October 27, 2026

भारत में पहली बार चीते की गोली मारकर हत्या! 19 महीने के शावक के पेट से निकले छर्रे, अधिकारियों ने शुरू की जांच | IBC24

Kuno National Park Cheetah Murder News: श्योपुर: कूनो नेशनल पार्क से निकलकर एक 19 महीने का चीता का शावक भटकते हुए मुरैना पहुंच गया। इतना ही नहीं मुरैना में चीता घायल अवस्था में मिला था। इसके बाद उसे घायल अवस्था में फिर से कूनो में लाकर उसका इलाज किया जा रहा था, लेकिन डॉक्टर उस चीता को बचा नहीं पाए। घायल चीता का इलाज कर रहे डॉक्टरों ने बताया कि, चीता को गोली मारी गई थी। इस बात ने हर किसी को हैरान कर दिया है। क्योंकि, चीता प्रोजेक्ट के तहत ये भारत में पहली घटना है, जब किसी चीता की गोली मारकर हत्या की गई हो।

चीता के पेट में मिले कई छर्रे

दरअसल, 25 अक्टूबर की रात मुरैना और श्योपुर जिलों की सीमा से चीता का रेस्क्यू किया गया था। बेहतर इलाज के लिए शावक को जबलपुर स्थित एक पशु चिकित्सा केंद्र में भेजा गया था इलाज के दौरान सामने आया कि, घायल चीते को बेहद करीब से गोली मारी गई है। उसके पेट में कई छर्रे मिले थे। गोली लगने से चिता की मौत से बाद उनकी सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े होने लगे हैं।

चीता के हत्या की पहली घटना

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, 17 सितंबर 2022 को भारत की धरती पर पहली बार नामीबिया से आठ चीते लाए गए थे। इस दिन के बाद से ही भारत में लगातार चीतों की आबादी बढ़ रही है। पहली बार ऐसी घटना घटी है कि किसी चीते की हत्या गोली मारकर की गई है। अब जांच टीम यह पता कर रही है कि उन्हें मारने के लिए किस हथियार का इस्तेमाल हुआ है। जिस इलाके में चीता घायल अवस्था में मिला उस इलाके में वन्यजीवों की रक्षा के लिए स्पेशल टाइगर स्ट्राइक फोर्स को तैनात किया गया है। आरोपियों की पहचान के लिए वन विभाग की टीम राज्य की एसटीएफ की भी मदद ले रही है।

घटना की चल रही जांच

बताते चलें कि, मुरैना एक बीहड़ इलाका है और इन इलाकों में देसी बंदूके बेहद आसानी से मिल जाती है। वहीं दूसरी तरफ ये भी आशंका जताई जा रही है कि, चीते को अचानक देख हमलावर डर गया होगा और उसने गोली चला दी होगी। हालांकि अभी तक इस घटना के पीछे का मकसद साफ नहीं है। किसी संदिग्ध की पहचान भी नहीं हुई है। कूनो प्रशासन की तरफ से कहा गया है कि चोटों के कारणों का पता लगाने के लिए जांच चल रही है। वहीं, गोलीबारी की घटना को लेकर भी प्रोजेक्ट के अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है।

चीते 1952 में हो गए थे विलुप्त

गौरतलब है कि भारत में 1952 में चीते विलुप्त हो गए थे। 2022 में चीता प्रोजेक्ट के तहत इन्हें फिर से बसाया जा रहा है। इसके लिए नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से चीते लाए गए हैं। इन्हें एमपी के तीन अभ्यारणों में बसाया गया है। चीते की मौत पर वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने सीबीआई जांच की मांग की है।

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