September 5, 2026

Babina Assembly Caste Equations: बबीना जातिगत समीकरण और 2027 चुनाव

Babina Assembly Caste Equations में लोधी, यादव और अनुसूचित जाति के मतदाता तीन बड़े पुराने सामाजिक आधार माने जाते हैं। इनके साथ कुशवाहा, ब्राह्मण, कुर्मी, साहू, मुस्लिम, वैश्य और दूसरे OBC-सवर्ण समुदाय चुनाव की दिशा तय करते हैं। पुराने चुनावी अनुमानों में लोधी, यादव और दलित मतदाता करीब 70-70 हजार तक बताए गए थे

2026 की अंतिम मतदाता सूची में बबीना विधानसभा में 3,05,051 मतदाता हैं। सीट संख्या 222 है। यह सामान्य विधानसभा क्षेत्र है और झांसी लोकसभा सीट का हिस्सा है। वर्तमान विधायक BJP के राजीव सिंह ‘पारीछा’ हैं, जो 2017 और 2022 में लगातार दो चुनाव जीत चुके हैं। उनकी सामाजिक पहचान ठाकुर-जादौन है।

2022 विधानसभा चुनाव में राजीव सिंह पारीछा को 1,18,343 वोट मिले और उन्होंने SP के यशपाल सिंह यादव को 44,529 वोट से हराया। 2024 लोकसभा चुनाव में भी BJP इस विधानसभा खंड में आगे रही, लेकिन बढ़त घटकर 17,959 वोट रह गई।

उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के चुनावी परिणाम काफी हद तक जटिल जातिगत समीकरणों और ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर निर्भर करते हैं, जिन्हें आगामी 2027 के चुनाव की दिशा तय करने में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।

राज्य के सभी 75 जिलों में चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के तहत मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन किया गया है, जिससे कुल मतदाताओं की संख्या में बदलाव दर्ज हुआ हैं।

झांसी जिले के  बबीना विधानसभा के 2007  से 2022 तक का तुलनात्मक विश्लेषण में बदलाव दर्ज हुआ है।.  उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के 2007 से 2022 तक के चुनावी इतिहास, विजेता-उपविजेता प्रत्याशियों और मत प्रतिशत के तुलनात्मक विश्लेषण के लिए मदद ली जा सकती है।

बबीना विधानसभा एक नजर में

विवरणजानकारी
विधानसभाबबीना
विधानसभा संख्या222
जिलाझांसी
लोकसभा क्षेत्रझांसी
आरक्षणसामान्य
वर्तमान विधायकराजीव सिंह ‘पारीछा’
पार्टीBJP
सामाजिक पहचानठाकुर-जादौन
2026 कुल मतदाता3,05,051
प्री-SIR आधारकरीब 3.44 लाख
प्री-SIR से शुद्ध कमीकरीब 38.7 हजार
कमी प्रतिशत11.26%
2022 कुल निर्वाचक3,31,743
2022 BJP वोट1,18,343
2022 SP वोट73,814
2022 BSP वोट30,540
2022 BJP जीत44,529 वोट
2024 BJP वोट1,10,780
2024 कांग्रेस वोट92,821
2024 BJP बढ़त17,959 वोट
प्रमुख समूहलोधी, यादव, दलित, कुशवाहा, ब्राह्मण, कुर्मी

Babina Assembly Caste Equations: लोधी-यादव-दलित तीन बड़े पुराने वोट ब्लॉक

Babina Assembly Caste Equations की सबसे अहम विशेषता यह है कि कोई एक जाति सीट पर अकेले चुनाव नियंत्रित नहीं करती। लोधी, यादव और दलित मतदाता पुराने सामाजिक आकलनों में सबसे बड़े समूहों में रहे हैं। इनके बाद ब्राह्मण, कुशवाहा और कुर्मी वोट महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

बबीना का पुराना संकेतात्मक जातिगत समीकरण

जाति/समुदायपुराना अनुमान
लोधीकरीब 70,000
यादवकरीब 70,000
अनुसूचित जाति/दलितकरीब 70,000
ब्राह्मणकरीब 30,000
कुशवाहाकरीब 20,000
कुर्मीकरीब 20,000
साहूकरीब 10,000
मुस्लिमकरीब 10,000
वैश्यकरीब 8,000
अन्य समुदायमहत्वपूर्ण संख्या

