खंडवा जिले के जावर गांव में उद्यानिकी खेती किसानों के लिए आय का नया मॉडल बनकर उभरी है। दो एकड़ से शुरू हुई एक किसान की पहल आज 160 किसानों के किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) में बदल चुकी है। यहां आधुनिक तकनीकों से उगाई जा रही सब्जियां देश के बड़े शहरों के
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कलेक्टर ने खेत पहुंचकर देखा आधुनिक खेती का मॉडल
कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने जावर गांव में किसान अश्विन सावले के खेत पर खीरा और टमाटर की आधुनिक खेती का निरीक्षण किया। इस दौरान अपर कलेक्टर (आईएएस) सृष्टि देशमुख गौड़ा, कृषि विभाग और उद्यानिकी विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग, स्प्रिंकलर और अन्य आधुनिक तकनीकों से की जा रही खेती को करीब से देखा।

कलेक्टर के साथ अपर कलेक्टर IAS सृष्टि देशमुख गौड़ा ने भी खेतों का जायजा लिया।
किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने की सलाह
निरीक्षण के बाद आयोजित किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम में कलेक्टर ने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और वैज्ञानिक खेती से उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत भी कम की जा सकती है। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ खेती के तरीके भी बदलने होंगे, तभी किसानों की आय में वास्तविक वृद्धि संभव है।
सोयाबीन से कई गुना ज्यादा मुनाफा
कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने कहा कि पारंपरिक फसलों की तुलना में उद्यानिकी खेती किसानों को कई गुना अधिक लाभ दे रही है। उन्होंने बताया कि जहां सोयाबीन की खेती से प्रति एकड़ लगभग 30 हजार रुपए की आय होती है, वहीं खीरा और टमाटर जैसी सब्जियों की खेती से किसान प्रति एकड़ 4 लाख रुपए या उससे अधिक की आय अर्जित कर रहे हैं।
चार साल पहले दो एकड़ से की थी शुरुआत
प्रगतिशील किसान अश्विन सावले ने बताया कि उन्होंने करीब चार वर्ष पहले दो एकड़ भूमि पर खीरा और टमाटर की खेती शुरू की थी। बेहतर उत्पादन और अच्छा मुनाफा मिलने के बाद उन्होंने खेती का दायरा बढ़ाया और गांव के अन्य किसानों को भी इस मॉडल से जोड़ा। धीरे-धीरे किसानों को संगठित कर किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनाया गया।
आज 160 किसान जुड़े, 400 एकड़ में हो रही खेती
वर्तमान में अश्विन सावले के एफपीओ से 160 किसान जुड़े हुए हैं, जो करीब 400 एकड़ क्षेत्र में विभिन्न सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं।एफपीओ से जुड़े किसानों को प्रति एकड़ 4 से 5 लाख रुपए तक की आय हो रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है।
जावर की सब्जियां देशभर के बाजारों तक पहुंच रहीं
अश्विन सावले ने बताया कि उनके खेत में उत्पादित टमाटर, खीरा, करेला, लौकी और नींबू की सप्लाई मुंबई, नई दिल्ली, लखनऊ, लुधियाना, नोएडा और पठानकोट सहित कई प्रमुख मंडियों में की जाती है। उन्होंने बताया कि टमाटर मुंबई के व्यापारियों के माध्यम से दुबई तक निर्यात किया जाता है।
सोलर ड्रायर से बढ़ा किसानों का मुनाफा
अश्विन सावले ने बताया कि जब बाजार में टमाटर और अन्य सब्जियों के दाम कम हो जाते हैं, तब वे उन्हें सोलर ड्रायर में सुखाकर वैल्यू एडिशन के जरिए बेचते हैं। उनके फार्म हाउस पर वर्तमान में छह सोलर ड्रायर लगे हैं, जिनमें टमाटर, करेला, मिर्च, नींबू और आम को प्रोसेस किया जाता है। इसके बाद इन उत्पादों की बिक्री और निर्यात किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस तकनीक से फसल खराब होने से बच जाती है और किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं। वैल्यू एडिशन के कारण उत्पादों की मांग भी लगातार बढ़ रही है।
जावर मॉडल बना किसानों के लिए प्रेरणा
कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने कहा कि जावर गांव का यह मॉडल जिले के अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक है। यदि किसान आधुनिक तकनीक, उद्यानिकी खेती और एफपीओ मॉडल अपनाते हैं, तो वे कम भूमि में भी कई गुना अधिक आय अर्जित कर सकते हैं। प्रशासन भी किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगा।