September 30, 2026

2018 हत्याकांड में गंदरबल कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराया, धारा 364 में बरी

2018 हत्याकांड में गंदरबल कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराया, धारा 364 में बरी

गंदरबल, 30 सितंबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के गंदरबल में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश फोजिया पॉल ने बुधवार को 2018 के एक हत्या मामले में आरोपी मोहम्मद शफी मगरे को दोषी ठहराया। कोर्ट ने उसे रणबीर दंड संहिता (आरपीसी) की धारा 302, 379 और 201 के तहत अपराधों का दोषी पाया। हालांकि, कोर्ट ने धारा 364 आरपीसी के तहत अपहरण के आरोप से उसे बरी कर दिया।

यह फैसला स्टेट (यूटी ऑफ जम्मू-कश्मीर) बनाम मोहम्मद शफी मगरे मामले में सुनाया गया। मामला पुलिस स्टेशन खीरभवानी में दर्ज एफआईआर संख्या 33/2018 से संबंधित है।

मोहम्मद शफी मगरे, पुत्र मोहम्मद सिद्दीक मगरे, गंदरबल के चुंडिना का निवासी है। मामले में मृतक मोहम्मद यूसुफ खांडेय 31 मई 2018 को पैसे निकालने के लिए चुंडिना स्थित जेएंडके बैंक गया था, जिसके बाद वह लापता हो गया था। दो जून 2018 को उसका शव शालाबुग/बटागुंड से सटे खेतों से बरामद किया गया था।

मामले की जांच तत्कालीन थाना प्रभारी अरशिद सेल्फी ने की थी। अभियोजन का मामला मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था, क्योंकि हमले का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था।

कोर्ट ने मेडिकल साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा कि मृतक के सिर के पिछले हिस्से में फ्रैक्चर हुआ था और बड़ी मात्रा में एक्स्ट्राड्यूरल हेमेटोमा पाया गया था। मेडिकल साक्ष्यों के अनुसार, सिर पर भारी कुंद वस्तु से लगी चोट के कारण उसकी मौत हुई। परिस्थितियों और मेडिकल साक्ष्यों का आकलन करने के बाद कोर्ट ने मौत को हत्या माना।

फैसले में आरोपी और मृतक के बीच 50 हजार रुपये की आर्थिक देनदारी को भी महत्वपूर्ण परिस्थितिजन्य साक्ष्य माना गया। एक स्वतंत्र दस्तावेज लेखक ने उस हलफनामे की पुष्टि की, जिसमें आरोपी की ओर से 50 हजार रुपये की देनदारी स्वीकार की गई थी। हैंडराइटिंग विशेषज्ञ ने दस्तावेज पर मौजूद हस्ताक्षरों को आरोपी के हस्ताक्षरों से जोड़ा। कोर्ट ने इस आर्थिक देनदारी को हत्या के पीछे साबित मकसद माना, हालांकि इसे अपने आप में अपराध का निर्णायक प्रमाण नहीं माना गया।

कोर्ट ने मृतक के एटीएम कार्ड के इस्तेमाल को अभियोजन पक्ष के मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक माना। बैंक रिकॉर्ड से पता चला कि मृतक के लापता होने के अगले दिन एक जून 2018 को नदिहाल स्थित शाहीन सर्विस स्टेशन पर उसके एटीएम कार्ड से 4,000 रुपये का लेनदेन हुआ था।

फैयाज अहमद डार, जो आरोपी को घटना से पहले से जानता था और उसके साथ यात्रा कर रहा था, ने गवाही दी कि आरोपी ने एक कार्ड पेश किया था और पेट्रोल पंप पर 4,000 रुपये प्राप्त किए थे। दो जून 2018 को नगबल में भी 500 रुपये के एक अन्य लेनदेन का रिकॉर्ड सामने आया।

