Published: Thursday, September 10, 2026, 19:29 [IST]
भारत के पास इस वक्त 190 परमाणु हथियार हैं। ये दावा किसी और का नहीं, बल्कि अमेरिका के थिंक टैंक फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स यानी FAS का है। इस रिपोर्ट को लिखा है हैंस क्रिस्टेंसन ने, जो FAS के न्यूक्लियर इंफॉर्मेशन प्रोजेक्ट के डायरेक्टर हैं।
रिपोर्ट का नाम है "इंडियाज न्यूक्लियर वेपन्स-2026"। FAS के मुताबिक भारत के पास इस समय करीब 190 परमाणु हथियार हैं। यह संख्या पाकिस्तान के अनुमानित 170 परमाणु हथियारों से करीब 20 ज्यादा है।
इतना ही नहीं, भारत के पास मौजूद हथियार बनाने वाले प्लूटोनियम के भंडार को देखते हुए आने वाले वर्षों में यह संख्या और बढ़ सकती है। अब सवाल यह है कि ये संख्या आगे कितनी बढ़ सकती है। FAS का कहना है कि भारत के पास इतना प्लूटोनियम है कि वो 35 और बम बना सकता है। यानी आने वाले सालों में कुल संख्या 225 तक पहुंच सकती है। इसमें से 160 से ज्यादा बम पहले से तैनात मिसाइलों के लिए तैयार हैं, बाकी नई मिसाइलों के लिए रिजर्व में रखे गए हैं।
190 परमाणु हथियारों का मतलब क्या है?
FAS की रिपोर्ट "India's Nuclear Weapons - 2026" में भारत के परमाणु जखीरे का आकलन किया गया है। रिपोर्ट को FAS के न्यूक्लियर इंफॉर्मेशन प्रोजेक्ट के निदेशक हंस क्रिस्टेंसन ने तैयार किया है। रिपोर्ट का अनुमान है कि भारत की मौजूदा परिचालन क्षमता से 160 से ज्यादा परमाणु हथियार पहुंचाए जा सकते हैं। इसके अलावा कुछ वॉरहेड उन मिसाइलों के लिए तैयार किए गए हैं जो अभी उत्पादन में हैं। इस तरह कुल भंडार करीब 190 तक पहुंचता है।
भारत फिलहाल परमाणु क्षमता वाले 9 अलग सिस्टम संचालित करता है। इनमें दो विमान आधारित सिस्टम, छह जमीन से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें और एक समुद्र से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल शामिल है। FAS का कहना है कि कम से कम दो और सिस्टम विकास के आखिरी चरण में हैं। आने वाले कुछ वर्षों में इनके सेना में शामिल होने की उम्मीद है।

पाकिस्तान से आगे, ब्रिटेन को पीछे छोड़ने की तैयारी
पाकिस्तान के पास फिलहाल करीब 170 परमाणु हथियार हैं। यानी भारत पाकिस्तान से करीब 20 बम आगे निकल चुका है। अब अगर भारत अपनी पूरी क्षमता इस्तेमाल कर ले, तो वो ब्रिटेन को भी पीछे छोड़ सकता है, क्योंकि ब्रिटेन के पास फिलहाल करीब 225 हथियार हैं।
दुनिया की पूरी तस्वीर देखें तो रूस सबसे आगे है, उसके पास करीब 5,420 बम हैं। अमेरिका के पास 5,042 हैं। दोनों देशों के पास मिलाकर दुनिया के कुल परमाणु हथियारों का करीब 86% हिस्सा है। चीन तीसरे नंबर पर है, उसके पास करीब 620 बम हैं और वो सबसे तेज रफ्तार से अपना जखीरा बढ़ा रहा है। फ्रांस के पास करीब 370 और इजराइल के पास करीब 90 बम बताए जाते हैं, हालांकि इजराइल इस पर कभी खुलकर कुछ नहीं बोलता। उत्तर कोरिया के पास करीब 60 हथियार हैं।
SIPRI की 2026 की ईयरबुक बताती है कि फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इजराइल, इन देशों के पास मिलाकर कुल 12,187 परमाणु हथियार हैं। इनमें से 9,745 बम फौरन इस्तेमाल के लिए तैयार हैं।
730 किलो प्लूटोनियम से कितने परमाणु हथियार बन सकते हैं?
