September 11, 2026

17-साल पहले वोटिंग 11% बढ़ी तो कांग्रेस की सीटें बढ़ी: उदयपुर नगर निकाय में सरकार बनाने के लिए दोनों प्रमुख दलों की धड़कनें बढ़ीं - Udaipur News

उदयपुर नगर निगम के चुनाव में 220 प्रत्याशियों का सियासी भविष्य ईवीएम में कैद हो गया है। शहरी सरकार तय करने के लिए इस बार पिछले ​चुनाव 2019 से ज्यादा वोटिंग हुई है और यह करीब 12 फीसदी ज्यादा है। इसस पहले वोटिंग में 11% से ज्यादा का इजाफा 2009 में हुआ

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इसकी वजह से वोटिंग ने दोनों प्रमुख दलों की धड़कनें बढ़ा दी है। वोटिंग के साथ बीजेपी की चिंता परिणामों से ज्यादा मेयर और डिप्टी मेयर के चयन को लेकर हो गई है।

उदयपुर के 80 वार्डों में भाजपा ने पूरी ताकत लगाकर चुनाव लड़ा। भाजपा ने कहा कि सातवां बोर्ड में भी कमल खिलेगा। वहीं कांग्रेस ने कहा कि इस बार उदयपुर में भाजपा का किला ढहाएंगे।

उदयपुर नगर निगम के चुनाव में 2019 में 57.81 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि इस बार करीब 68.78 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग हुई।

17 साल पहले वोटिंग 11% बढ़ी तो कांग्रेस की सीटों में इजाफा हुआ

उदयपुर में हर बार भाजपा का ही बोर्ड रहा है। कांग्रेस का अब तक यहां खाता नहीं खुला है। इससे पहले वोटिंग प्रतिशत में इतना बड़ा उछाल 2009 में आया था। तब 2004 के मुकाबले शहर में 11 फीसदी ज्यादा वोटिंग हुई थी। 2004 में 50 वार्ड के लिए 50.15% वोटिंग हुई थी, इस चुनाव में भाजपा को एकतरफा जीत मिली और 36 वार्ड जीते, जबकि कांग्रेस 11 वार्ड पर जीती। वहीं, 2009 में 55 वार्ड के लिए वोटिंग का रिकॉर्ड 11 फीसदी बढ़कर 61.47% पहुंच गया। भारी वोटिंग के बाद बोर्ड तो भाजपा का ही बना, लेकिन 2004 के मुकाबले कांग्रेस की सीटें बढ़ गईं। इस चुनाव में भाजपा को 34 और कांग्रेस को 18 सीट मिली।

पहली बार वोट डालने नहीं आए गुलाबचंद कटारिया

उदयपुर शहर में पहली बार पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया वोट डालने नहीं आए, जबकि राज्यपाल बनने के बाद भी वे विधानसभा और लोकसभा चुनाव में यहां वोट डालने जरूर आए थे। यह भी एक चर्चा का विषय है।

शहर में परिणाम के नतीजों के साथ ही उनके दोनों दामाद के भाई अतुल चंडालिया और आकाश वागरेचा के वार्ड पर भी सबकी उत्सकुता बनी हुई है। हालांकि, दोनों जगह कांग्रेस के प्रत्याशियों के साथ कड़ा मुकाबला रहा है।

वहीं, ​पूर्व डिप्टी मेयर पारस सिंघवी, भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक प्रमोद सामर की जीत से सभी कार्यकर्ता पूरी तरह आश्वस्त है। पूर्व शहर अध्यक्ष दिनेश भटट के वार्ड में भी निर्दलीय प्रत्याशी ने आखिरी वक्त तक उनकी चिंता बढ़ा रखी, लेकिन उनका पलड़ा भारी दिख रहा है।

