Rath Assembly Caste Equations में लोधी और दलित मतदाता सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक धुरियों में गिने जाते हैं। राठ अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा सीट है, लेकिन पुराने चुनावी आकलनों में करीब 30 प्रतिशत लोधी मतदाताओं की मौजूदगी के कारण इसे लोधी प्रभाव वाली सीट माना जाता रहा है। इनके साथ ब्राह्मण, क्षत्रिय, अनुसूचित जाति के अलग-अलग समुदाय, यादव, मुस्लिम, निषाद, कुम्हार और वैश्य मतदाता राठ विधानसभा के जातिगत समीकरण को आकार देते हैं। 2026 की अंतिम मतदाता सूची के आसपास राठ का वोटर बेस करीब 3.83 लाख है।
राठ विधानसभा संख्या 229 है और यह हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। मौजूदा विधायक भाजपा की मनीषा अनुरागी हैं। उन्होंने 2017 में बड़ी जीत के बाद 2022 में भी सीट बरकरार रखी। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में इसी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा और सपा के बीच अंतर सिमटकर सिर्फ 1,252 वोट रह गया। यही आंकड़ा 2027 के मुकाबले को पहले से ज्यादा दिलचस्प बनाता है।
उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के चुनावी परिणाम काफी हद तक जटिल जातिगत समीकरणों और ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर निर्भर करते हैं, जिन्हें आगामी 2027 के चुनाव की दिशा तय करने में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
राज्य के सभी 75 जिलों में चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के तहत मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन किया गया है, जिससे कुल मतदाताओं की संख्या में बदलाव दर्ज हुआ हैं।
हमीरपुर जिले के राठ विधानसभा के 2007 से 2022 तक का तुलनात्मक विश्लेषण में बदलाव दर्ज हुआ है।. उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के 2007 से 2022 तक के चुनावी इतिहास, विजेता-उपविजेता प्रत्याशियों और मत प्रतिशत के तुलनात्मक विश्लेषण के लिए मदद ली जा सकती है।
राठ विधानसभा एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| विधानसभा | राठ |
| विधानसभा संख्या | 229 |
| जिला | हमीरपुर |
| लोकसभा क्षेत्र | हमीरपुर |
| आरक्षण | अनुसूचित जाति (SC) |
| वर्तमान विधायक | मनीषा अनुरागी |
| पार्टी | भाजपा |
| 2026 के आसपास कुल मतदाता | करीब 3.83 लाख |
| पुरुष मतदाता | करीब 2.12 लाख |
| महिला मतदाता | करीब 1.71 लाख |
| थर्ड जेंडर मतदाता | 5 |
| 2022 विजेता | मनीषा अनुरागी, BJP |
| 2022 जीत का अंतर | 61,979 वोट |
| 2024 लोकसभा खंड में BJP बढ़त | 1,252 वोट |
| प्रमुख सामाजिक समूह | लोधी, दलित, ब्राह्मण, क्षत्रिय, मुस्लिम, यादव, निषाद, कुम्हार |
हमीरपुर जिले में दो विधानसभा क्षेत्र—हमीरपुर और राठ—हैं। 2026 की अंतिम मतदाता सूची में पूरे जिले में 7,81,989 मतदाता दर्ज किए गए। इनमें राठ विधानसभा का हिस्सा करीब 3.83 लाख मतदाताओं का है।