अब बात प्लूटोनियम की, क्योंकि परमाणु बम बनाने के लिए यही सबसे जरूरी चीज है। FAS का अनुमान है कि 2026 की शुरुआत तक भारत के पास करीब 730 किलो हथियार बनाने लायक प्लूटोनियम था। इसमें करीब 170 किलो ऊपर-नीचे हो सकता है। ये आंकड़ा इंटरनेशनल पैनल ऑन फिसाइल मैटीरियल्स की 2026 वाली रिपोर्ट से लिया गया है।
एक बम बनाने में करीब 4 किलो प्लूटोनियम लगता है। इस हिसाब से भारत के पास जितना प्लूटोनियम है, उससे 140 से लेकर 225 तक बम बनाए जा सकते हैं। लेकिन FAS खुद कहता है कि ये सिर्फ अंदाजा है, असली संख्या इस बात पर निर्भर करती है कि हर बम का डिजाइन कैसा है और कितना प्लूटोनियम रिजर्व में रखा गया है।

अग्नि-V अब एक नहीं, कई निशाने साध सकती है
भारत की परमाणु क्षमता में सिर्फ संख्या नहीं बढ़ रही है। हथियारों की तकनीक भी बदल रही है। FAS ने अग्नि-V के उन्नत संस्करण और इसमें MIRV तकनीक के परीक्षण का जिक्र किया है। भारत की अग्नि-V मिसाइल पर भी रिपोर्ट में खास बात कही गई है।
इस मिसाइल में अब MIRV टेक्नोलॉजी टेस्ट की जा चुकी है। इसका सीधा मतलब है, एक ही मिसाइल में कई हथियार भरे जा सकते हैं, और हर हथियार अलग-अलग जगह गिराया जा सकता है। 2024 के बाद मई 2026 में भी इसका टेस्ट हुआ, जिसमें कई पेलोड एक साथ छोड़े गए। FAS का मानना है कि अग्नि-V शायद तीन हथियार तक ले जा सकती है, हालांकि इतना वजन लादने से मिसाइल की रेंज कुछ कम हो सकती है।
PFBR रिएक्टर से बढ़ सकती है परमाणु ताकत
भारत की भविष्य की परमाणु क्षमता में प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर यानी PFBR को भी अहम कड़ी माना जा रहा है। अप्रैल 2026 में भारत के 500 मेगावाट वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर यानी PFBR ने पहली बार क्रिटिकलिटी हासिल की। FAS का अनुमान है कि अगर ये रिएक्टर 80% क्षमता पर चले, तो हर साल करीब 140 किलो प्लूटोनियम-239 बना सकता है। इतने प्लूटोनियम से करीब 35 और बम तैयार हो सकते हैं। भारत आगे और भी फास्ट ब्रीडर रिएक्टर बनाने की योजना में है।
समुद्र में भी बन रहा 'न्यूक्लियर कवच'
भारत सिर्फ जमीन और हवा से नहीं, समुद्र से भी परमाणु हमला करने की क्षमता तेजी से बढ़ा रहा है। इसे न्यूक्लियर ट्रायड कहते हैं, यानी जमीन, हवा और समुद्र, तीनों रास्तों से परमाणु हथियार दागने की ताकत। समुद्र से परमाणु हमला करने की क्षमता को रणनीतिक तौर पर खास माना जाता है। इसकी वजह यह है कि परमाणु ऊर्जा से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां समुद्र में लंबे समय तक छिपी रह सकती हैं। इससे जवाबी परमाणु हमला करने की क्षमता को मजबूत आधार मिलता है। FAS ने भारत की समुद्री परमाणु क्षमता के विस्तार को इसी बड़े बदलाव का हिस्सा बताया है।
अप्रैल 2026 में भारत ने अपनी तीसरी स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी INS अरिधमान को नेवी में शामिल किया। FAS के मुताबिक इसमें 8 मिसाइल ट्यूब लगे हैं, जो INS अरिहंत और INS अरिघात से दोगुने हैं। अरिहंत क्लास की अगली पनडुब्बी INS अरिसुदन 2027 में नेवी में शामिल होने वाली है।