कांग्रेस के शहर जिलाध्यक्ष की पत्नी का पलड़ा भारी

इधर, कांग्रेस के शहर जिलाध्यक्ष फतहसिंह राठौड़ की पत्नी डा. पूनम कुंवर भी मुकाबले में भारी है। इस वार्ड में पत्नी को उतारने के बाद अध्यक्ष पूरे 80 वार्डों को कवर नहीं कर पाए और पत्नी के लिए दिन-रात एक किए। उनकी मेहनत का असर भी दिखा है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास के भाई की बहू डॉ. ​हितांशी शर्मा का पलड़ा भी भारी दिखा। वहीं पहली बार निगम में शामिल हुए तीन प्रमुख गांवों के वार्ड पूरी तरह चर्चा में रहे। बड़गांव के वार्ड 1 से भाजपा के छात्रसंघ नेता रहे दीपक शर्मा और पूर्व सरपंच कांग्रेस नेता संजय शर्मा के बीच कड़ा मुकाबला रहा। हालांकि, आखिरी दो दिनों में कांग्रेस भारी दिखी।

भाजपा की डॉ. कविता और कांग्रेस की इंद्रा डांगी के बीच टक्कर

बेदला के वार्ड 80 में भाजपा के मंडल अध्यक्ष और पूर्व उप प्रधान प्रताप सिंह राठौड़ कांग्रेस के योगेश पुष्करना आखिरी समय ताकत लगाते रहे। पलड़े में यहां भाजपा भारी नजर आई। वहीं शोभागपुरा वाले वार्ड 76 में भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. कविता जोशी और कांग्रेस की इंद्रा डांगी के बीच कांटे की टक्कर नजर आई और यहां परिणाम चौंकाने वाले हो सकते है।

पूर्व डिप्टी मेयर महेंद्र सिंह शेखावत भी वार्ड 75 में कड़े मुकाबले में फंसे रहे और यहां पर भी परिणाम को लेकर अलग-अलग तर्क आते रहे। पूर्व शहर भाजपा अध्यक्ष और पूर्व यूआईटी चेयरमैन रवींद्र श्रीमाली के भतीजे जतिन श्रीमाली की वार्ड 33 में की मेहनत जीत में बदलती नजर आ रही है।

भाजपा बाड़ाबंदी की तैयारी में जुटी, 80 प्रत्याशियों को होटल में ठहराया

इधर, मतदान के बाद भाजपा और कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों के साथ बैठकर जीत हार का गुणा भाग निकाल रहे हैं। दूसरी तरफ भाजपा ने अपने सभी 80 उम्मीदवारों को देर शाम एक होटल में बुलाया है, जहां से बाड़ाबंदी की तैयारी की जा रही है।

मेयर के दावेदार अपनी गणित में जुटे

भाजपा के मेयर के दावेदार प्रमोद सामर, दिनेश भट्ट, अतुल चंडालिया, पारस सिंघवी अपनी गणित बिठाने के लिए भी लॉबिंग को तेज कर दिया है। मेयर को लेकर पार्टी पार्षदों के साथ चर्चा करेगी और सर्वसम्मति से नाम का ऐलान करेगी, लेकिन ये नेता अपने नाम के लिए पूरी ताकत ​जयपुर से दिल्ली तक लगा रहे है।

दूसरी तरफ कांग्रेस भी बोर्ड बनाने के दावे के साथ पूनम कुंवर, हितांशी शर्मा रेस में आगे है, तो अरुण टांक पिछले बार की तरह इस बार भी मेयर के चुनाव को लेकर लॉबिंग कर रहे हैं।

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उदयपुर नगर निगम के 80 वार्डों में पार्षद चुनने के लिए मतदान जारी है। यहां दोपहर 3 बजे तक 52.13% मतदान हुआ। इस दौरान वार्ड नंबर 23 में हंगामा हो गया। यहां कांग्रेस समर्थकों के बूथ की निर्धारित सीमा के अंदर जाने पर भाजपा ने विरोध किया। पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए सभी को बाहर किया। (पूरी खबर पढ़ें…)