Rath Assembly Caste Equations: लोधी और दलित वोट सबसे महत्वपूर्ण धुरी
Rath Assembly Caste Equations की सबसे खास बात यह है कि सीट SC आरक्षित होने के बावजूद चुनावी परिणाम केवल अनुसूचित जाति मतदाताओं से तय नहीं होता। पुराने विधानसभा-स्तरीय जातिगत अनुमान में लोधी मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत बताई गई थी। अनुसूचित जाति मतदाताओं का हिस्सा करीब 20.5 प्रतिशत और कोरी समुदाय का पुराना अलग अनुमान करीब 3 प्रतिशत बताया गया था।
इसके अलावा ब्राह्मण करीब 10 प्रतिशत, क्षत्रिय 7 प्रतिशत, मुस्लिम 5 प्रतिशत और यादव करीब 4 प्रतिशत पुराने सामाजिक आकलनों में बताए गए थे।
यही सामाजिक संरचना राठ की चुनावी राजनीति को जटिल बनाती है। प्रत्याशी SC समुदाय से ही होगा, लेकिन जीत के लिए उसे लोधी, सवर्ण, पिछड़े, मुस्लिम और दूसरे सामाजिक समूहों का भी पर्याप्त समर्थन चाहिए।
राठ विधानसभा का पुराना संकेतात्मक जातिगत समीकरण
| जाति/समुदाय | पुराना संकेतात्मक हिस्सा |
| लोधी | करीब 30% |
| दलित / अनुसूचित जाति | करीब 20.5% |
| ब्राह्मण | करीब 10% |
| क्षत्रिय | करीब 7% |
| मुस्लिम | करीब 5% |
| यादव | करीब 4% |
| कोरी | करीब 3% |
| कुम्हार / प्रजापति | करीब 3% |
| निषाद | करीब 3% |
| वैश्य | करीब 2% |
| अन्य समुदाय | शेष मतदाता |
यह जातिवार तालिका 2026 की आधिकारिक जाति-वार मतदाता सूची नहीं है। विधानसभा स्तर पर निर्वाचन नामावली मतदाताओं की जाति के आधार पर प्रकाशित नहीं होती। ये पुराने चुनावी आकलन हैं, जिनका उपयोग केवल सामाजिक और राजनीतिक रुझान समझने के लिए किया जा सकता है।
कोरी सहित कुछ सामाजिक श्रेणियां व्यापक अनुसूचित जाति वर्ग के भीतर भी आती हैं। इसलिए अलग-अलग प्रतिशतों को जोड़कर मौजूदा जातिवार मतदाता संख्या निकालना उचित नहीं होगा।
2026 में राठ विधानसभा के करीब 3.83 लाख मतदाता
राठ विधानसभा के जातिगत समीकरण को 2027 के संदर्भ में समझते समय नई मतदाता सूची सबसे महत्वपूर्ण आधार है।
2026 की अंतिम सूची के आसपास राठ विधानसभा में करीब 3.83 लाख मतदाता हैं। इनमें लगभग 2.12 लाख पुरुष और 1.71 लाख महिला मतदाता हैं। थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या पांच बताई गई है।
| मतदाता वर्ग | 2026 के आसपास संख्या |
| कुल मतदाता | करीब 3.83 लाख |
| पुरुष | करीब 2.12 लाख |
| महिला | करीब 1.71 लाख |
| थर्ड जेंडर | 5 |
| हमीरपुर जिला कुल मतदाता | 7,81,989 |
यह नया वोटर बेस इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पुराने जातिगत अनुमान तब तैयार किए गए थे, जब मतदाता सूची और राजनीतिक परिस्थितियां अलग थीं। नई सूची के बाद दलों को बूथवार संगठन और सामाजिक समर्थन की गणना भी नए सिरे से करनी होगी।
लोधी वोट राठ विधानसभा में क्यों सबसे महत्वपूर्ण?
