिलता है।

प्रतापगढ़ विधानसभा खंड में SP के शिवपाल सिंह पटेल को 89,439 वोट मिले, जबकि BJP के संगम लाल गुप्ता को 80,370 वोट मिले। BSP प्रत्याशी को 14,422 वोट मिले।

SP की BJP पर बढ़त 9,069 वोट रही।

2024 लोकसभा: प्रतापगढ़ विधानसभा खंडवोटवोट शेयर
SP89,43946.45%
BJP80,37041.74%
BSP14,4227.49%
SP की BJP पर बढ़त9,069

2017, 2019 उपचुनाव और 2022 विधानसभा चुनाव में NDA आगे रहा था। 2024 में पहली बार हालिया बड़े चुनाव में SP ने इस खंड से स्पष्ट बढ़त बनाई।

लोकसभा और विधानसभा चुनाव की प्रकृति अलग होती है, इसलिए इसे 2027 का सीधा पूर्वानुमान नहीं माना जाना चाहिए। फिर भी यह NDA के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी है।

2019 से 2024 में कैसे बदला लोकसभा ट्रेंड?

2019 लोकसभा चुनाव में प्रतापगढ़ विधानसभा खंड में BJP को 91,490 वोट मिले थे। BSP को 69,683 वोट मिले और BJP की बढ़त 21,807 वोट थी।

2024 में SP ने 89,439 वोट लेकर BJP को 9,069 वोट से पीछे छोड़ दिया।

लोकसभा चुनावप्रमुख विपक्षी वोटBJP वोटअंतर
2019BSP 69,68391,490BJP +21,807
2024SP 89,43980,370SP +9,069

इस तुलना से स्पष्ट है कि विपक्षी वोट का बड़ा हिस्सा 2024 में SP के पीछे ज्यादा संगठित हुआ।

2022 से 2024 में BJP और विपक्ष का अंतर कैसे बदला?

चुनावBJP वोटप्रमुख विपक्षविपक्षी वोटअंतर
विधानसभा 202289,762AD(K)-SP गठबंधन64,699BJP +25,063
लोकसभा 202480,370SP89,439SP +9,069

दो चुनावों के बीच मुकाबले की दिशा ही बदल गई।

2022 में BJP 25 हजार से अधिक वोट आगे थी, जबकि 2024 में SP 9 हजार से अधिक वोट आगे निकल गई। चुनाव और प्रत्याशी अलग होने के कारण इसे सीधा 34 हजार वोट का विधानसभा स्विंग नहीं माना जाना चाहिए, लेकिन विपक्ष की बढ़ी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता साफ दिखाई देती है।

BSP के घटते वोट का असर

प्रतापगढ़ में BSP लंबे समय तक बड़ी चुनावी ताकत रही है। 2007 में पार्टी ने विधानसभा सीट भी जीती थी।

2012 में BSP को 36,244 वोट, 2017 में 41,750 और 2022 में 19,249 वोट मिले। 2024 लोकसभा चुनाव में उसका विधानसभा-खंड वोट घटकर 14,422 रह गया।

चुनावBSP वोट
विधानसभा 201236,244
विधानसभा 201741,750
विधानसभा 202219,249
लोकसभा 202414,422

BSP के कमजोर होने से दलित और कुछ ब्राह्मण-अन्य वोट BJP और SP के लिए खुला मैदान बन गए हैं।

अगर 2027 में BSP मजबूत प्रत्याशी उतारती है तो 15-25 हजार वोट वाला तीसरा कोण सीधे मुकाबले का नतीजा बदल सकता है।

2027 में BJP की सबसे बड़ी चुनौती

BJP के पास मौजूदा विधायक, 2017 से लगातार NDA की विधानसभा पकड़ और मजबूत संगठन का फायदा है।

राजेंद्र कुमार मौर्य के जरिए पार्टी के पास गैर-यादव OBC नेतृत्व भी है। इसके साथ ब्राह्मण, वैश्य, सवर्ण और दलित मतदाताओं का हिस्सा जोड़ना उसकी मुख्य रणनीति रहेगी।

लेकिन 2024 में SP से 9,069 वोट पीछे रहना बताता है कि सिर्फ पुराने संगठन के भरोसे सीट को सुरक्षित नहीं माना जा सकता।

2027 में BJP को खास तौर पर पटेल-कुर्मी + मौर्य/OBC + ब्राह्मण-वैश्य + दलित हिस्सेदारी को एक साथ मजबूत करना होगा।

SP के लिए 2027 में क्या अवसर?