पुराने अलग-अलग चुनावी अनुमानों में बड़ा अंतर भी मिलता है। उदाहरण के लिए एक पुराने चुनावी आकलन में लोधी मतदाता करीब 40 हजार और यादव करीब 35 हजार बताए गए थे, जबकि कुशवाहा समुदाय को भी लगभग इसी स्तर के आसपास प्रभावी माना गया था। इससे साफ है कि ऊपर दी गई संख्या को सटीक जातिवार वोटर लिस्ट नहीं बल्कि पुराने राजनीतिक संकेत के रूप में पढ़ना चाहिए।

निर्वाचन नामावली जाति के आधार पर प्रकाशित नहीं होती। इसलिए 2026 SIR में किस जाति के कितने मतदाता जुड़े या कम हुए, इसका कोई आधिकारिक विधानसभा-वार डेटा उपलब्ध नहीं है।

2026 वोटर लिस्ट में बबीना के 3,05,051 मतदाता

10 अप्रैल 2026 के अंतिम प्रकाशन के अनुसार झांसी जिले में कुल 14,24,735 मतदाता हैं। इनमें बबीना विधानसभा के 3,05,051 वोटर हैं। झांसी नगर में 4,13,724, मऊरानीपुर में 3,86,455 और गरौठा में 3,19,505 मतदाता दर्ज हैं।

झांसी जिले की विधानसभा-वार वोटर लिस्ट 2026

विधानसभाअंतिम मतदाता
झांसी नगर4,13,724
मऊरानीपुर (SC)3,86,455
गरौठा3,19,505
बबीना3,05,051
जिला कुल14,24,735

प्री-SIR आधार के मुकाबले बबीना में मतदाता संख्या में करीब 11.26 प्रतिशत की शुद्ध कमी दर्ज है। मौजूदा अंतिम संख्या के आधार पर पुराना आधार करीब 3.44 लाख और अंतर करीब 38.7 हजार बैठता है।

2022 विधानसभा चुनाव के समय बबीना में 3,31,743 निर्वाचक थे। यानी 2026 का आधार 2022 से भी करीब 26,692 मतदाता कम है। दोनों सूचियां अलग अर्हता तिथियों और पुनरीक्षण चक्रों की हैं, इसलिए इस अंतर को सीधे इतने नाम “कटना” नहीं कहा जा सकता।

लोधी वोट बड़ा, लेकिन एकतरफा नहीं

बबीना में लोधी मतदाता लंबे समय से प्रभावशाली रहे हैं। पुराने विभिन्न आकलनों में इनकी संख्या करीब 40 हजार से 70 हजार तक बताई गई है।

2012 में BSP के कृष्ण पाल सिंह राजपूत ने सीट जीती थी। 2017 में वह फिर BSP प्रत्याशी बने और 42,614 वोट हासिल किए। उस समय लोधी वोट के BJP और BSP के बीच बंटने की संभावना चुनावी बहस का बड़ा हिस्सा रही।

2017 में BJP उम्मीदवार राजीव सिंह पारीछा ने इसके बावजूद 96,713 वोट हासिल किए और पहली बार सीट जीती। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी ने लोधी मतदाताओं के साथ दूसरे OBC, सवर्ण और दलित वोट में भी बड़ा विस्तार किया।

2027 में लोधी वोट BJP के लिए महत्वपूर्ण रहेगा, लेकिन BSP या किसी मजबूत लोधी प्रत्याशी की मौजूदगी इस आधार में विभाजन पैदा कर सकती है।

यादव वोट SP की मुख्य सामाजिक ताकत

यादव मतदाता बबीना के सबसे प्रभावशाली OBC समूहों में हैं। पुराने अनुमान इन्हें करीब 35 हजार से 70 हजार तक बताते हैं।

2012 में SP के चंद्रपाल सिंह यादव को 61,189 वोट मिले और वह दूसरे स्थान पर रहे।

2017 में SP के यशपाल सिंह यादव को 79,876 वोट मिले।

2022 में यशपाल सिंह यादव को 73,814 वोट मिले।

SP का बबीना विधानसभा वोट

चुनावSP वोट
201261,189
201779,876
202273,814

यादव वोट SP का मजबूत आधार है, लेकिन 2022 में BJP को 1.18 लाख से ज्यादा वोट मिलने से साफ है कि केवल यादव और दूसरे परंपरागत विपक्षी वोट से सीट जीतना आसान नहीं है।