राठ विधानसभा के पुराने जातिगत समीकरण में लोधी मतदाता करीब 30 प्रतिशत बताए गए थे। इस अनुमान के आधार पर यह सीट हमीरपुर जिले की सबसे प्रभावशाली लोधी वोट वाली सीटों में गिनी जाती रही है।
सीट भले ही अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो, लेकिन लोधी मतदाता बड़ी संख्या में होने के कारण किसी भी प्रमुख प्रत्याशी की जीत में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहती है।
यही वजह है कि भाजपा, सपा और बसपा के लिए प्रत्याशी SC वर्ग से चुनना संवैधानिक आवश्यकता है, जबकि चुनावी रणनीति में लोधी मतदाताओं को जोड़ना राजनीतिक आवश्यकता बन जाता है।
2024 के लोकसभा चुनाव ने इस समीकरण को और रोचक बनाया। हमीरपुर लोकसभा सीट पर सपा ने अजेंद्र सिंह लोधी को प्रत्याशी बनाया था। पूरे संसदीय क्षेत्र में उन्हें जीत मिली, जबकि राठ विधानसभा खंड में भाजपा महज 1,252 वोट से आगे रह सकी।
इससे साफ है कि 2027 में लोधी वोट का रुझान दोनों प्रमुख गठबंधनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा।
SC आरक्षित सीट पर दलित वोट का अपना गणित
राठ विधानसभा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। पुराने सामाजिक आकलन में दलित मतदाता करीब 20.5 प्रतिशत बताए गए थे। इसके अलावा कोरी समुदाय के लिए करीब 3 प्रतिशत का अलग अनुमान भी दिया गया था।
आरक्षित सीट होने के कारण सभी प्रमुख दलों के उम्मीदवार SC वर्ग से आते हैं। ऐसे में केवल प्रत्याशी की जाति के आधार पर पूरा दलित वोट किसी एक दल को मिलना तय नहीं होता।
यहां दलित वोट के भीतर अलग-अलग समुदायों का राजनीतिक रुझान, उम्मीदवार की स्थानीय पहचान, पार्टी का संगठन और गैर-दलित मतदाताओं से मिलने वाला समर्थन ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है।
2017 और 2022 दोनों चुनाव इसका उदाहरण हैं। भाजपा की मनीषा अनुरागी ने केवल SC वोट के आधार पर नहीं, बल्कि कई सामाजिक समूहों को जोड़कर बड़े अंतर से जीत हासिल की।
ब्राह्मण और क्षत्रिय मतदाता भी महत्वपूर्ण
पुराने राठ विधानसभा जातिगत समीकरण में ब्राह्मण मतदाता करीब 10 प्रतिशत और क्षत्रिय करीब 7 प्रतिशत बताए गए थे।
दोनों को मिलाकर सवर्ण मतदाता एक महत्वपूर्ण चुनावी ब्लॉक बनाते हैं। भाजपा को पिछले विधानसभा चुनावों में इस सामाजिक आधार का फायदा मिला है।
हालांकि 2027 में सवर्ण वोट का केवल एक दिशा में जाना निश्चित नहीं माना जा सकता। प्रत्याशी, स्थानीय मुद्दे, सरकार के प्रति मतदाताओं का रुख और गठबंधन की स्थिति इस वोट को प्रभावित कर सकती है।
भाजपा के लिए चुनौती अपने पारंपरिक सवर्ण समर्थन को बनाए रखते हुए लोधी और दलित वोट का पर्याप्त हिस्सा जोड़ने की होगी।
यादव और मुस्लिम वोट से SP का आधार मजबूत हो सकता है
पुराने सामाजिक अनुमान में मुस्लिम मतदाता करीब 5 प्रतिशत और यादव मतदाता करीब 4 प्रतिशत बताए गए थे।
राठ में इन दोनों समुदायों की संख्या लोधी या दलित मतदाताओं जितनी बड़ी नहीं है, लेकिन चुनाव करीबी होने की स्थिति में इनका संगठित मतदान महत्वपूर्ण हो सकता है।
