Published: Saturday, September 12, 2026, 16:25 [IST]
PM Modi Speech at BRICS Summit: नई दिल्ली में 18वें BRICS सम्मेलन की शुरुआत हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भारत मंडपम में सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने वैश्विक व्यवस्था में विकासशील देशों की भूमिका को लेकर भारत का रुख सामने रखा। प्रधानमंत्री ने कहा कि ग्लोबल साउथ को केवल दूसरे देशों द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे नियम बनाने की प्रक्रिया में भी अपनी जगह बनानी चाहिए।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार से लेकर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में बदलाव और BRICS के फैसलों को लागू करने के लिए बेहतर व्यवस्था की जरूरत पर भी बात की। पीएम मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि BRICS किसी देश के खिलाफ नहीं है और इसका उद्देश्य सभी देशों को साथ लेकर आगे बढ़ना है।
20 साल पूरे होने पर खास मौका
पीएम मोदी ने कहा कि इस साल का BRICS सम्मेलन खास है, क्योंकि संगठन अपनी स्थापना के 20 साल पूरे कर रहा है। उन्होंने कहा कि इंसान की जिंदगी में 20 साल की उम्र एक नए दौर की शुरुआत मानी जाती है। इस उम्र में जिम्मेदारियां बढ़ती हैं और क्षमताओं को नई दिशा मिलती है। इसी तरह BRICS भी अब ऐसे पड़ाव पर पहुंच चुका है, जहां उसकी जिम्मेदारी और भूमिका पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। प्रधानमंत्री के मुताबिक, पिछले दो दशकों में BRICS ने दुनिया के मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है।
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'BRICS किसी के खिलाफ नहीं'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन में साफ कहा कि BRICS किसी देश या किसी दूसरे समूह के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि संगठन में शामिल देश एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करते हैं और आपसी सहमति से आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं। BRICS का उद्देश्य किसी के खिलाफ खड़ा होना नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार BRICS की बढ़ती भूमिका पर सवाल उठा चुके हैं और इसे अमेरिका विरोधी समूह भी बता चुके हैं।
ग्लोबल साउथ को 'नियम बनाने वाला' बनाने पर जोर
पीएम मोदी ने ग्लोबल साउथ को लेकर भी बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विकासशील देश दुनिया के कई संकटों का सबसे ज्यादा असर झेलते हैं, लेकिन वैश्विक फैसले लेने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका अभी भी सीमित है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ को केवल बनाए गए नियमों का पालन करने वाला नहीं, बल्कि भविष्य के नियम तय करने में भागीदारी करने वाला बनना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने खास तौर पर AI, साइबर क्षेत्र, अंतरिक्ष, जैव तकनीक और दूसरी महत्वपूर्ण तकनीकों का जिक्र किया। उनके मुताबिक ये क्षेत्र भविष्य के अवसरों के साथ-साथ नए वैश्विक नियम भी तय करेंगे।
युवा राजनयिकों को तैयार करने का सुझाव
पीएम मोदी ने कहा कि BRICS के जरिए ग्लोबल साउथ के युवा राजनयिकों और नीति बनाने वाले अधिकारियों को बातचीत और समझौते की प्रक्रिया से जुड़ी ट्रेनिंग दी जा सकती है। उन्हें बातचीत की तकनीक, व्यावहारिक प्रशिक्षण और कानूनी जानकारी देने पर काम किया जा सकता है। इससे विकासशील देशों के प्रतिनिधि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी बात ज्यादा प्रभावी तरीके से रख सकेंगे।
'भविष्य साझा है तो फैसला भी साझा होना चाहिए'
प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर दुनिया के देशों का भविष्य एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है, तो उस भविष्य को तय करने का अधिकार भी ज्यादा समान होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि BRICS का लक्ष्य केवल अपनी आवाज उठाना नहीं, बल्कि आवाज को वास्तविक प्रभाव में बदलना होना चाहिए। उनके संदेश का मुख्य जोर विकासशील देशों को वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक फैसलों में ज्यादा भागीदारी दिलाने पर रहा।
UNSC सुधार को लेकर दो टूक बात
प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब इसमें सुधार को और टाला नहीं जा सकता। उन्होंने सुधार की प्रक्रिया को एक तय समयसीमा से जोड़ने की बात कही, ताकि केवल बातचीत चलती न रहे, बल्कि उसका स्पष्ट नतीजा भी सामने आए।
पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में भी बदलाव की मांग की। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों में मतदान का अधिकार, नेतृत्व की भूमिका और नीतियां आज की आर्थिक स्थिति के मुताबिक होनी चाहिए। उनका कहना था कि जो देश दुनिया की आर्थिक वृद्धि में बड़ी भूमिका निभाते हैं, उन्हें वैश्विक आर्थिक व्यवस्था के फैसलों में भी उचित स्थान मिलना चाहिए।
BRICS के फैसलों पर नजर रखने का प्रस्ताव
पीएम मोदी ने BRICS के कामकाज में निरंतरता और फैसलों को लागू करने के लिए एक नई व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने BRICS की निरंतरता और फैसलों के अमल की व्यवस्था बनाने की बात कही। इसके तहत संगठन के फैसलों और पहलों पर ट्रोइका के जरिए लगातार नजर रखी जा सकेगी।
उन्होंने एक सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया, जिसमें हर फैसले के साथ उससे जुड़े जिम्मेदार अधिकारी या संस्था, काम पूरा करने की समयसीमा और अब तक हुई प्रगति दर्ज की जा सके। इस व्यवस्था का मकसद BRICS के फैसलों को केवल बैठकों और घोषणाओं तक सीमित रखने के बजाय उनके अमल पर भी लगातार नजर रखना है।
भारत की BRICS अध्यक्षता का फोकस
पीएम मोदी ने कहा कि भारत की BRICS अध्यक्षता का आधार लोगों और मानवता को केंद्र में रखना है। उन्होंने मजबूती, नई सोच, सहयोग और टिकाऊ विकास को भारत की प्राथमिकताओं में शामिल बताया।
प्रधानमंत्री के मुताबिक भारत ने BRICS की अध्यक्षता के दौरान आम लोगों को संगठन की गतिविधियों से जोड़ने पर भी खास ध्यान दिया है। इस साल का सम्मेलन इसी सोच के साथ BRICS की आगे की भूमिका और वैश्विक व्यवस्था में विकासशील देशों की भागीदारी को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दे रहा है।
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