September 23, 2026

भूत-प्रेत के शक में खूनी खेल! पत्नी-2 पुजारियों की हत्या के बाद बच्चों को किया टार्चर,सिरफिरा एनकाउंटर में ढेर

Time Updated: Wednesday, September 23, 2026, 8:36 [IST]

Azamgarh Triple Murder: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में मंगलवार देर शाम शुरू हुआ एक पारिवारिक विवाद कई घंटों तक चले पुलिस ऑपरेशन में बदल गया। अहिरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में अरविंद सिंह ने कथित तौर पर तंत्र-मंत्र और पूजा-पाठ के दौरान अपनी पत्नी और घर आए दो पुजारियों की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद उसने अपने बच्चों को घर के अंदर बंधक बना लिया।

पुलिस करीब 7 से 8 घंटे तक उसे समझाने की कोशिश करती रही, लेकिन वह बच्चों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुआ। इसी दौरान उसने एक बेटे को भी गोली मार दी। घर में दाखिल हुई पुलिस टीम पर भी आरोपी ने फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में अरविंद सिंह घायल हो गया और अस्पताल में उसकी मौत हो गई। पुलिस ने बाकी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

Azamgarh Triple Murder

भाई की हत्या के बाद भूत-प्रेत का शक

बताया जा रहा है कि अरविंद सिंह के भाई गुड्डू सिंह की करीब 8 साल पहले हत्या हुई थी। परिवार में यह बात चल रही थी कि भाई की मौत के बाद उसका भूत परिवार को परेशान कर रहा है। इसी वजह से घर में पिछले चार दिनों से तंत्र-मंत्र और पूजा-पाठ कराया जा रहा था।

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मंगलवार को भी घर में कुछ पुजारी पूजा करा रहे थे। इसी दौरान अरविंद का व्यवहार अचानक बदल गया। वह बार-बार पूजा बंद करने के लिए कहने लगा। जब पूजा नहीं रोकी गई तो उसने अपनी लाइसेंसी पिस्टल निकाल ली। कुछ लोगों का दावा है कि पूजा के दौरान आधार कार्ड मांगने को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद पंडितों से कहासुनी हुई और अरविंद ने फायरिंग कर दी।

पहले पुजारियों पर चलाई गोली

आरोप है कि अरविंद ने पूजा करा रहे एक पुजारी को गोली मार दी। इसके बाद उसने दूसरे पुजारी पर भी फायरिंग की। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। इस दौरान वहां मौजूद दो अन्य पुजारी किसी तरह मौके से निकलकर भाग गए। इसके बाद अरविंद ने अपनी पत्नी पर भी गंभीर आरोप लगाए। उसने पत्नी से कहा कि उसकी वजह से उसके भाई की जान गई है। इसके बाद पूजा में बैठी पत्नी को भी गोली मार दी। इस तरह घर के अंदर तीन लोगों की मौत हो गई।

बच्चों को कमरे में किया बंद

पत्नी और दोनों पुजारियों की हत्या के बाद अरविंद ने अपने बच्चों को घर के एक कमरे में अपने साथ बंद कर लिया। उसके साथ 8 साल का बेटा शौर्य सिंह, 12 साल की बेटी परी सिंह और 6 महीने की बच्ची थी। पुलिस के पहुंचने के बाद बच्चों को बाहर निकालने के लिए अरविंद से लगातार बातचीत की गई। पुलिस अधिकारियों ने उसे समझाने और बच्चों को सुरक्षित छोड़ने की कोशिश की, लेकिन वह किसी बात के लिए तैयार नहीं हुआ।

7 घंटे तक पुलिस करती रही बातचीत

वाराणसी जोन के SDG नवीन अरोड़ा के मुताबिक, पुलिस करीब 7 घंटे तक आरोपी से बातचीत करती रही। अरविंद बार-बार कह रहा था कि वह सुबह तक इंतजार करेगा और बच्चों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं था। पुलिस की टीम लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए थी। घर के अंदर आरोपी के पास हथियार होने के कारण किसी भी जल्दबाजी से बच्चों की जान को खतरा हो सकता था। इसलिए पुलिस ने काफी देर तक बातचीत के जरिए मामला शांत कराने की कोशिश की।

अचानक घर के अंदर से आई गोली की आवाज

काफी देर तक बातचीत के बाद अचानक घर के अंदर से गोली चलने की आवाज सुनाई दी। पुलिस को पता चला कि अरविंद ने अपने एक बेटे को गोली मार दी है। इसके बाद पुलिस ने बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए तुरंत घर में प्रवेश करने का फैसला लिया। पुलिस टीम ने स्टेन ग्रेनेड और टियर गैस का इस्तेमाल किया और घर के अंदर फोर्स एंट्री की। ऑपरेशन में एटीएस के कमांडो और एसपी-एसओजी की टीम भी शामिल थी।

पुलिस पर भी की कई राउंड फायरिंग

पुलिस को घर के अंदर आते देख अरविंद ने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से फायरिंग शुरू कर दी। उसने पुलिस टीम पर करीब 6 राउंड गोलियां चलाईं। पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की, जिसमें अरविंद गंभीर रूप से घायल हो गया। इसके बाद पुलिस उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंची, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

घायल बेटे को अस्पताल भेजा गया

पुलिस के मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान घायल बच्चे को तुरंत अस्पताल भेजा गया हालांकि उसे बचाया नहीं जा सका। वहीं कमरे में मौजूद बाकी दोनों बच्चों को भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। लंबे समय तक कमरे में बंद रहने के कारण बच्चे भूख-प्यास और डिहाइड्रेशन की हालत में थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बच्चों पर इस घटना का गहरा असर पड़ा है और वे काफी डरे हुए थे।

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