समाजवादी पार्टी के लिए यादव और मुस्लिम मतदाता एक शुरुआती राजनीतिक आधार तैयार कर सकते हैं। इसके बाद उसे जीत के लिए लोधी, दलित और दूसरे OBC समुदायों में अतिरिक्त समर्थन हासिल करना होगा।
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की बढ़त केवल 1,252 वोट रहना इस बात का संकेत है कि विपक्ष यदि अलग-अलग सामाजिक समूहों का प्रभावी गठबंधन बनाता है तो राठ का मुकाबला बेहद करीबी हो सकता है।
निषाद, कुम्हार और वैश्य मतदाता भी बना सकते हैं अंतर
पुराने राठ विधानसभा के जातिगत समीकरण में निषाद और कुम्हार मतदाता करीब 3-3 प्रतिशत तथा वैश्य मतदाता करीब 2 प्रतिशत बताए गए थे।
अलग-अलग देखने पर ये प्रतिशत छोटे लग सकते हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव में कुछ हजार वोट भी परिणाम बदल सकते हैं।
2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा और सपा के बीच इस विधानसभा खंड का अंतर केवल 1,252 वोट था। ऐसे में निषाद, कुम्हार, वैश्य और दूसरे छोटे सामाजिक समूहों में मामूली वोट शिफ्ट भी 2027 में जीत-हार का फैसला कर सकता है।
यही वजह है कि प्रमुख दल केवल सबसे बड़ी जातियों पर ध्यान देकर चुनावी रणनीति पूरी नहीं कर सकते।
राठ विधानसभा चुनाव 2022: BJP ने 61,979 वोट से जीती सीट
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की मनीषा ने राठ सीट पर बड़ी जीत दर्ज की। उन्हें कुल 1,39,373 वोट मिले।
समाजवादी पार्टी की चंद्रवती वर्मा को 77,394 वोट मिले और वह दूसरे स्थान पर रहीं। भाजपा की जीत का अंतर 61,979 वोट रहा।
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट | वोट शेयर |
| मनीषा अनुरागी | BJP | 1,39,373 | 53.79% |
| चंद्रवती वर्मा | SP | 77,394 | 29.87% |
| प्रसन्न भूषण | BSP | 24,266 | 9.37% |
| कमलेश कुमार वर्मा | कांग्रेस | 5,164 | 1.99% |
| NOTA | — | 4,268 | 1.65% |
| धर्मेंद्र सिंह गौतम | BSCP | 3,021 | 1.17% |
| मतादीन | BMUP | 2,077 | — |
| प्रीति कन्नौजिया | निर्दलीय | 1,960 | — |
| नरेंद्र कुमार | निर्दलीय | 1,585 | — |
| BJP की जीत का अंतर | — | 61,979 | — |
2022 में भाजपा का प्रदर्शन मजबूत था। पार्टी को आधे से ज्यादा वोट मिले, जबकि सपा करीब 30 प्रतिशत पर रही।
यह परिणाम बताता है कि भाजपा ने अपने उम्मीदवार के साथ SC वोट के अलावा लोधी, सवर्ण और दूसरे सामाजिक समूहों का बड़ा हिस्सा भी जोड़ा था।
2017 में BJP की रिकॉर्ड बढ़त
2017 का विधानसभा चुनाव राठ में भाजपा के लिए और भी मजबूत रहा था। मनीषा अनुरागी को 1,47,526 वोट मिले थे।
कांग्रेस के गायादीन अनुरागी को 42,883 और बसपा के अनिल कुमार अहिरवार को 38,710 वोट मिले थे।
भाजपा की जीत का अंतर 1,04,643 वोट रहा।
| 2017 प्रत्याशी | पार्टी | वोट |
| मनीषा अनुरागी | BJP | 1,47,526 |
| गायादीन अनुरागी | कांग्रेस | 42,883 |
| अनिल कुमार अहिरवार | BSP | 38,710 |
| NOTA | — | 4,595 |
| BJP की जीत का अंतर | — | 1,04,643 |
2017 की जीत राठ के हाल के चुनावी इतिहास की सबसे बड़ी जीतों में से एक थी। इसके बाद 2022 में भी भाजपा ने सीट बरकरार रखी, हालांकि जीत का अंतर करीब 42 हजार वोट घट गया।
2012 से 2022 तक कैसे बदली राठ की राजनीति?
