September 6, 2026

बछ बारस 2026 कब है, इस व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए? जानें पूजा विधि, मंत्र, मुहूर्त और महत्व

Bach Baras 2026 Kab hai: भाद्रपद मास में बछ बारस का व्रत करने की परंपरा है। इस व्रत में मुख्य रूप से गाय की पूजा की जाती है। ये व्रत मुख्य रूप से राजस्थान और मध्य प्रदेश में किया जाता है। जानें 2026 में कब है बछ बारस?

Bach Baras 2026 Details: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को बछ बारस का व्रत किया जाता है। इसे गोवत्स द्वादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत में महिलाएं बछड़े वाली गाय की पूजा करती हैं। खास बात ये है कि ये व्रत सिर्फ वही महिलाएं करती हैं जिनका कोई पुत्र होता है। इस व्रत को करने से पुत्र की आयु लंबी होती है ऐसी मान्यता है। जानें साल 2026 में कब है बछ बारस, पूजा विधि, और शुभ मुहूर्त आदि…

2026 में कब करें बछ बारस व्रत?

बछ बारस 2026 पूजा के शुभ मुहूर्त

बछ बारस व्रत-पूजा विधि (Bach Baras Puja Vidhi)

- बछ बारस के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद हाथ में जल, चावल और फूल लेकर विधि-विधान से व्रत और पूजा का संकल्प लें।
- शुभ समय में गाय और उसके बछड़े को स्नान कराएं। इसके बाद गाय का श्रृंगार करें, फूलों की माला पहनाएं और माथे पर तिलक लगाएं।
- पूजा के दौरान कामधेनु माता का स्मरण करें। एक पात्र में चावल, तिल, जल और सुगंधित पदार्थ मिलाकर गाय के चरण धोएं और इस मंत्र का जाप करें—
“क्षीरोदार्णवसम्भूते सुरासुरनमस्कृते।
सर्वदेवमये मातर्गृहाणार्घ्य नमो नम:॥”
- गाय के चरणों की मिट्टी को माथे पर तिलक के रूप में लगाएं। इसके बाद गाय की आरती करें और बछ बारस की व्रत कथा सुनें। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना पूरी होती है।

बछ बारस पर क्या न खाएं?

बछ बारस के दिन व्रती (व्रत करने वाली महिलाएं) गाय के दूध और दूध से बनी चीजों जैसे दही, मक्खन आदि का सेवन न करें। इस दिन मूंग की दाल खाने की भी मनाही है। इस दिन सब्जी काटने से भी परहेज किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार बछ बारस पर चाकू, कैंची जैसी धारदार और नुकीली चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

गौ माता की आरती

आरती हरनि विश्वधैया की ।।
अर्थकाम सद्धर्म प्रदायिनी,
अविचल अमल मुक्तिपद्दायिनी ।।
सुर मानव सौभाग्याविधायिनी,
प्यारी पूज्य नन्द छैया की ।।
अखिल विश्व प्रतिपालिनी माता,
मधुर अमिय दुग्धान्न प्रब्दाता ।।
रोग शोक संकट परित्राता,
भवसागर हित दृढ़ नैया की ।।
आयु ओज आरोग्यविकाशिनी,
दुःख दैन्य दारिद्रय विनाशिनी ।।
सुष्मा सौख्य समृद्धि प्रकाशिनी,
विमल विवेक बुद्धि दैया की ।।
सेवक हो चाहे दुखदाई,
सा पय सुधा पियावति माई ।।
शत्रु-मित्र सबको सुखदायी,
स्नेह स्वभाव विश्व जैया की ।।
आरती श्री गैया मैया की
आरती हरनि विश्वधैया की ।।
अर्थकाम सद्धर्म प्रदायिनी,
अविचल अमल मुक्तिपद्दायिनी ।।
सुर मानव सौभाग्याविधायिनी,
प्यारी पूज्य नन्द छैया की ।।
अखिल विश्व प्रतिपालिनी माता,
मधुर अमिय दुग्धान्न प्रब्दाता ।।
रोग शोक संकट परित्राता,
भवसागर हित दृढ़ नैया की ।।
आयु ओज आरोग्यविकाशिनी,
दुःख दैन्य दारिद्रय विनाशिनी ।।
सुष्मा सौख्य समृद्धि प्रकाशिनी,
विमल विवेक बुद्धि दैया की ।।
सेवक हो चाहे दुखदाई,
सा पय सुधा पियावति माई ।।
शत्रु-मित्र सबको सुखदायी,
स्नेह स्वभाव विश्व जैया की।।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।