September 19, 2026

पशु एंबुलेंस सेवा 1962 ठप: 5 एंबुलेंस कबाड़, काम 'शून्य' फिर भी 5 लाख निकल रहा वेतन - Vidisha News

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अभिषेक शर्मा

पशुओं का घर बैठे इलाज के लिए 2021-22 में शुरू की गई 1962 पशु एंबुलेंस सेवा लापरवाही की भेंट चढ़ चुकी है। जिले में तैनात 8 में से 5 एंबुलेंस पिछले 6 महीनों से कबाड़ बनकर जंग खा रही हैं। हद तो यह है कि जब एंबुलेंस ही नहीं चल रही हैं, फिर भी इन पर तैनात डॉक्टरों, सहायकों और ड्राइवरों का हर महीने करीब 5 लाख का वेतन निकल रहा है।

योजना का संचालन करने वाली रोगी कल्याण समिति के खाते में 55 लाख रुपए जमा हैं, जबकि एंबुलेंस की मरम्मत का खर्च महज 3 लाख रुपए है। बावजूद इसके फाइल 6 महीने से कलेक्टर कार्यालय में धूल फांक रही है। अफसरों की इस लापरवाही से जिले के 1.69 लाख से अधिक गोवंश का इलाज पूरी तरह गोसेवकों और झोलाछापों के भरोसे छोड़ दिया गया है। हम तो निजी उपचार करवाते हैं : गंजबासौदा के पशु पालक राजेश जैन ने बताया मेरे पास 20 पशु हैं।

पशुओं के बीमार होने पर 1962 पर एक-दो बार कॉल किया था, लेकिन उस पर आवाज आती है कि निकटतम चिकित्सक से संपर्क करें। निजी डॉक्टर को बुलाकर ही उपचार करवाते हैं। जब टोल फ्री नंबर पर सुविधा नहीं मिली तो फोन लगाना ही छोड़ दिया। मूंगवाड़ा ग्यारसपुर के पशुपालक दुर्ग सिंह दांगी ने बताया हमने अपने पशुओं के उपचार के लिए 1962 पर 10 दिन पहले कॉल किया था, लेकिन तीन दिन तक डॉक्टर नहीं पहुंचे, इसके बाद सीएम हेल्पलाइन 181 पर शिकायत की तो एक गोसेवक आकर उपचार करके चला गया। वह स्वयं को डॉक्टर बता रहा था। 1962 पर दर्जनों बार शिकायतें की लेकिन सुविधा नहीं मिली।

योजना की जमीनी हकीकत परखने के लिए भास्कर ने 2 से 18 सितंबर तक लगातार 16 दिनों तक रियलिटी चेक किया। 3 अलग-अलग मोबाइल नंबरों से सेवा के टोल-फ्री नंबर 1962 पर 46 बार कॉल किया गया, लेकिन हर बार एक ही रिकॉर्डेड आवाज आई- आपके द्वारा डायल किया गया नंबर उपयोग में नहीं है। इससे साफ जाहिर है कि अफसरों ने बिना किसी सूचना के अंदर ही अंदर योजना का गला घोंट दिया है।

मुझे इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है ^मैं अभी छुट्टी पर हूं, मुझे इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। आप सोमवार को आकर बात कर सकते हैं। - डॉ. दीप्ति कोटेस्थानी, उप संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं, विदिशा

1,69,268 जिले में कुल गोवंश 27,831 सड़कों पर निराश्रित गोवंश 155 कुल गोशालाएं (सरकार /निजी) 135 सरकारी और 20 निजी 08 कुल 1962 एंबुलेंस 07 कबाड़ पड़ी गाड़ियां (6 माह से)

एंबुलेंस का संचालन रोगी कल्याण समिति करती है, जिसके अध्यक्ष खुद कलेक्टर हैं। समिति के खाते में इस वक्त 55 लाख रुपए जमा हैं, जबकि 7 एंबुलेंस को ठीक कराने का खर्च महज 3 लाख रुपए है। बावजूद इसके मरम्मत की फाइल 6 महीने से कलेक्टर कार्यालय में अटकी है। उपसंचालक और विभागीय अफसरों की अरुचि के कारण योजना को जानबूझकर ठप करने की साजिश नजर आ रही है।