SP के लिए सबसे बड़ा सकारात्मक संकेत 2024 की विधानसभा-खंड बढ़त है।

2022 में SP गठबंधन की कृष्णा पटेल को 64,699 वोट मिले थे। 2024 में SP प्रत्याशी का वोट बढ़कर 89,439 हो गया।

पार्टी का संभावित सामाजिक फॉर्मूला पटेल-कुर्मी + यादव + मुस्लिम + दलित/OBC हिस्सेदारी रहेगा।

लेकिन चुनौती यह होगी कि 2024 के लोकसभा वोट को विधानसभा चुनाव में बनाए रखा जाए, क्योंकि मौजूदा BJP विधायक का स्थानीय संगठन और प्रत्याशी-आधारित वोट अलग प्रभाव डाल सकता है।

2026 की नई वोटर लिस्ट क्यों सबसे बड़ा नया फैक्टर है?

प्रतापगढ़ विधानसभा में SIR के दौरान 64,854 मतदाताओं की कमी हुई है। यह करीब 17.57 प्रतिशत है और जिले की बड़ी प्रतिशत गिरावटों में शामिल है।

तुलनासंख्या
2026 SIR में वोटर कमी64,854
2022 BJP जीत का अंतर25,063
2024 SP-BJP अंतर9,069

नई सूची का बदलाव दोनों हालिया चुनावी अंतर से कई गुना बड़ा है।

इसलिए 2027 में मतदाता सत्यापन, बूथ कमेटियों की नई सूची, जुड़े युवा मतदाता और प्रत्येक बूथ का संशोधित सामाजिक-राजनीतिक प्रोफाइल बेहद महत्वपूर्ण होगा।

स्थानीय मुद्दे भी जातिगत समीकरण में लगाएंगे सेंध

प्रतापगढ़ सदर में शहरी और ग्रामीण दोनों तरह की समस्याएं चुनाव को प्रभावित कर सकती हैं।

शहर में यातायात और बाजार की समस्याएं, रोजगार के सीमित अवसर, स्वास्थ्य सेवाएं और जिला मुख्यालय की बुनियादी सुविधाएं महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खेती और स्थानीय रोजगार का सवाल अधिक प्रभावी रहता है। जिले की आंवला अर्थव्यवस्था के बावजूद बड़े स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण और रोजगार सृजन की कमी भी लंबे समय से चर्चा में रही है।

अगर 2027 का मुकाबला 10-20 हजार वोट के भीतर रहता है तो ये मुद्दे जातिगत वोट के छोटे हिस्से को बदलकर अंतिम परिणाम पर असर डाल सकते हैं।

2027 में किन फैक्टरों से तय होगा प्रतापगढ़ चुनाव?

चुनावी फैक्टरसंभावित प्रभाव
पटेल-कुर्मी वोटसीट की सबसे महत्वपूर्ण OBC धुरियों में
मौर्य और अन्य OBCBJP के मौजूदा नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण
अनुसूचित जाति वोटBSP के कमजोर होने के बाद बड़ा स्विंग ब्लॉक
ब्राह्मण वोटBJP-SP-BSP सभी के लिए महत्वपूर्ण
मुस्लिम वोटविपक्षी गठजोड़ की अहम धुरी
यादव वोटSP के मुख्य सामाजिक आधार में
वैश्य और शहरी वोटBJP सहित सभी दलों के लिए महत्वपूर्ण
BSP का प्रदर्शनदोतरफा मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकता है
2024 में SP की बढ़तविपक्ष के लिए सकारात्मक संकेत
मौजूदा BJP विधायकसत्ता पक्ष का स्थानीय संगठनात्मक फायदा
2026 वोटर लिस्टपुराने बूथ गणित में बड़ा बदलाव
प्रत्याशी चयनOBC और सवर्ण वोट ट्रांसफर पर सीधा असर

प्रतापगढ़ विधानसभा के जातिगत समीकरण में फिलहाल कौन आगे?