2012 में कांग्रेस ने राठ विधानसभा जीती थी। गायादीन अनुरागी को 91,295 वोट मिले थे और उन्होंने समाजवादी पार्टी की अंबेश कुमारी को 36,137 वोट से हराया था।
इसके बाद 2017 में भाजपा ने सीट पर बड़ी सेंध लगाई और 2022 में लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की।
| वर्ष | विजेता | पार्टी | वोट | जीत का अंतर |
| 2012 | गायादीन अनुरागी | कांग्रेस | 91,295 | 36,137 |
| 2017 | मनीषा अनुरागी | BJP | 1,47,526 | 1,04,643 |
| 2022 | मनीषा अनुरागी | BJP | 1,39,373 | 61,979 |
यह चुनावी इतिहास बताता है कि राठ किसी एक सामाजिक समूह से नहीं जीती जा सकती। बड़े दलित आधार के बावजूद हर विजेता को गैर-दलित वोटों में भी मजबूत समर्थन की जरूरत पड़ी है।
2024 लोकसभा चुनाव में सिर्फ 1,252 वोट पर सिमटी BJP की बढ़त
2027 के चुनावी गणित का सबसे महत्वपूर्ण संकेत 2024 लोकसभा चुनाव के विधानसभा-वार आंकड़ों से मिलता है।
राठ विधानसभा खंड में भाजपा के पुष्पेंद्र सिंह चंदेल को 1,16,516 वोट मिले। समाजवादी पार्टी के अजेंद्र सिंह लोधी को 1,15,264 वोट मिले।
दोनों के बीच अंतर सिर्फ 1,252 वोट रहा।
| 2024 लोकसभा: राठ विधानसभा खंड | वोट |
| BJP | 1,16,516 |
| SP | 1,15,264 |
| BSP | 15,788 |
| BJP की बढ़त | 1,252 |
2022 विधानसभा चुनाव में भाजपा सपा से 61,979 वोट आगे थी। दो साल बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में यही बढ़त केवल 1,252 वोट रह गई।
विधानसभा और लोकसभा चुनाव की परिस्थितियां अलग होती हैं, इसलिए दोनों परिणामों की सीधी तुलना नहीं की जा सकती। फिर भी वोटों के अंतर में आया यह बड़ा बदलाव 2027 से पहले महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत जरूर देता है।
2022 से 2024 तक कितना बदला BJP-SP का अंतर?
| चुनाव | BJP वोट | SP वोट | BJP-SP अंतर |
| विधानसभा 2022 | 1,39,373 | 77,394 | BJP +61,979 |
| लोकसभा 2024, राठ खंड | 1,16,516 | 1,15,264 | BJP +1,252 |
करीब दो साल के भीतर भाजपा की बढ़त 61,979 से घटकर 1,252 रह गई। इसका अर्थ यह नहीं कि 2027 में परिणाम स्वतः बदल जाएगा, लेकिन इससे यह जरूर स्पष्ट होता है कि राठ अब एकतरफा राजनीतिक सीट नहीं मानी जा सकती।
2027 में BJP के सामने क्या चुनौती?
भाजपा के पास राठ में कई मजबूत पक्ष हैं। पार्टी लगातार दो विधानसभा चुनाव जीत चुकी है। मौजूदा विधायक मनीषा अनुरागी का व्यक्तिगत राजनीतिक आधार भी है और 2017 तथा 2022 में पार्टी ने बड़े अंतर से जीत हासिल की।
पुराने जातिगत समीकरण में भाजपा को सवर्ण मतदाताओं के साथ लोधी और दूसरे गैर-यादव OBC समुदायों के समर्थन का फायदा मिलता रहा है।
लेकिन 2024 लोकसभा परिणाम पार्टी के लिए चेतावनी है। विधानसभा खंड में 1,252 वोट की मामूली बढ़त बताती है कि 2027 में पुराने सामाजिक समर्थन को स्वतः स्थायी मानना जोखिम भरा होगा।
भाजपा के लिए लोधी वोट को बनाए रखना, दलित मतदाताओं में मजबूत हिस्सेदारी बरकरार रखना और ब्राह्मण-क्षत्रिय आधार को संगठित रखना सबसे महत्वपूर्ण होगा।
