September 16, 2026

₹2000 से ऊपर के UPI ट्रांजेक्शन पर MDR चार्ज क्यों? विदेशी प्रभाव के सवाल पर वित्त मंत्रालय ने दिया कड़ा जवाब - India TV Hindi

15 अक्टूबर 2026 से ₹2000 से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट्स पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के फैसले को लेकर देश में नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार ने अमेरिकी या विदेशी कंपनियों के दबाव में आकर यह चार्ज लगाने का फैसला किया है।तमाम आरोपों और विवादों के बीच वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट जारी कर विपक्षी दावों को सिरे से खारिज कर दिया। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस फैसले के पीछे कोई विदेशी दबाव नहीं है, बल्कि यह कदम देश के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाने के लिए उठाया गया है।

वित्त मंत्रालय ने कहा कि 2016 में लॉन्च होने के बाद से UPI दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बन चुका है और यह पूरी तरह से भारत की अपनी शर्तों पर विकसित हुआ है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अगस्त 2026 में अकेले UPI के जरिए 2450 करोड़ (24.5 बिलियन) ट्रांजैक्शंस दर्ज किए गए। इतने विशाल नेटवर्क को सुरक्षित, साइबर फ्रॉड से मुक्त और तकनीकी रूप से अपडेट रखने के लिए फंड की आवश्यकता होती है। यह निर्णय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और छोटे शहरों (Tier III-VI) में मर्चेंट्स को जोड़ने के उद्देश्य से लिया गया है।

MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं

सरकार ने साफ किया कि MDR कोई टैक्स नहीं है जो सरकार या NPCI के खाते में जाएगा। यह शुल्क पेमेंट सर्विस देने वाले बैंकों और यूपीआई ऐप्स (जैसे गूगल पे, फोनपे) के बीच शेयर होगा, जिससे वे साइबर सुरक्षा, फ्रॉड प्रिवेंशन और बेहतर कस्टमर सर्विस में निवेश कर सकें। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इस नीतिगत फैसले को वापस लेने या इस पर पुनर्विचार करने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

ग्राहक को देना होगा या नहीं?

15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से ज्यादा के सामान्य मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% MDR लागू होगा। लेकिन यह शुल्क ग्राहक से लेने के लिए नहीं है। इसे मर्चेंट की ओर से भुगतान किया जाएगा और ₹75,000 या उससे ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर इसकी अधिकतम सीमा ₹300 होगी। रेलवे, टेलीकॉम, फ्यूल और इंश्योरेंस जैसे जरूरी सेक्टरों में ₹2,000 से ऊपर के पेमेंट पर फ्लैट ₹5 MDR लगेगा। वहीं म्यूचुअल फंड और स्टॉकब्रोकिंग जैसे कैपिटल मार्केट पेमेंट पर 0.02% MDR होगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 है।

छोटे कारोबारियों को राहत

छोटे मर्चेंट, जो UPI QR के जरिए महीने में ₹1 लाख तक कलेक्शन करते हैं, नए MDR स्ट्रक्चर से बाहर रहेंगे। ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में छोटे कारोबारियों के लिए भी UPI QR पेमेंट मुफ्त रखने की व्यवस्था है।

इनपुट- PTI

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