SP के लिए 2027 में कुशवाहा, दलित, लोधी और दूसरे गैर-BJP वोट में हिस्सेदारी बढ़ाना जरूरी होगा।

दलित वोट बड़ा, BSP का वोट घटा

बबीना लंबे समय तक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट रही थी। परिसीमन के बाद यह सामान्य सीट बनी, लेकिन दलित मतदाताओं की बड़ी मौजूदगी अब भी इसके जातिगत समीकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

पुराने सामाजिक आकलन में दलित मतदाता करीब 70 हजार तक बताए गए हैं, जबकि जनसंख्या आधारित अनुमान अनुसूचित जाति की हिस्सेदारी करीब एक चौथाई बताते हैं।

BSP का हालिया वोट हालांकि लगातार घटा है।

बबीना में BSP का बदलता वोट

चुनावBSP वोट
201268,144
201742,614
202230,540
लोकसभा 2024करीब 10.9 हजार

2012 से 2022 के बीच BSP का विधानसभा वोट 37,604 घटा। 2024 लोकसभा में पार्टी का वोट शेयर इस विधानसभा खंड में करीब 5 प्रतिशत रहा।

इस गिरावट का मतलब दलित मतदाता कम होना नहीं है। इसका अर्थ यह है कि दलित वोट BJP, SP और दूसरे विकल्पों में ज्यादा बंट रहा है।

2027 में BSP अगर अपना पुराना वोट वापस खड़ा करती है तो बबीना का मुकाबला फिर त्रिकोणीय हो सकता है।

कुशवाहा वोट BJP-SP दोनों के लिए अहम

कुशवाहा समुदाय बबीना के प्रमुख गैर-यादव OBC समूहों में है। पुराने चुनावी आकलन में इनकी संख्या करीब 20 हजार बताई गई, जबकि दूसरे मॉडल इन्हें इससे बड़ा सामाजिक समूह मानते हैं।

2017 में भी कुशवाहा वोट को चुनावी रूप से निर्णायक माना गया था और सभी प्रमुख दल इस समूह को साधने की कोशिश कर रहे थे।

2027 में BJP के लिए कुशवाहा और कुर्मी जैसे गैर-यादव OBC मतदाता उसकी व्यापक सामाजिक बढ़त बनाए रखने की कुंजी होंगे।

SP के लिए यही वोट यादव आधार से बाहर विस्तार का बड़ा रास्ता है।

ब्राह्मण और दूसरे सवर्ण वोट BJP की मजबूत कड़ी

पुराने अनुमान में ब्राह्मण मतदाता करीब 30 हजार बताए गए हैं। राजीव सिंह पारीछा खुद ठाकुर-जादौन समाज से आते हैं, लेकिन उनकी अपनी उपजाति को पुराने स्थानीय आकलन में संख्या की दृष्टि से बहुत बड़ा नहीं माना गया था।

फिर भी 2022 में उन्हें 1,18,343 वोट मिले।

यानी विधायक का चुनावी आधार अपनी जाति से कई गुना बड़ा है। BJP की सफलता ठाकुर-ब्राह्मण सहित सवर्ण मतों के साथ लोधी, कुशवाहा, कुर्मी, दलित और दूसरे समुदायों के गठबंधन पर आधारित रही।

2027 में विपक्ष के लिए इस बहुजातीय BJP आधार में सेंध लगाना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

2022 में BJP ने 44,529 वोट से जीती सीट

2022 विधानसभा चुनाव में BJP के राजीव सिंह पारीछा को 1,18,343 वोट, यानी 50.44 प्रतिशत मत मिले।

SP के यशपाल सिंह यादव को 73,814, BSP के दशरथ सिंह राजपूत को 30,540 और कांग्रेस के चंद्रशेखर तिवारी को 2,332 वोट मिले।

बबीना विधानसभा चुनाव 2022

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
राजीव सिंह पारीछाBJP1,18,34350.44%
यशपाल सिंह यादवSP73,81431.46%
दशरथ सिंह राजपूतBSP30,54013.02%
रानी देवीजन अधिकार पार्टी2,6551.13%
चंद्रशेखर तिवारीकांग्रेस2,3320.99%
NOTA1,8350.78%
BJP की जीत44,52918.98 प्रतिशत अंक