SP के लिए 2024 का प्रदर्शन सबसे बड़ा अवसर
समाजवादी पार्टी 2022 के विधानसभा चुनाव में राठ पर भाजपा से 61,979 वोट पीछे थी। इसके बावजूद 2024 के लोकसभा चुनाव में उसने अंतर लगभग खत्म कर दिया।
इस बदलाव में लोधी वोट की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा सकती है, क्योंकि लोकसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी अजेंद्र सिंह लोधी थे।
2027 में सपा के सामने चुनौती यह होगी कि वह लोकसभा चुनाव में बने सामाजिक गठजोड़ को विधानसभा चुनाव तक बनाए रख पाए या नहीं।
यादव और मुस्लिम आधार के साथ यदि पार्टी लोधी तथा SC मतदाताओं के एक महत्वपूर्ण हिस्से को जोड़ लेती है तो मुकाबला बेहद करीबी हो सकता है।
BSP का दलित वोट अभी भी महत्वपूर्ण
राठ SC आरक्षित सीट है, इसलिए बहुजन समाज पार्टी के लिए यह सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्र है।
2017 में बसपा के अनिल कुमार अहिरवार को 38,710 वोट मिले थे। 2022 में पार्टी के प्रसन्न भूषण को 24,266 वोट मिले।
| चुनाव | BSP वोट |
| 2017 | 38,710 |
| 2022 | 24,266 |
| 2024 लोकसभा, राठ खंड | 15,788 |
आंकड़े बताते हैं कि बसपा का वोट पिछले चुनावों में कम हुआ है। लेकिन राठ जैसे SC आरक्षित क्षेत्र में पार्टी का शेष वोट भी भाजपा और सपा के मुकाबले को प्रभावित कर सकता है।
2024 में भाजपा-सपा का अंतर केवल 1,252 वोट था, जबकि बसपा को राठ खंड में 15 हजार से ज्यादा वोट मिले। इसलिए 2027 में बसपा का प्रदर्शन और उसका प्रत्याशी दोनों महत्वपूर्ण रहेंगे।
SC उम्मीदवार, लेकिन गैर-SC वोट ही बना सकता है निर्णायक बढ़त
राठ विधानसभा के जातिगत समीकरण की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक विशेषता सीट का आरक्षण है।
प्रमुख दल यहां केवल अनुसूचित जाति वर्ग के उम्मीदवार को टिकट दे सकते हैं। इसलिए लोधी, ब्राह्मण, क्षत्रिय, यादव, मुस्लिम, निषाद, वैश्य और दूसरे गैर-SC मतदाताओं के पास उम्मीदवार चुनने का विकल्प तो होता है, लेकिन प्रत्याशी उनके अपने समुदाय से नहीं हो सकता।
यही कारण है कि उम्मीदवार की व्यक्तिगत स्वीकार्यता महत्वपूर्ण हो जाती है।
जो SC प्रत्याशी अपने समुदाय के साथ सबसे ज्यादा गैर-SC वोट हासिल कर लेता है, उसके लिए जीत का रास्ता आसान हो जाता है।
2027 में टिकट चयन का जातिगत गणित
राठ में प्रत्याशी चयन केवल SC वर्ग के भीतर किसी उम्मीदवार को टिकट देने तक सीमित नहीं रहेगा।
दल यह भी देखेंगे कि उम्मीदवार की पहचान किस उप-समुदाय से है, दलित समाज के दूसरे वर्गों में उसकी स्वीकार्यता कितनी है और लोधी मतदाताओं के बीच उसका प्रभाव कैसा है।
इसके अलावा ब्राह्मण और क्षत्रिय मतदाताओं में स्वीकार्यता, स्थानीय संगठन, प्रधान-बीडीसी-जिला पंचायत स्तर के नेटवर्क और शहरी राठ क्षेत्र में व्यक्तिगत पकड़ भी महत्वपूर्ण होगी।
2024 का बेहद करीबी अंतर यह संकेत देता है कि प्रत्याशी चयन में छोटी गलती भी बड़े चुनावी नुकसान में बदल सकती है।
राठ में लोधी-दलित गठजोड़ किसे फायदा देगा?
