अखिलेश जिस मुस्लिम नेता का टिकट काटेंगे, ओवैसी उसे लड़वाएंगे: गठबंधन नहीं हुआ तो अकेले चुनाव लड़ेंगे; 200 सीटों पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी - Uttar Pradesh News
Hindi News
Local
Uttar pradesh
AIMIM UP Election 2027 Candidates Strategy; Asaduddin Owaisi Vs BJP Muslim Votes | SP Congress
लखनऊ28 मिनट पहलेलेखक: सैयद यासिर रजा
कॉपी लिंक
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सपा-कांग्रेस को गठबंधन के लिए 2 अक्टूबर तक का समय दिया था। डेडलाइन खत्म हो चुकी है। अब पार्टी अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। ओवैसी कम से कम 200 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी में हैं। इनमें 100 मुस्लिम बहुल सीटें होंगी। यहां पार्टी ऐसे मजबूत उम्मीदवार उतारना चाहती है, जिनके जीतने की संभावना ज्यादा हो।
ओवैसी की नजर खासतौर पर उन मुस्लिम नेताओं पर है, जो चुनाव लड़ना चाहते हैं। लेकिन, अखिलेश उनके टिकट काट रहे हैं। ऐसे नेताओं को ओवैसी AIMIM के टिकट पर चुनाव लड़वाने की तैयारी कर रहे हैं। सवाल है कि क्या ओवैसी को अब भी सपा-कांग्रेस से गठबंधन की उम्मीद है? या वह 2022 की तरह छोटे और क्षेत्रीय दलों को साथ लेकर आगे बढ़ेंगे? पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
4 अक्टूबर को ओवैसी लखनऊ पहुंचे। उन्होंने कहा कि हम किसी के लिए दरी नहीं बिछाएंगे। हम कोई वोटबैंक नहीं हैं।
AIMIM का दावा- सपा नेता संपर्क में…
AIMIM इस बार रणनीति बदलकर मैदान में उतर रही है। पार्टी की नजर ऐसे नेताओं पर है, जिन्होंने अपने क्षेत्र में लंबे समय से मेहनत की है। लेकिन, आखिरी वक्त पर सपा या अन्य विपक्षी दलों से उनका टिकट कटने की स्थिति बन रही है।
पिछले चुनावों के आंकड़े भी संकेत देते हैं कि इस बार सपा मुस्लिम नेताओं को कम टिकट देगी। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने 64 मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतारे थे, यानी करीब 15.88%। 2024 के लोकसभा चुनाव में सिर्फ 4 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया। ये कुल सीटों का सिर्फ 5% होता है।
AIMIM को उम्मीद है कि लोकसभा चुनाव की तरह सपा 2027 के चुनाव में भी कम मुस्लिम प्रत्याशी उतारेगी। ऐसे में जिन बड़े और असरदार मुस्लिम नेताओं के टिकट कटेंगे, AIMIM उन्हें अपने पाले में लाकर मैदान में उतारेगी। इसके लिए पार्टी के कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर सर्वे कर रहे हैं और संभावित चेहरों के संपर्क में हैं। ये नेता दावा करते हैं कि सपा के कई नेता, हमारे संपर्क में हैं।
पूर्वांचल से लेकर पश्चिम तक ओवैसी की रैलियां तय
AIMIM ने ओवैसी का यूपी दौरा पूर्वांचल से पश्चिम तक तय किया है। खासकर मुस्लिम बहुल जिलों पर फोकस किया जा रहा है।
असदुद्दीन ओवैसी ने 4 अक्टूबर को पूर्वांचल के श्रावस्ती जिले की भिनगा विधानसभा क्षेत्र के राजापुर रानी में जनसभा की।
11 अक्टूबर को पूर्वी यूपी के मुस्लिम आबादी के लिहाज से अहम जिले आजमगढ़ में जनसभा करेंगे। यहां की सभी 10 विधानसभा सीटों पर सपा का कब्जा है।