2017 के मुकाबले BJP का वोट करीब 21,630 बढ़ा, जबकि SP का वोट लगभग छह हजार घटा। यही वजह है कि BJP की जीत का अंतर 16,837 से बढ़कर 44,529 हो गया।

2017 में BJP ने पहली बार इस दौर में सीट जीती

2017 में राजीव सिंह पारीछा को 96,713 वोट मिले।

SP के यशपाल सिंह यादव को 79,876 और BSP के कृष्ण पाल सिंह राजपूत को 42,614 वोट मिले।

बबीना विधानसभा चुनाव 2017

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
राजीव सिंह पारीछाBJP96,71342.02%
यशपाल सिंह यादवSP79,87634.70%
कृष्ण पाल सिंह राजपूतBSP42,61418.52%
BJP की जीत16,837करीब 7.3 प्रतिशत अंक

2017 में BJP 42 प्रतिशत वोट पर जीती थी। 2022 में उसका वोट शेयर बढ़कर 50 प्रतिशत से ज्यादा हो गया।

यह सीट पर BJP के सामाजिक विस्तार का सबसे स्पष्ट आंकड़ा है।

2012 में BSP ने सिर्फ 6,955 वोट से जीती सीट

2012 विधानसभा चुनाव में BSP के कृष्ण पाल सिंह राजपूत को 68,144 वोट मिले।

SP के चंद्रपाल सिंह यादव को 61,189, BJP के श्याम सुंदर सिंह पारीछा को 44,307 और कांग्रेस को 12,837 वोट मिले।

बबीना विधानसभा चुनाव 2012

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
कृष्ण पाल सिंह राजपूतBSP68,14434.18%
चंद्रपाल सिंह यादवSP61,18930.69%
श्याम सुंदर सिंह पारीछाBJP44,30722.23%
राजेंद्र सिंह यादवकांग्रेस12,8376.44%
BSP की जीत6,9553.49 प्रतिशत अंक

2012 में BJP तीसरे स्थान पर थी।

सिर्फ पांच साल बाद पार्टी ने सीट जीत ली और 2022 तक अपना वोट 1.18 लाख से ऊपर पहुंचा दिया।

बबीना का हालिया विधानसभा इतिहास

चुनावविजेतापार्टीवोटजीत का अंतर
2012कृष्ण पाल सिंह राजपूतBSP68,1446,955
2017राजीव सिंह पारीछाBJP96,71316,837
2022राजीव सिंह पारीछाBJP1,18,34344,529

तीन चुनावों में BJP की स्थिति लगातार मजबूत हुई।

लेकिन 2024 लोकसभा के विधानसभा-खंड आंकड़े बताते हैं कि BJP की बढ़त फिर कम हुई है।

2019 लोकसभा में BJP 52,216 वोट आगे थी

2019 लोकसभा चुनाव में बबीना BJP का मजबूत विधानसभा खंड था।

BJP के अनुराग शर्मा को यहां 1,27,097 वोट मिले।

SP के श्याम सुंदर सिंह को 74,881 और कांग्रेस को 12,070 वोट मिले।

लोकसभा 2019: बबीना विधानसभा खंड

पार्टीवोटवोट प्रतिशत
BJP1,27,09758.4%
SP74,88134.4%
कांग्रेस12,0705.5%
BJP की बढ़त52,216करीब 24 प्रतिशत अंक

2019 में BJP की बढ़त 52 हजार से ज्यादा थी।

2024 में BJP आगे रही, लेकिन बढ़त घटकर 17,959

2024 लोकसभा चुनाव में भी बबीना BJP के पक्ष में रहा, लेकिन अंतर काफी कम हो गया।

BJP के अनुराग शर्मा को 1,10,780 वोट, जबकि INDIA गठबंधन के कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप जैन आदित्य को 92,821 वोट मिले।

BJP की बढ़त 17,959 वोट रही।

लोकसभा 2024: बबीना विधानसभा खंड

पार्टीवोटवोट प्रतिशत
BJP1,10,78050.34%
कांग्रेस92,82142.18%
BSPकरीब 10.9 हजारकरीब 5%
BJP की बढ़त17,9598.16 प्रतिशत अंक

2019 के मुकाबले BJP का अपना वोट करीब 16,317 कम हुआ, जबकि मुख्य विपक्षी वोट 74,881 से बढ़कर 92,821 हो गया।