बाद में मृतक का एटीएम कार्ड और 11,700 रुपये नकद आरोपी के घर के एक कमरे में चटाई के नीचे से बरामद किए गए। यह बरामदगी आरोपी की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर की गई थी। कोर्ट ने आरोपी के हस्ताक्षर वाले कर्ज संबंधी दस्तावेज के फटे हुए टुकड़ों की बरामदगी को भी परिस्थितिजन्य साक्ष्य की एक कड़ी माना।

हालांकि, कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान विवादित सीसीटीवी फुटेज और फिंगरप्रिंट से संबंधित सामग्री को आपत्तिजनक साक्ष्यों की मुख्य श्रृंखला में शामिल नहीं किया। कोर्ट ने पारंपरिक 'लास्ट सीन' सिद्धांत को भी लागू नहीं किया। जांच में सामने आई कुछ कमियों को ध्यान में रखते हुए कथित हथियार की बरामदगी को भी सीमित महत्व दिया गया।

इसके बावजूद कोर्ट ने माना कि स्वीकार्य और स्वतंत्र रूप से साबित किए गए साक्ष्यों की शेष श्रृंखला पूरी थी और आरोपी की संलिप्तता के अलावा कोई उचित संभावना नहीं बचती थी।

परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से जुड़े स्थापित कानूनी सिद्धांतों और हनुमंत गोविंद नरगुंडकर बनाम मध्य प्रदेश सरकार तथा शरद बिरधीचंद सारडा बनाम महाराष्ट्र सरकार के मामलों में निर्धारित कसौटियों को लागू करते हुए कोर्ट ने कहा कि अभियोजन ने आरोपी के खिलाफ सभी परिस्थितियों को संदेह से परे साबित किया है।

कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि मृतक का एटीएम कार्ड उसके लापता होने के करीब एक दिन के भीतर आरोपी के इस्तेमाल में आया, आरोपी के साथ यात्रा कर रहे एक ऐसे गवाह ने उसके इस्तेमाल की पुष्टि की जो उसे पहले से जानता था और बाद में वही कार्ड आरोपी के घर से छिपी हुई अवस्था में बरामद हुआ। इसके साथ आर्थिक देनदारी, हत्या की पुष्टि करने वाले मेडिकल साक्ष्य और फटे हुए कर्ज दस्तावेज की बरामदगी ने परिस्थितियों की श्रृंखला को मजबूत किया।

कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष ने संदेह से परे साबित किया कि मोहम्मद शफी मगरे ने मोहम्मद यूसुफ खांडेय के सिर पर जानलेवा कुंद चोट पहुंचाकर उसकी हत्या की तथा उसके नकद रुपये और एटीएम कार्ड को बेईमानी से अपने कब्जे में लिया। इसके आधार पर उसे धारा 302 आरपीसी के तहत हत्या, धारा 379 के तहत चोरी और धारा 201 के तहत साक्ष्य मिटाने या छिपाने से संबंधित अपराध का दोषी ठहराया गया।

वहीं, धारा 364 आरपीसी के तहत अपहरण के आरोप को कोर्ट ने साबित नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि किसी गवाह ने कथित वादे को सुनने या आरोपी द्वारा मृतक को बलपूर्वक या धोखे से अपने साथ ले जाने की बात नहीं देखी थी। मृतक को बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप पुलिस के इकबालिया बयान के उस हिस्से पर आधारित था, जिसे साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसलिए इस आरोप को संदेह से परे साबित नहीं माना गया और आरोपी को धारा 364 के तहत बरी कर दिया गया।

मोहम्मद शफी मगरे को धारा 302, 379 और 201 आरपीसी के तहत दोषी ठहराए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में रहने का निर्देश दिया गया है। सजा की मात्रा तय करने के लिए अलग से सुनवाई होगी, जिसमें अभियोजन और दोषी पक्ष को सजा के निर्धारण से जुड़े गंभीर और कम करने वाले परिस्थितिजन्य पहलुओं पर अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा।

--आईएएनएस

डीएससी