FAS की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के पास फिलहाल 9 तरह के परमाणु-सक्षम सिस्टम हैं:
- 2 लड़ाकू विमान
- 6 जमीन से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें
- 1 समुद्र से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल
रिपोर्ट ये भी कहती है कि दो और सिस्टम अभी बन रहे हैं और अगले कुछ सालों में सेना में शामिल हो सकते हैं।
भारत का 'नो फर्स्ट यूज' और पाकिस्तान का अलग रास्ता
भारत की घोषित नीति साफ है, वो पहले परमाणु हथियार इस्तेमाल नहीं करेगा। इसे 'नो फर्स्ट यूज' पॉलिसी कहते हैं। समुद्र से हमला करने की मजबूत क्षमता की वजह से भारत को अपनी जमीनी मिसाइलों को हर वक्त हाई अलर्ट पर रखने की जरूरत भी कम पड़ती है।
पाकिस्तान का रुख इससे बिल्कुल अलग है। इस्लामाबाद ने कभी नो फर्स्ट यूज की नीति नहीं अपनाई। पाकिस्तान खुलकर कहता है कि जरूरत पड़ने पर वो पहले भी परमाणु हथियार इस्तेमाल कर सकता है। दरअसल पाकिस्तान की पूरी परमाणु नीति भारत की कन्वेंशनल यानी सामान्य सैन्य ताकत का जवाब देने के लिए बनी है। पाकिस्तानी अधिकारी लगातार कहते आए हैं कि अगर उनकी सामान्य सेना कमजोर पड़ी या देश पर बड़ा खतरा आया, तो परमाणु हथियार आखिरी ढाल का काम करेंगे।
अब फोकस सिर्फ पाकिस्तान नहीं, चीन भी
लंबे समय तक भारत की परमाणु नीति पाकिस्तान को ध्यान में रखकर बनती रही। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। लंबी दूरी की मिसाइलें और समुद्र से हमले की क्षमता बढ़ाने का मतलब है कि भारत अब चीन को भी बराबर तवज्जो दे रहा है। नो फर्स्ट यूज की नीति भले वही है, लेकिन नए हथियार सिस्टम और लगातार हो रहे आधुनिकीकरण से दक्षिण एशिया में परमाणु ताकत का संतुलन धीरे-धीरे बदल रहा है।
दुनिया में सबसे ज्यादा परमाणु हथियार किसके पास?
भारत की 190 वॉरहेड वाली क्षमता बड़ी है, लेकिन दुनिया के सबसे बड़े परमाणु जखीरे के सामने यह अभी काफी छोटी है। FAS और SIPRI के आंकड़ों में रूस करीब 5,420 वॉरहेड के साथ सबसे ऊपर है। अमेरिका के पास करीब 5,042 वॉरहेड बताए गए हैं। दोनों देशों के पास मिलाकर दुनिया के कुल परमाणु हथियारों का करीब 86 फीसदी हिस्सा है।

चीन के पास करीब 620, फ्रांस के पास करीब 370 और ब्रिटेन के पास करीब 225 परमाणु वॉरहेड बताए गए हैं। भारत के करीब 190 के अलावा पाकिस्तान के पास करीब 170, इजराइल के पास करीब 90 और उत्तर कोरिया के पास करीब 60 वॉरहेड का अनुमान दिया गया है।
यानी भारत की कहानी सिर्फ पाकिस्तान से आगे निकलने की नहीं है। असली बदलाव यह है कि भारत अपने परमाणु जखीरे के साथ लंबी दूरी की मिसाइल, MIRV तकनीक, फास्ट ब्रीडर रिएक्टर और समुद्र आधारित परमाणु क्षमता को भी आगे बढ़ा रहा है। यही चार मोर्चे आने वाले वर्षों में भारत की परमाणु ताकत की दिशा तय कर सकते हैं।