पुराने जातिगत समीकरण को देखें तो लोधी और अनुसूचित जाति मतदाता मिलकर सीट के सबसे बड़े सामाजिक हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं।
यदि किसी दल को इन दोनों समूहों में मजबूत समर्थन मिलता है तो उसकी चुनावी स्थिति स्वाभाविक रूप से मजबूत हो जाती है।
भाजपा ने 2017 और 2022 में इसी तरह व्यापक सामाजिक समर्थन हासिल किया था। दूसरी ओर 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी की लोधी पहचान ने विपक्ष के लिए इस समीकरण में नई संभावना पैदा की।
2027 में सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि लोधी वोट भाजपा के साथ पुराने स्तर पर रहता है या विपक्ष इसमें बड़ी सेंध लगाता है।
ब्राह्मण-क्षत्रिय वोट किस ओर जाएगा?
पुराने अनुमान के मुताबिक ब्राह्मण और क्षत्रिय मिलकर राठ में एक बड़ा सामाजिक समूह बनाते हैं।
भाजपा के पिछले मजबूत प्रदर्शन में इस वोट की अहम भूमिका रही है। अगर यह सामाजिक आधार 2027 में पार्टी के साथ मजबूती से बना रहता है तो विपक्ष को इसकी भरपाई लोधी और दलित वोट में ज्यादा बढ़त से करनी होगी।
दूसरी तरफ यदि स्थानीय प्रत्याशी, टिकट वितरण या क्षेत्रीय मुद्दों के कारण सवर्ण वोट में बिखराव होता है तो मुकाबला और खुल सकता है।
2027 में राठ विधानसभा का संभावित सामाजिक फॉर्मूला
राठ विधानसभा के जातिगत समीकरण को 2027 के लिए मोटे तौर पर पांच हिस्सों में समझा जा सकता है।
पहली और सबसे बड़ी चुनावी धुरी लोधी मतदाता हैं। पुराने अनुमान में इनकी हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत बताई गई थी।
दूसरी धुरी अनुसूचित जाति मतदाता हैं। आरक्षित सीट होने के कारण उम्मीदवार इसी वर्ग से होगा और दलित वोट के भीतर अलग-अलग समुदायों की पसंद महत्वपूर्ण रहेगी।
तीसरी धुरी ब्राह्मण और क्षत्रिय मतदाता हैं, जिनका संयुक्त वोट किसी भी प्रमुख दल को बड़ी बढ़त दे सकता है।
चौथी धुरी यादव और मुस्लिम मतदाता हैं। विपक्षी सामाजिक गठजोड़ में इनकी भूमिका खास हो सकती है।
पांचवीं धुरी निषाद, कुम्हार, वैश्य और दूसरे छोटे OBC-सामाजिक समूह हैं। करीबी मुकाबले में यही वोट अंतिम अंतर पैदा कर सकते हैं।
2027 में किन फैक्टरों से तय होगा राठ का चुनाव?
| चुनावी फैक्टर | संभावित प्रभाव |
| लोधी वोट का रुझान | सबसे महत्वपूर्ण गैर-SC फैक्टर |
| दलित वोट का बंटवारा | आरक्षित सीट पर निर्णायक |
| BJP का सवर्ण आधार | ब्राह्मण-क्षत्रिय वोट महत्वपूर्ण |
| SP का 2024 वाला गठजोड़ | मुकाबला करीबी बना सकता है |
| BSP का वोट शेयर | BJP-SP के अंतर को प्रभावित कर सकता है |
| प्रत्याशी का SC उप-समुदाय | दलित वोट ट्रांसफर पर असर |
| स्थानीय स्वीकार्यता | गैर-SC वोट जोड़ने में महत्वपूर्ण |
| बूथ प्रबंधन | कम अंतर वाले चुनाव में निर्णायक |
| 2026 की नई वोटर लिस्ट | पुराने बूथ गणित में बदलाव |
राठ विधानसभा के जातिगत समीकरण में किसकी स्थिति मजबूत?
