September 6, 2026

पटना में गंगा ने तोड़ा 2016 का रिकॉर्ड! खतरे के निशान से ऊपर पानी, बिहार के 11 जिलों में बाढ़ का खतरा – Sanjeevni Today

बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 2016 के पुराने उच्चतम बाढ़ स्तर का रिकॉर्ड पार कर गया है। 6 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर तक पहुंच गया, जबकि 2016 में यहां अधिकतम स्तर 50.52 मीटर दर्ज किया गया था। यानी नदी का पानी पुराने रिकॉर्ड से करीब 5 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच चुका है।

11 जिलों में बाढ़ का असर

गंगा के बढ़ते जलस्तर के साथ बिहार के कई हिस्सों में बाढ़ का दायरा भी बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, अरवल और पटना में बाढ़ का असर दर्ज किया गया है।

इन जिलों के करीब 61 प्रखंडों की 300 से अधिक ग्राम पंचायतें प्रभावित बताई गई हैं। कई जगह खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान हुआ है, जबकि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के सामने सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने की चुनौती बढ़ गई है।

अलग-अलग सरकारी आंकड़ों और रिपोर्टिंग समय के अनुसार प्रभावित आबादी का आंकड़ा अलग है। 6 सितंबर की एक रिपोर्ट में करीब 16.85 लाख लोगों के प्रभावित होने की बात कही गई है, जबकि इससे एक दिन पहले के आधिकारिक आंकड़ों में करीब 10.26 लाख लोगों के प्रभावित होने का उल्लेख था।

गंगा समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर

बिहार में सिर्फ गंगा ही नहीं, बल्कि गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन, बागमती और घाघरा जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर भी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर है। इससे नदी किनारे और निचले इलाकों में पानी फैलने का खतरा बढ़ गया है।

पटना के श्रीपालपुर में पुनपुन नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 2.84 मीटर ऊपर बताया गया है। वहीं पंडारक में भी गंगा ने अपने पुराने उच्चतम स्तर को पार किया है। इससे दियारा क्षेत्रों और नदी के आसपास रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।

पटना में बढ़ी चिंता

गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर बढ़ने से पटना के निचले इलाकों पर खास नजर रखी जा रही है। 5 सितंबर को कुछ ही घंटों के भीतर जलस्तर में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। केंद्रीय जल आयोग के पूर्वानुमान में भी जलस्तर और बढ़ने की आशंका जताई गई थी।

पटना के अलावा आरा और हाजीपुर जैसे शहरी इलाकों में भी बाढ़ का पानी पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है। हाजीपुर के कई वार्डों और आरा के कुछ वार्डों में जलभराव से लोगों की परेशानी बढ़ी है।

राहत-बचाव के लिए टीमें और नावें तैनात

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। NDRF और SDRF की दर्जनों टीमें संवेदनशील इलाकों में तैनात हैं। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

राहत शिविरों और कम्युनिटी किचन के जरिए प्रभावित परिवारों तक भोजन और जरूरी सामान पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन की प्राथमिकता निचले इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना और तटबंधों की लगातार निगरानी करना है।

सरकार की नजर, तटबंधों की निगरानी बढ़ी

बिहार सरकार ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में अधिकारियों की तैनाती बढ़ाई है। मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। तटबंधों पर लगातार निगरानी रखने और किसी भी तरह की समस्या सामने आने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर के साथ-साथ दूसरी नदियों के दबाव को संभालना है। अगर आने वाले समय में बारिश और नदी का जलस्तर बढ़ता है, तो नए इलाकों में भी पानी फैलने की आशंका बनी रह सकती है।

अगले कुछ दिन बेहद अहम

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार बिहार के कई हिस्सों में बारिश की संभावना बनी हुई है। ऐसे में नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

फिलहाल पटना में गंगा का 2016 का रिकॉर्ड टूटना बिहार में बाढ़ की गंभीर स्थिति का संकेत है। नदी के बढ़ते जलस्तर, कई नदियों के खतरे के निशान से ऊपर बहने और बड़ी आबादी के प्रभावित होने के बीच आने वाले 24 से 48 घंटे प्रशासन और प्रभावित लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

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