यही वजह है कि बढ़त तेजी से घटी।

2019 से 2024 तक BJP की बढ़त में 34,257 वोट की कमी

चुनावBJP वोटमुख्य विपक्षी वोटBJP बढ़त
लोकसभा 20191,27,09774,88152,216
विधानसभा 20221,18,34373,81444,529
लोकसभा 20241,10,78092,82117,959

2019 की BJP +52,216 बढ़त से 2024 की BJP +17,959 बढ़त तक मुख्य मुकाबले का अंतर 34,257 वोट विपक्ष की ओर बदला।

अगर केवल 2022 विधानसभा से 2024 लोकसभा की तुलना करें तो BJP की बढ़त 26,570 वोट कम हुई।

फिर भी महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 2024 में विपक्षी बढ़त नहीं बनी—बबीना BJP के पास ही रहा।

2026 की नई सूची भी बड़ा फैक्टर

2022 विधानसभा चुनाव में कुल निर्वाचक 3,31,743 थे।

2024 के चुनावी आधार में मतदाता संख्या करीब 3.43 लाख थी।

2026 की अंतिम सूची में यह घटकर 3,05,051 रह गई है।

इस बदलाव के बाद 2027 में 2022 या 2024 के बूथवार वोट को सीधे लागू नहीं किया जा सकता।

हर पार्टी को लोधी, यादव, दलित और OBC प्रभाव वाले बूथों की नई मतदाता संख्या के आधार पर संगठनात्मक रणनीति दोबारा बनानी होगी।

पानी और सिंचाई आज भी सबसे बड़ा स्थानीय सवाल

बबीना बुंदेलखंड की ग्रामीण-अर्धशहरी सीट है। क्षेत्र का बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है और पानी की समस्या लंबे समय से चुनावी मुद्दा रही है।

कई इलाकों में खेती बारिश पर निर्भर रहने, कुओं में पानी की कमी और सिंचाई व्यवस्था कमजोर होने की शिकायतें चुनावों में उठती रही हैं। पेयजल, सड़क और बिजली भी ग्रामीण हिस्सों में प्रमुख सवाल रहे हैं।

बबीना के प्रमुख स्थानीय मुद्दे

मुद्दाचुनावी असर
पेयजलग्रामीण और कस्बाई आबादी
सिंचाईकिसान और कृषि आधारित परिवार
सूखाबुंदेलखंड का पुराना सवाल
ग्रामीण सड़कदूरस्थ गांव और मजरे
रोजगारयुवा मतदाता
बिजलीग्रामीण क्षेत्र
किसान आयकृषि आधारित मतदाता
सैन्य क्षेत्र से जुड़ा विकासबबीना कैंट और आसपास

बबीना की पहचान देश के बड़े सैन्य क्षेत्रों में भी है। विधानसभा में छावनी क्षेत्र के साथ बड़ी ग्रामीण आबादी होने से स्थानीय विकास का एजेंडा दो अलग जरूरतों के बीच बनता है।

BJP के लिए तीसरी लगातार जीत का गणित

BJP ने 2017 और 2022 दोनों विधानसभा चुनाव जीते हैं।

2017 में पार्टी का वोट 96,713 था।

2022 में बढ़कर 1,18,343 हो गया।

2019 और 2024 दोनों लोकसभा चुनावों में भी BJP विधानसभा खंड में आगे रही।

पार्टी की ताकत किसी एक जाति पर आधारित नहीं है। राजीव सिंह पारीछा की ठाकुर पहचान के साथ लोधी, ब्राह्मण, कुशवाहा, कुर्मी, दलित और दूसरे सामाजिक समूहों का बड़ा हिस्सा उसके गठबंधन में शामिल रहा है।

2027 में सबसे बड़ी चुनौती 2024 में घटकर 17,959 रह गई लोकसभा बढ़त को दोबारा विधानसभा स्तर पर बड़ा करना होगी।

SP के लिए यादव आधार से बाहर विस्तार जरूरी

SP का यादव वोट मजबूत है।

2017 में पार्टी को करीब 80 हजार और 2022 में 74 हजार वोट मिले।

लेकिन 2022 में BJP से अंतर 44 हजार से ज्यादा था।

2024 में INDIA गठबंधन ने अंतर काफी कम कर दिया। यह SP के लिए संकेत है कि व्यापक विपक्षी वोट एक साथ आने पर BJP को चुनौती मजबूत हो सकती है।

2027 में SP को यादव मतदाताओं के साथ दलित, कुशवाहा, लोधी, मुस्लिम और दूसरे OBC-सवर्ण समूहों में अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा।

BSP 2027 में कितना वोट वापस लाती है?

