Aug 28, 2026 08:23 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

मुख्य बातें
- बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड ने Trafiksol ITS Technologies Ltd और उसके प्रमोटर्स जितेंद्र नारायण दास तथा पूनम दास के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है

सेबी का बड़ा एक्शन
Trafiksol ITS Technologies IPO: शेयर बाजार को रेग्युलेट करने वाले संस्था सेबी ने ट्रैफिकसोल आईटीसी टेक्नोलॉजीज और कंपनी के प्रमोटर्स पर बड़ा एक्शन लिया है। कंपनी ने प्रमोटर- जितेंद्र नारायण दास और पूनम दास को एक साल के लिए सिक्योरिटीज मार्केट में कारोबार करने से रोक दिया है। इसके साथ ही कंपनी के आईपीओ में कथित गड़बड़ियों के लिए उन पर कुल 1.05 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया।
2024 की दूसरी छमाही में लॉन्च हुआ था IPO
बता दें कि ट्रैफिकसोल आईटीसी टेक्नोलॉजीज का आईपीओ साल 2024 की दूसरी छमाही में लॉन्च हुआ था। इस आईपीओ को करीब 345.65 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। कंपनी ने इस इश्यू के तहत 64.10 लाख नए शेयर जारी किए थे और प्राइस बैंड ₹66 से ₹70 प्रति शेयर रखा गया था। अपर प्राइस बैंड के हिसाब से कंपनी आईपीओ से करीब ₹44.87 करोड़ जुटाने की योजना बनाई थी। कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग 17 सितंबर 2024 को प्रस्तावित थी, लेकिन IPO से जुड़े खुलासों और सॉफ्टवेयर विक्रेता को लेकर शिकायतों के बाद मामला विवादों में आ गया।
इसके बाद रेगुलेटर ने IPO से मिली रकम को ब्याज देने वाले एस्क्रो अकाउंट में रखने का आदेश दिया और बाद में निवेशकों को पैसे वापस करने और अलॉट किए गए शेयरों को रद्द करने का निर्देश दिया।
सेबी के फैसले की वजह
दरअसल, सेबी को कई गंभीर उल्लंघन मिले, जिनमें गुमराह करने वाली फाइनेंशियल जानकारी देना, जरूरी तथ्यों को छिपाना और Oasis Corpcare Pvt Ltd से जुड़ी गलत जानकारी देना शामिल है। सेबी का आरोप है कि कंपनी की फाइनेंशियल जानकारी में उसके कामकाज को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया था और प्रस्तावित इश्यू से मिलने वाली रकम के एक बड़े हिस्से के लिए एक बनावटी कोटेशन का इस्तेमाल किया गया था।
तत्कालीन पूर्णकालिक सदस्य अश्विनी भाटिया ने 11 अक्टूबर 2024 को अंतरिम एक्स-पार्टी आदेश जारी करते हुए BSE को कंपनी की प्रस्तावित लिस्टिंग रोकने का निर्देश दिया था। इसके बाद मामले की विस्तृत जांच शुरू हुई।
सेबी की जांच में क्या मिला?
सेबी ने जांच के दौरान यह भी पाया कि कुछ अहम आईपीओ खर्चों का उचित खुलासा नहीं किया गया था और मर्चेंट बैंकर से जुड़े संभावित हितों के टकराव वाले वित्तीय संबंध की जानकारी भी छिपाई गई थी। Oasis Corpcare का कोटेशन इस मामले में सबसे गंभीर उल्लंघनों में से एक पाया गया। सेबी के मुताबिक आईपीओ से जुटाई जाने वाली बड़ी रकम एक ऐसे कथित फर्जी कोटेशन के आधार पर खर्च की जानी थी, जिसके पीछे मौजूद इकाई की विश्वसनीय तकनीकी और परिचालन क्षमता नहीं थी।