18 अक्टूबर को ओवैसी रामपुर पहुंचेंगे। रामपुर भी सपा का गढ़ रहा है। हालांकि, आजम खान के जेल जाने के बाद यहां सपा की स्थिति कमजोर हुई है।
25 अक्टूबर को शामली जिले के कैराना क्षेत्र में बड़ी जनसभा करेंगे। कैराना सपा सांसद इकरा हसन का लोकसभा क्षेत्र है।
7 नवंबर को मेरठ में बड़ी जनसभा करेंगे। इससे पहले ओवैसी बहराइच की मटेरा, बिजनौर की नजीबाबाद, मुरादाबाद ग्रामीण, सहारनपुर और कानपुर में भी जनसभाएं कर चुके हैं।
AIMIM ने 2022 में सपा को कहां-कहां नुकसान पहुंचाया
यूपी की 403 विधानसभा सीटों में से 120 से 143 सीटों पर मुस्लिम वोटर चुनावी नतीजों में बड़ी भूमिका निभाते हैं। पश्चिमी यूपी की करीब 73 सीटों पर मुस्लिम आबादी 30% से ज्यादा है। इनमें रामपुर, मुरादाबाद, संभल, सहारनपुर, बिजनौर, अमरोहा और मुजफ्फरनगर जैसी सीटें शामिल हैं। वहीं, करीब 70 सीटों पर मुस्लिम आबादी 20% से 30% के बीच है।
2022 में AIMIM ने करीब 97 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। हालांकि, उन्हें एक भी सीट नहीं मिली थी। वोट शेयर भी 0.49 फीसदी रहा था। लेकिन, जिन सीटों पर फोकस किया, वहां 2 हजार से 8 हजार तक वोट काटे। यहां जीत का मार्जिन AIMIM को मिले वोटों से कम था।
छोटे दलों के साथ हो सकता है समझौता
सपा-कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावना खत्म होने के बाद ओवैसी छोटे दलों के साथ गठबंधन कर सकते हैं। इनमें आजाद समाज पार्टी, पीस पार्टी और राष्ट्रीय उलमा काउंसिल जैसी पार्टियों के साथ समझौता हो सकता है। मुस्लिमों को संदेश देने के लिए ओवैसी पहले ही कह चुके हैं कि भाजपा को रोकना है तो सम्मान के साथ आएं, वरना हम अपनी लड़ाई खुद लड़ेंगे।
--------------------------
यह खबर भी पढ़ें-
अपर्णा की लखनऊ की 3 सीटों से दावेदारी मजबूत, मुलायम की छोटी बहू ने क्यों कहा- मैनपुरी से नहीं लड़ूंगी
मुलायम सिंह की बहू अपर्णा यादव अगला यूपी विधानसभा चुनाव लड़ सकती हैं। मैनपुरी के सैफई में उन्होंने कहा- तैयारी पूरी है, लेकिन मैनपुरी से चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं है। मैं किस विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ूंगी, इसका फैसला भाजपा करेगी। अपर्णा के चुनावी मैदान में उतरने से भाजपा को कितना फायदा होगा? वो किन सीटों से दावा कर सकती हैं? इस रिपोर्ट में पढ़िए…
.
खबरें और भी हैं...
जवान का शव लेकर आ रहे इकलौते बेटे-भाई-भतीजे की मौत: पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर एंबुलेंस ट्रक में घुसी, DM के गले लग भतीजा फूट-फूटकर रोया
2:01
कॉपी लिंक
शेयर
लखीमपुर में मकान नदी में समाया, बाढ़ में फंसा बाघ: लखनऊ में घर-दुकान जलमग्न, सड़कों पर नाव चल रही; यूपी में मानसून विदा
1:04
कॉपी लिंक
शेयर
लखनऊ में अचानक आई बाढ़ का ड्रोन VIDEO: 40 हजार से ज्यादा घरों में पानी घुसा, गलियों में चल रहीं नावें, हजारों परिवारों ने घर छोड़ा
2:36
कॉपी लिंक
शेयर
यूपी भाजपा की मीडिया टीम घोषित: 31 प्रवक्ताओं में 10 ब्राह्मण, 25 मीडिया पैनलिस्ट बने; पूर्व मंत्री आशुतोष टंडन के विरोधी को मिली जगह