October 17, 2026

बच्चे इंटरनेट चला पाएंगे या नहीं? 18+ वाली बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Supreme Court on Internet: क्या 18 से कम उम्र के बच्चे इंटरनेट चला पाएंगे? सुप्रीम कोर्ट ने कहा- इंटरनेट बच्चों का भी मौलिक अधिकार है। पाबंदी से बच्चे असुरक्षित साइट्स पर जाएंगे।

SC on Children Internet Access: बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल और सोशल मीडिया अकाउंट की उम्र सीमा को लेकर चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि इंटरनेट का इस्तेमाल करने का अधिकार हर व्यक्ति को है, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं। सिर्फ उम्र के आधार पर बच्चों को इस अधिकार से पूरी तरह दूर नहीं रखा जा सकता है। हालांकि, कोर्ट ने ये भी माना कि बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने के लिए उम्र के हिसाब से सुरक्षा नियम जरूरी हैं। जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा...

बच्चों को भी इंटरनेट इस्तेमाल करने का अधिकार

जस्टिस जेबी पारदीवाला की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने 15 अक्टूबर को दिए गए फैसले में इंटरनेट इस्तेमाल करने के अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 19(1)(a) से जोड़ा। फैसले की कॉपी शनिवार को अपलोड की गई। कोर्ट ने कहा कि बोलने और अपनी बात रखने की आजादी में जानकारी हासिल करने और दूसरों तक जानकारी पहुंचाने का अधिकार भी शामिल है। यह अधिकार बच्चों को भी मिलता है। कोर्ट के मुताबिक, इंटरनेट बच्चों के लिए पढ़ाई, जानकारी और नए विचारों तक पहुंचने का अहम सोर्स है। खासकर दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए यह सीखने और जानकारी पाने का एकमात्र जरिया भी हो सकता है।

इंटरनेट पर पूरी तरह रोक लगाना सही नहीं- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इंटरनेट का मौजूदा माहौल बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। ऑनलाइन नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट से बच्चों को बचाने के लिए सुरक्षा उपाय जरूरी हैं। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट प्लेटफॉर्म की नाकामी के कारण बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर रखना सही तरीका नहीं है। सिर्फ पाबंदी लगाने से बच्चे इंटरनेट का इस्तेमाल बंद नहीं कर देंगे। वे दूसरी वेबसाइट और ऐसे प्लेटफॉर्म पर जा सकते हैं, जहां सुरक्षा के इंतजाम कमजोर हों। कोर्ट ने ये भी कहा कि अगर बच्चों को इंटरनेट इस्तेमाल करने पर डांट पड़ने का डर होगा, तो वे ऑनलाइन धमकी या गलत व्यवहार की जानकारी अपने माता-पिता और भरोसेमंद लोगों को देने से बच सकते हैं।

क्या 18 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया अकाउंट बना सकेंगे?

यs फैसला ऐसे समय में आया है जब सुप्रीम कोर्ट की ही एक दूसरी बेंच (CJI सूर्यकांत की अगुवाई में) बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सख्ती की बात कह चुकी है। उस मामले में केंद्र सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिया है कि वह जल्द ही आईटी नियमों में बदलाव करेगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चे खुद से (Independently) अपना सोशल मीडिया अकाउंट न खोल पाएं।

किस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिया फैसला?

सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी 'NGO Just Rights For Children Alliance' की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की। याचिका में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य ऑनलाइन सेवाओं पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री की पहचान करने और उसे हटाने की व्यवस्था मजबूत करने की मांग की गई थी। इसी मामले में कोर्ट ने इस सवाल पर विचार किया कि क्या बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए उन्हें पूरी तरह इंटरनेट और सोशल मीडिया से दूर रखना उचित होगा। कोर्ट ने साफ किया कि बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों के बीच संतुलन जरूरी है। उम्र के हिसाब से सुरक्षा उपाय किए जा सकते हैं, लेकिन बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर करना इसका एकमात्र समाधान नहीं है।

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