September 1, 2026

वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम तिमाही में आर्थिक विकास दर ने चौंकाया - प्रवक्‍ता.कॉम - Pravakta.Com

दिनांक 31 अगस्त 2026 को सायंकाल में केंद्र सरकार ने भारत के वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर के आंकड़े जारी किए हैं। विश्व बैंक एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष सहित अन्य वैश्विक संस्थानों, एसोचेम, भारतीय रिजर्व बैंक आदि के अनुमानों को धत्ता बताते हुए अप्रेल-जून 2026 की तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। जबकि, उक्त संस्थानों ने उक्त अवधि में 6.5 प्रतिशत से 7 प्रतिशत के बीच की वृद्धि दर का अनुमान लगाया था। उक्त वृद्धि दर वैश्विक स्तर पर विभिन्न प्रकार की आर्थिक समस्याओं के बीच हासिल हुई है, इसलिए भारत के लिए यह एक मील का पत्थर साबित होगी। रूस-यूक्रेन युद्ध तो बहुत लम्बे समय से चल रहा है, ईरान-अमेरिका/इजराईल युद्ध भी इस तिमाही में जारी रहा, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि देखने को मिली थी। एक समय तो कच्चे तेल की कीमतें 120 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गई थीं। ज्ञातव्य हो कि भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ओफ होर्मुज को बंद करने के पश्चात इस मार्ग से गुजरने वाले तेल के जहाजों को रोक दिया गया था एवं कच्चे तेल की आपूर्ति पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ा था। परंतु, भारत ने इस दयनीय स्थिति को बहुत ही सूझ बूझ के साथ सम्भाला और अन्य कई देशों से तेल एवं गैस का आयात जारी रखा, जिससे भारत में न तो तेल की आपूर्ति कम हुई और न ही भारत में पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई। जबकि अन्य कई  देशों में तो पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज हुई है।

भारत के युवाओं (जेन-जी) को इस बात को समझना होगा कि भारत आज आर्थिक विकास के जिस दौर से गुजर रहा है, वह बहुत ही संवेदनशील है। यदि देश में किसी भी प्रकार की अराजकता फैलायी जाती है तो आर्थिक विकास की पटरी से भारत डीरेल हो सकता है। आगे आने वाले 10 वर्षों तक भारत यदि विकास दर की इसी ट्रेजेक्टरी में अपने आप को बनाए रखने में सफल होता है तो भारत के वर्ष 1947 में विकसित राष्ट्र बनने के सपने को साकार होने से कोई रोक नहीं सकता है। अर्थ के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में अप्रेल-जून 2026 तिमाही में सराहनीय वृद्धि दर हासिल की गई है। सकल मूल्य संवर्धन में वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत की रही है जो अप्रेल-जून 2025 की तिमाही में 7 प्रतिशत की रही थी। विनिर्माण के क्षेत्र में वृद्धि दर पिछले वर्ष की तिमाही में 8.3 प्रतिशत की रही थी जो इस वर्ष की तिमाही में बढ़कर 9.2 प्रतिशत की हो गई है। इसी प्रकार सेवा के क्षेत्र में भी आर्थिक विकास दर इस वर्ष की प्रथम तिमाही में बढ़कर 10 प्रतिशत पर पहुंच गई जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 8 प्रतिशत रही थी। भारत की अर्थव्यवस्था उपभोग आधारित है, अतः निजी उपभोग में इस वर्ष की तिमाही में 7.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 6.8 प्रतिशत रही थी। सकल स्थिर पूंजी निर्माण में भी अतुलनीय 11.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में केवल 5.8 प्रतिशत की रही थी। इसी प्रकार, रोजगार निर्मित करने वाले क्षेत्रों में भी विकास दर प्रभावशाली रही है। वित्तीय क्षेत्र में वृद्धि दर 12.1 प्रतिशत की दर्ज हुई है तो व्यापार, होटल, यातायात एवं संचार के क्षेत्र में 8.5 प्रतिशत की विकास दर हासिल की गई है। साथ ही गैस एवं विजली उत्पादन में भी वृद्धि दर 8.9 प्रतिशत की रही है।        

वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम तिमाही में सराहनीय विकास दर हासिल करने को केंद्र सरकार की योजनाओं की सफलता के रूप में भी देखा जा सकता है। केंद्र सरकार ने मेक इन इंडिया नामक योजना को तेजी से आगे बढ़ाया है और इसने भारत को कई क्षेत्रों में आत्म निर्भर बनाने का कार्य सफलतापूर्वक किया है। विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, डिजिटल भुगतान, फिन टेक, इंजिनीयरिंग डिजाइन, व्यापार परामर्श, वैश्विक ग्लोबल योग्यता सेंटर, आदि क्षेत्रों में भारत आज पूरे विश्व में लीड कर रहा है। मेक इन इंडिया योजना ने भारतीय नागरिकों में जोश भरा और भारत की प्रतिभा का डंका पूरे विश्व में बज गया है। दूसरे, भारत में उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना को भी लागू किया गया। इस योजना ने भारत को उपभोक्ता बाजार से निकालकर मजबूत वैश्विक विनिर्माण हब में बदल दिया है। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 14 प्रमुख क्षेत्रों में करीब 2.3 लाख करोड़ रुपए का निवेश हुआ है, 16.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक का कुल उत्पादन हुआ है एवं 12 लाख से अधिक रोजगार के नए अवसर निर्मित हुए। इसके उपरांत प्रारम्भ हुई प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के अंतर्गत सड़क, रेल, बंदरगाह, एयरपोर्ट और लाजिस्टिक को पहली बार इंटीग्रेटेड तरीके से जोड़ने की कोशिश की गई। समर्पित मालवाहक गलियारों का निर्माण तो इस दृष्टि से मील का पत्थर साबित हुए हैं। नए एक्स्प्रेस वे ने माल ढुलाई का समय घटाया। लागत को कम किया और भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया। 86,300 करोड़ अमेरिकी डॉलर का निर्यात इस सफलता की कहानी को दर्शाता है।

निर्यात में अतुलनीय वृद्धि दर उस समय पर हासिल की गई है जब अमेरिका की टैरिफ नीति ने पूरे विश्व को परेशान किया हुआ है। साथ ही, रूस यूक्रेन युद्ध, ईरान इजराईल-अमेरिका युद्ध, इजराईल हमास युद्ध एवं वैश्विक स्तर पर अस्थिरता का बने रहना भी शामिल है। इन परिस्थितियों के बीच भारत ने उत्पादों एवं सेवा के क्षेत्र में निर्यात का रिकार्ड बनाया है। जबकि कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं में सुस्ती बनी हुई है। भारत के कुल निर्यात में सेवा क्षेत्र की कुल हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है। यदि भारत को चीन जैसी विनिर्माण क्षेत्र की ताकत बनाना है तो भारत को हाई वैल्यू मैन्युफेक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, मशीनरी, और सूक्षम, लघु एवं मध्यम उद्योग के क्षेत्र को और अधिक मजबूत करना होगा। घरेलू उत्पाद बढ़ाकर न केवल उत्पादों के आयात को कम किये जाने का प्रयास किया जा रहा है बल्कि वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेसरी भी बढ़ाई जा रही है। भारत में हाल ही में आई मोबाइल एवं इलेक्ट्रॉनिक क्रांति का भी इसमें बहुत बड़ा योगदान है। वर्ष 2014 में भारत में केवल 2 मोबाइल उत्पादन इकाईयां कार्यरत थीं। आज भारत मोबाइल निर्माण के क्षेत्र में दुनिया का दूसरा  सबसे बड़ा निर्माता देश बन गया है। ऐपल की फ्लेगशिप कम्पनी अब मैन्युफेक्चरिंग इन इंडिया की ओर आगे बढ़ रही हैं। इलेक्ट्रॉनिक उत्पादन 2014-15 के 1.9 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 2025-26 में 13.11 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। रक्षा के क्षेत्र में भी उत्पादन एवं निर्यात तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। रक्षा के क्षेत्र में भारत अपनी छोटी मोटी जरूरतों के लिए अन्य देशों की ओर देखता था आज वह फिलिपींस को ब्रह्मोस मिसाईल का निर्यात कर रहा है। कई अफ्रीकी देशों को मेड इन इंडिया हेलिकोप्टर निर्यात कर रहा है। अब देश की कुल जरूरत का लगभा 65 प्रतिशत रक्षा उत्पाद देश में ही निर्मित हो रहा हैं। जो रक्षा उत्पादन वर्ष 2014-15 में 46,429 करोड़ रुपए का था वह 2025-26 में बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपए के रिकार्ड स्तर पर पहुंच चुका है। रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपए के उच्चत्तम स्तर पर पहुंच चुका है। आज रक्षा के क्षेत्र में विभिन्न उत्पादों का निर्यात 100 से अधिक देशों को किया जा रहा है। ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में उत्पादन में अतुलनीय वृद्धि दर्ज हुई है एवं फार्मा क्षेत्र में तो भारत को फार्मेसी आफ द वर्ल्ड कहा जा रहा है। भारत की एक्स्पोर्ट बास्केट भी बढ़ रही है – पेट्रोलीयम उत्पाद, इंजिनीयरिंग उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, ऑटोमोबाइल, टेक्स्टायल जैसे कई क्षेत्रों में विकास दर तेजी से बढ़ रही है। भारत किसी एक सेक्टर पर निर्भर नहीं है। कई क्षेत्रों में एक साथ आगे बढ़ रहा है। दुनिया की सप्लाई चैन में भारत की नई भूमिका तय हो रही है। भारत एक लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर का निर्यात करने की ओर आगे बढ़ रहा है।  

प्रहलाद सबनानी