July 30, 2026

17 वर्षीय ईशान बजाज बने बदलाव की मिसाल, LGBTQIA+ युवाओं को रोजगार और कौशल विकास से जोड़ा | ishaan-bajaj-swayam-lgbtqia-youth-employment-skill-development-india

नई दिल्ली महज 17 वर्ष की उम्र में ईशान बजाज सामाजिक परिवर्तन की नई पहचान बनकर उभरे हैं। स्कूल में पढ़ाई के साथ उन्होंने युवाओं के नेतृत्व वाली पहल 'स्वयं' के माध्यम से LGBTQIA+ समुदाय के लिए मानसिक स्वास्थ्य, कौशल विकास, रोजगार और समान अवसरों की दिशा में उल्लेखनीय काम किया है। उनकी पहल का दायरा अब भारत से निकलकर 25 देशों तक पहुंच चुका है और सैकड़ों युवाओं को नई संभावनाओं से जोड़ने में मदद मिली है।

ईशान बजाज के नेतृत्व में 'स्वयं' संगठन ने विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों के LGBTQIA+ युवाओं पर फोकस किया है। संगठन अब तक करीब 200 युवाओं को स्किल ट्रेनिंग और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में सहयोग कर चुका है। इस पहल का उद्देश्य ऐसे युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है, जिन्हें अक्सर सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

भारत से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक बनाई पहचान

ईशान प्रतिष्ठित येल यंग ग्लोबल स्कॉलर्स (Yale Young Global Scholars) कार्यक्रम के प्रतिभागी भी रह चुके हैं। उन्होंने भारत के विभिन्न शहरों के अलावा फिलीपींस की राजधानी मनीला में भी प्राइड कार्यक्रमों का आयोजन किया। इन आयोजनों में प्रत्यक्ष रूप से 40 हजार से अधिक लोग शामिल हुए, जबकि ऑनलाइन लाखों लोगों ने भागीदारी की।

इसके अलावा पाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बांग्लादेश जैसे देशों में भी उन्होंने समावेशी युवा कार्यक्रमों की पहल कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद और सहयोग को बढ़ावा दिया।

'हमारी आवाज' अभियान से हजारों युवाओं को जोड़ा

ईशान बजाज ट्रांसजेंडर अधिकारों के समर्थन में चलाए जा रहे 'हमारी आवाज' अभियान का भी नेतृत्व कर रहे हैं। इस अभियान के माध्यम से देश के 25 शहरों में 30 हजार से अधिक लोगों को जागरूकता और सामाजिक समावेशन से जोड़ा गया है।

उनका मानना है कि समाज में समान अवसर और सम्मान तभी संभव है, जब युवाओं को नीति निर्माण और सामाजिक बदलाव की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी मिले।

संयुक्त राष्ट्र में भी रखी भारत के युवाओं की बात

ईशान के कार्यों को संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सराहा गया है। उन्होंने वैश्विक मंचों पर भारतीय युवाओं की भूमिका, समावेशी समाज और समान अधिकारों को लेकर अपने विचार प्रस्तुत किए हैं। उनका कहना है कि आज का युवा केवल बदलाव की मांग नहीं करता, बल्कि स्वयं नेतृत्व करते हुए समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता भी रखता है।

कम उम्र में सामाजिक नेतृत्व, रोजगार सृजन और समावेशी विकास की दिशा में किए गए उनके प्रयास नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। ईशान की पहल यह संदेश देती है कि यदि युवाओं को सही दिशा और अवसर मिले, तो वे समाज में व्यापक और स्थायी बदलाव ला सकते हैं।