2022 के परिणाम को आधार माना जाए तो भाजपा राठ की सबसे मजबूत राजनीतिक ताकत रही है। पार्टी ने 61,979 वोट के बड़े अंतर से सीट जीती थी और इससे पहले 2017 में एक लाख से ज्यादा वोट की बढ़त हासिल की थी।
लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव ने मुकाबले को नई दिशा दी। इसी विधानसभा खंड में भाजपा की बढ़त केवल 1,252 वोट रह गई।
इसलिए 2027 के लिए केवल 2022 के आंकड़ों के आधार पर एकतरफा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
भाजपा के पास मौजूदा विधायक, लगातार दो विधानसभा जीत और मजबूत संगठन का फायदा है। सपा के पास 2024 में लगभग बराबरी तक पहुंचने का सकारात्मक संकेत है। बसपा के पास SC आरक्षित सीट होने के कारण ऐसा सामाजिक वोट है जो मुकाबले की दिशा बदल सकता है।
राठ में 2027 का चुनाव क्यों हो सकता है ज्यादा करीबी?
राठ विधानसभा के जातिगत समीकरण में सबसे बड़ा बदलाव राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का है।
2017 में भाजपा की बढ़त 1,04,643 वोट थी। 2022 में यह घटकर 61,979 रह गई। 2024 लोकसभा चुनाव के विधानसभा खंड में भाजपा केवल 1,252 वोट आगे रही।
| चुनाव | भाजपा की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी पर बढ़त |
| विधानसभा 2017 | 1,04,643 |
| विधानसभा 2022 | 61,979 |
| लोकसभा 2024, राठ खंड | 1,252 |
इन तीन आंकड़ों से यह संकेत मिलता है कि राठ में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ी है। हालांकि अलग-अलग चुनावों के संदर्भ और प्रत्याशी अलग रहे हैं, फिर भी 2027 में भाजपा को पिछली विधानसभा जीत की तुलना में ज्यादा कड़े मुकाबले के लिए तैयार रहना होगा।
राठ विधानसभा के जातिगत समीकरण और 2027 का चुनावी निष्कर्ष
राठ विधानसभा के जातिगत समीकरण का सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि यह SC आरक्षित सीट होने के बावजूद किसी एक दलित समुदाय के भरोसे नहीं जीती जा सकती।
पुराने सामाजिक आकलन में करीब 30 प्रतिशत लोधी मतदाता सबसे बड़ा गैर-SC वोट ब्लॉक माने गए हैं। इसके साथ दलित, ब्राह्मण, क्षत्रिय, मुस्लिम, यादव, निषाद, कुम्हार, वैश्य और दूसरे समुदाय मिलकर सीट का चुनावी संतुलन बनाते हैं।
2022 में भाजपा ने 61,979 वोट के बड़े अंतर से जीत हासिल की थी, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में इसी विधानसभा खंड में उसकी बढ़त केवल 1,252 वोट रह गई। यही बदलाव 2027 को महत्वपूर्ण बनाता है।
भाजपा के लिए पुराना लोधी-सवर्ण-दलित सामाजिक संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। सपा के लिए 2024 में बने लोधी सहित व्यापक विपक्षी वोट को विधानसभा चुनाव तक कायम रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी। बसपा यदि अपने दलित आधार को फिर मजबूत करती है तो वह भाजपा और सपा दोनों का गणित बदल सकती है।
करीब 3.83 लाख मतदाताओं वाली राठ विधानसभा में 2027 की जीत उसी दल के खाते में जाने की संभावना ज्यादा होगी, जो अपने मूल वोट बैंक के बाहर सबसे प्रभावी सामाजिक विस्तार कर सके। राठ का जातिगत समीकरण इसलिए केवल जातियों की संख्या का गणित नहीं, बल्कि लोधी वोट, दलित वोट के भीतर बंटवारे और गैर-SC वोट ट्रांसफर का चुनावी समीकरण है।
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