September 21, 2026

सांवलियाजी धाम 200 झूमर, 800 एलईडी पाम लाइट से जगमगाया: श्रीकृष्ण लीला के साथ हवा में बनेगा लेजर से मोर पंख, जलझूलनी एकादशी मेला शुरू - Chittorgarh News

मेवाड़ के प्रसिद्ध कृष्णधाम श्री सांवलियाजी में सोमवार से शुरू हो रहे तीन दिवसीय जलझूलनी एकादशी मेले की शुरुआत हो चुकी हैं। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां भगवान सांवलिया सेठ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन इस बार मंदिर मंडल ने मेले को पहले से अलग रूप

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मंदिर परिसर से लेकर पूरे कस्बे तक आधुनिक लाइटिंग, लेजर शो, एलईडी वॉल और भव्य पुष्प सज्जा की गई है। दिन में धार्मिक आयोजन होंगे, जबकि रात में पूरा सांवलियाजी धाम रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगाता नजर आएगा।

मंदिर मंडल का मानना है कि इस बार श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ ऐसा माहौल मिलेगा, जो मेले की याद को लंबे समय तक ताजा रखेगा।

मुख्य मंदिर से लेकर पूरे कस्बे तक रोशनी की सजावट

इस बार सजावट केवल मंदिर परिसर तक सीमित नहीं रखी गई है। मुख्य मंदिर, कॉरिडोर, गार्डन, प्रमुख सड़कें, चौराहे और गांव के प्रवेश मार्ग तक आधुनिक लाइटिंग लगाई गई है। मंदिर मंडल ने अलग-अलग तरह की सजावटी लाइटों का उपयोग किया है, जिससे रात में पूरा क्षेत्र अलग-अलग रंगों में नजर आएगा।

करीब 200 झूमर, 800 एलईडी पाम लाइट, पिक्सल पट्टे, एमआई बार लाइट, कॉइन सीरीज, फ्लड लाइट, शार्पी लाइट, तितली पंख वाली लाइट, रोप लाइट, हेक्सा पैनल बोर्ड, लालटेन बल्ब और कई अन्य आधुनिक लाइटें लगाई गई हैं।

मंदिर की स्थायी फसाड लाइटिंग को भी विशेष कंट्रोलर से अलग-अलग कॉम्बिनेशन में चलाया जाएगा, जिससे हर कुछ देर में मंदिर का स्वरूप बदलता नजर आएगा।

एलईडी वॉल पर दिखेंगी श्रीकृष्ण की लीलाएं, पहली बार लेजर से बनेगा मोर पंख

मेले में इस बार कई जगह बड़ी एलईडी वॉल लगाई गई हैं। इन पर श्री सांवलियाजी मंदिर के पुराने वीडियो, मंदिर की झलकियां और भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं से जुड़े दृश्य दिखाए जाएंगे। इससे दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव भी मिलेगा।

सबसे बड़ा आकर्षण पहली बार होने वाला लेजर शो रहेगा। करीब 10 लेजर लाइटों की मदद से हवा में मोर पंख का स्वरूप बनाया जाएगा। मंदिर मंडल का कहना है कि यह प्रयोग पहली बार किया जा रहा है और रात के समय इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटने की उम्मीद है।

इसके अलावा प्रोजेक्शन मैपिंग के जरिए भी धार्मिक कथाओं का प्रदर्शन किया जाएगा।

मीरा चौराहा और प्रवेश द्वार भी बने आकर्षण का केंद्र

मंदिर के दोनों गार्डन और मीरा चौराहा पर विशेष ट्रस लगाए गए हैं। इन पर एलईडी वॉल, झूमर और एमआई बार लाइट लगाई गई हैं। इनकी मदद से अलग-अलग ग्राफिक्स और वीडियो दिखाए जाएंगे। कस्बे के मुख्य प्रवेश मार्गों पर भी आकर्षक स्वागत द्वार बनाए गए हैं।

रात में इन द्वारों और चौराहों की रोशनी पूरे मेले के माहौल को और खास बनाएगी। मंदिर क्षेत्र की दीवारों और कॉरिडोर में रोप लाइट लगाई गई है, जिससे पूरा परिसर एक समान रोशनी में चमकता दिखाई देगा। श्रद्धालुओं के लिए यह सजावट फोटो और वीडियो का भी खास आकर्षण बनेगी।

10 दिन तक 60 श्रमिकों ने किया काम

पूरे मंदिर और कस्बे की लाइटिंग का काम उदयपुर की एक टीम ने किया है। करीब 50 से 60 श्रमिकों ने लगातार 10 दिनों तक मेहनत कर यह पूरी व्यवस्था तैयार की। मंदिर परिसर, सड़कें, चौराहे और प्रवेश द्वारों पर हर लाइट को तय योजना के अनुसार लगाया गया है।

मंदिर मंडल का कहना है कि इस बार उद्देश्य सिर्फ सजावट करना नहीं था, बल्कि श्रद्धालुओं को नया अनुभव देना भी था। इसी वजह से पहली बार आधुनिक तकनीक का बड़े स्तर पर उपयोग किया गया है।

15 टन फूलों से महका मंदिर, कोलकाता के कारीगरों ने बनाई झांकियां

लाइटिंग के साथ इस बार मंदिर में भव्य पुष्प सज्जा भी की गई है। मुख्य मंदिर, बाहरी चौक और प्रवेश कॉरिडोर को फूलों से सजाया गया है। मंदिर की छतों पर बंदनवार लगाए गए हैं और अंदर फूलों के झूमर तथा पुष्पगुच्छ से सजावट की गई है।

इस काम के लिए कोलकाता से आए 45 कारीगरों ने लगातार कई दिनों तक काम किया। सजावट में करीब 15 टन फूल और हरे पत्तों का उपयोग हुआ है। गेंदा, गुलाब, चमेली, मोगरा, एंथोरियम, कारनेशन, हाइड्रेंजिया सहित कई फूलों से भगवान श्रीकृष्ण की मुरली बजाते हुए झांकी, तिरुपति बालाजी, शंख, चक्र, गदा, पद्म और तिलक की आकृतियां बनाई गई हैं।

मंदिर में प्रवेश करते ही फूलों की खुशबू और सजावट श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींच रही है।

आस्था के साथ आधुनिक व्यवस्था की नई पहचान

जलझूलनी एकादशी का मेला हर साल धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र रहता है, लेकिन इस बार इसकी पहचान आधुनिक रोशनी और तकनीक से भी जुड़ रही है। मंदिर मंडल ने पारंपरिक धार्मिक माहौल को बनाए रखते हुए नई तकनीक का इस्तेमाल किया है, ताकि दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को कुछ नया देखने को मिले।

दिन में पूजा, दर्शन और धार्मिक कार्यक्रम होंगे, जबकि रात में रोशनी, लेजर शो, एलईडी वॉल और पुष्प सज्जा मेले को अलग पहचान देंगे। मंदिर मंडल को उम्मीद है कि इस बार सांवलियाजी आने वाले श्रद्धालु दर्शन के साथ मेले की इस नई सजावट और माहौल को भी लंबे समय तक याद रखेंगे।