देवास के जय मीणा ने एशियाई खेलों के सॉफ्ट टेनिस मुकाबले में कांस्य पदक जीता है। पदक जीतने से पहले उनकी मां संजना मीणा ने रात 3 बजे बेटे की सफलता के लिए पूजा की थी। सुबह 4 बजे जय ने फोन कर कहा था, “मां, जीतकर आऊंगा।” पदक की खबर मिलते ही देवास स्थित उन
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मां संजना मीणा ने बताया कि पूरा परिवार जय का मुकाबला देख रहा था। जैसे ही जय ने कांस्य पदक पक्का किया। परिवार की आंखों में खुशी के आंसू आ गए।
उन्होंने बताया कि जय हर बड़े मुकाबले से पहले उन्हें फोन करते हैं। इस बार भी परिवार को उनके फोन का इंतजार था। कांस्य पदक जीतने के बाद जय ने परिवार को फोन किया। जापान से बेटे की आवाज सुनते ही संजना भावुक हो गईं। उन्हें जय के 16 साल के संघर्ष की याद आ गई।

जय मीणा ने एशियाई खेलों के सॉफ्ट टेनिस मुकाबले में कांस्य पदक जीता है।

जय की जीत के बाद मां भावुक हुईं।
PMO ने भी दी बधाई
एशियाई खेलों में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद PMO (प्रधानमंत्री कार्यालय) ने भी जय मीणा को बधाई दी है। PMO ने X पर लिखा- सॉफ्ट टेनिस में भारत के पहले एशियाई खेल पदक विजेता बनने पर जय मीणा को बधाई। उनकी यह उपलब्धि भारत में सॉफ्ट टेनिस के लिए एक नई शुरुआत है।
उम्मीद है कि जय की इस जीत से और भी युवा सॉफ्ट टेनिस खेलने और इसमें अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित होंगे। PMO ने जय को उनके आगे के सफर के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
16 साल से सॉफ्ट टेनिस में कर रहे हैं अभ्यास
जय 16 सालों से सॉफ्ट टेनिस में मेहनत कर रहे हैं। जय इससे पहले भी दो बार इस स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुके हैं। जापान रवाना होने से पहले भी जय ने परिवार से पदक जीतने की उम्मीद जताई थी। इस बार उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किया।
सेमीफाइनल में जापान के खिलाड़ी से हारे
जय ने क्वार्टरफाइनल में फिलीपींस के शेरविन नुगुइट को 4-3 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई थी। सेमीफाइनल में उनका मुकाबला मेजबान जापान के कुरोसाका ताकुया से हुआ। इसमें जय को 2-4 से हार मिली।
कोच सुदेश सांगते जापान में जय मीणा के साथ हैं। उन्होंने कहा कि यह देवास के साथ देश के लिए भी बड़ी उपलब्धि है।
लड़ाई झगड़ा करने पर स्पोर्ट्स में डाला जय मीणा के भाई यश ने बताया कि बचपन में जय घर में काफी लड़ाई-झगड़ा करते थे। माता-पिता ने सोचा कि उन्हें खेल में लगाया जाए, ताकि उनका समय सकारात्मक गतिविधि में बीते। पहले उन्हें बेसबॉल में डाला गया, लेकिन वहां एक खिलाड़ी का हाथ टूटते देख जय ने बेसबॉल छोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने फुटबॉल में भी हाथ आजमाया, लेकिन बात नहीं बनी।
करीब 10 साल की उम्र में जय ने सॉफ्ट टेनिस का रैकेट थामा और इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। लगातार मेहनत और लगन के दम पर जय ने सॉफ्ट टेनिस में अपनी पहचान बनाई और अब एशियाई खेलों में देश के लिए कांस्य पदक जीतकर परिवार के साथ देवास का नाम भी रोशन किया है।
परिजनों का कहना है कि जिस खेल में जय को इसलिए डाला गया था कि वे कुछ घंटे घर से बाहर रहें और लड़ाई-झगड़े से दूर रहें, उसी खेल ने आज उन्हें देश के लिए पदक जीतने के मुकाम तक पहुंचा दिया।