BSP ने 2012 में बबीना जीती थी।

2017 में उसे 42,614 और 2022 में 30,540 वोट मिले।

पार्टी का प्रभाव कम हुआ है, लेकिन पुराने लोधी और दलित आधार के कारण इसे पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अगर BSP 2027 में मजबूत लोधी, दलित या स्थानीय प्रभाव वाला चेहरा उतारती है और फिर 40-50 हजार वोट तक पहुंचती है तो BJP-SP का सीधा गणित बदल सकता है।

अगर उसका वोट 2022 या 2024 से और नीचे जाता है तो मुकाबला ज्यादा द्विध्रुवीय हो सकता है।

2027 में बबीना की नौ बड़ी चुनावी चाबियां

चुनावी चाबी2027 में महत्व
लोधी वोटबड़ा गैर-यादव OBC सामाजिक आधार
यादव वोटSP की सबसे मजबूत जातीय धुरी
दलित वोटBSP कमजोर होने के बाद बड़ा स्विंग क्षेत्र
कुशवाहा-कुर्मी वोटBJP-SP दोनों के विस्तार का महत्वपूर्ण क्षेत्र
ब्राह्मण-सवर्ण वोटBJP के व्यापक गठबंधन की अहम कड़ी
राजीव सिंह पारीछा फैक्टरदो बार के विधायक और स्थानीय नेटवर्क
BSP का प्रदर्शनमुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की क्षमता
पानी-सिंचाईग्रामीण बबीना का सबसे पुराना मुद्दा
2026 वोटर लिस्ट3.05 लाख के नए आधार पर बूथ गणित बदलेगा

2027 में बबीना विधानसभा का चुनावी गणित क्या कहता है?

बबीना विधानसभा के जातिगत समीकरण में लोधी, यादव और अनुसूचित जाति मतदाता सबसे बड़े पुराने सामाजिक आधारों में हैं। कुशवाहा और कुर्मी गैर-यादव OBC वोट में महत्वपूर्ण हैं, जबकि ब्राह्मण और दूसरे सवर्ण BJP के व्यापक गठबंधन को मजबूती देते हैं।

हालिया चुनावी तस्वीर को पांच आंकड़ों से समझा जा सकता है—

2022 विधानसभा चुनाव: BJP की जीत 44,529 वोट से।

2024 लोकसभा चुनाव: BJP की बढ़त घटकर 17,959 वोट।

2019 से 2024 के बीच BJP की बढ़त में 34,257 वोट की कमी।

2026 अंतिम वोटर लिस्ट: 3,05,051 मतदाता।

प्री-SIR आधार से शुद्ध कमी: करीब 38.7 हजार यानी 11.26 प्रतिशत।

BJP के पास लगातार दो विधानसभा जीत, मौजूदा विधायक और बहुजातीय सामाजिक गठबंधन का मजबूत आधार है। SP के लिए 2024 में घटा अंतर सकारात्मक संकेत है, लेकिन विधानसभा चुनाव जीतने के लिए उसे यादव वोट से काफी आगे सामाजिक विस्तार करना होगा। BSP का कमजोर होना दलित और लोधी वोट को खुला क्षेत्र बनाता है, लेकिन मजबूत प्रत्याशी मिलने पर पार्टी फिर चुनावी समीकरण बिगाड़ सकती है।

ऐसे में 2027 में बबीना विधानसभा के जातिगत समीकरण का फैसला लोधी और यादव वोट की दिशा, दलित मतों के बंटवारे, कुशवाहा-कुर्मी समर्थन, BJP के सवर्ण आधार, राजीव सिंह पारीछा के व्यक्तिगत नेटवर्क, BSP की ताकत, पानी-सिंचाई और किसान मुद्दों तथा 2026 की नई मतदाता सूची के बीच बनने वाले चुनावी गठबंधन से होगा।

  • समाचार संपादन, ब्रेकिंग अलर्ट और फैक्ट-चेक पर फ़ोकस। ज़मीनी रिपोर्टों को डेटा के साथ जोड़ना पसंद। कॉफ़ी, डेडलाइन और सत्य , तीनों से समझौता नहीं।

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