विधानसभा चुनाव के पुराने रिकॉर्ड को देखें तो BJP-NDA के पास मजबूत संगठनात्मक आधार है। 2017 में अपना दल (एस), 2019 उपचुनाव में फिर अपना दल (एस) और 2022 में BJP ने सीट जीती।

लेकिन 2024 का परिणाम इस बढ़त को चुनौती देता है। SP ने प्रतापगढ़ विधानसभा खंड में 89,439 वोट हासिल कर BJP पर 9,069 वोट की बढ़त बनाई।

इसलिए 2027 की शुरुआत में सीट को किसी एक पक्ष के लिए सुरक्षित मानना सही नहीं होगा। BJP के पास मौजूदा विधायक और NDA का पुराना संगठन है, जबकि SP के पास 2024 की बढ़त और विपक्षी वोट के बेहतर एकीकरण का सकारात्मक संकेत है।

वास्तविक मुकाबला टिकट वितरण और पटेल-OBC वोट की दिशा स्पष्ट होने के बाद ही तय होगा।

प्रतापगढ़ विधानसभा के जातिगत समीकरण और 2027 का चुनावी निष्कर्ष

प्रतापगढ़ विधानसभा के जातिगत समीकरण में पटेल और व्यापक OBC वोट सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक धुरी हैं। पुराने आकलन में SC करीब 53 हजार, अन्य पिछड़ी जातियां 47 हजार, ब्राह्मण 35 हजार, मुस्लिम 33 हजार, पटेल 29 हजार, क्षत्रिय 25 हजार, यादव 22 हजार और वैश्य मतदाता करीब 18 हजार बताए गए थे। इन्हें 2026 की आधिकारिक जातिवार वोटर संख्या नहीं माना जाना चाहिए।

2026 की अंतिम मतदाता सूची में प्रतापगढ़ विधानसभा का वास्तविक वोटर बेस 3,04,324 है। SIR में 64,854 मतदाताओं की कमी, यानी 17.57 प्रतिशत बदलाव ने पुराने बूथवार गणित की नए सिरे से समीक्षा जरूरी कर दी है।

राजनीतिक रूप से BJP ने 2022 में 25,063 वोट से सीट जीती थी, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में SP इसी विधानसभा खंड से 9,069 वोट आगे निकल गई। यही उलटफेर 2027 के चुनाव को खुला बनाता है।

2027 में BJP के लिए मौर्य/गैर-यादव OBC + पटेल-कुर्मी + ब्राह्मण-वैश्य + दलित हिस्सेदारी, जबकि SP के लिए पटेल-कुर्मी + यादव-मुस्लिम + दलित/OBC विस्तार सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक फॉर्मूला होगा। BSP का प्रत्याशी और उसका बचा हुआ दलित-सवर्ण वोट भी मुख्य मुकाबले पर असर डाल सकता है।

करीब 3.04 लाख मतदाताओं वाली प्रतापगढ़ विधानसभा का नतीजा अंततः पटेल-OBC वोट की दिशा, दलित वोट के बंटवारे, ब्राह्मण-मुस्लिम रुझान, उम्मीदवार की स्थानीय पकड़ और 2026 की नई मतदाता सूची के बाद बने बूथवार जातिगत समीकरण से तय होने की संभावना है।

  • समाचार संपादन, ब्रेकिंग अलर्ट और फैक्ट-चेक पर फ़ोकस। ज़मीनी रिपोर्टों को डेटा के साथ जोड़ना पसंद। कॉफ़ी, डेडलाइन और सत्य , तीनों से समझौता नहीं।

UTTAR PRADESH NEWS की अन्य न्यूज पढऩे के लिए Facebook और Twitter पर फॉलो करें