पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड से एसोसिएट स्कूल संचालकों को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिल गई। बोर्ड ने एसोसिएट स्कूलों के लिए 30 सितंबर तक एफिलिएशन लेने के लिए आवेदन जमा करने की डेडलाइन तय की थी।
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बोर्ड ने साफ कर दिया था कि स्कूल संचालकों ने अगर 30 सितंबर तक आवेदन फार्म जमा नहीं करवाने वाले स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया था। जिसके खिलाफ स्कूल संघ पंजाब ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
हाईकोर्ट ने बोर्ड के इस आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। कोर्ट के इस फैसले से पंजाब के 1650 एसोसिएट स्कूल संचालकों ने राहत की सांस ली है। कोर्ट ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के फैसले पर गंभीर टिप्पणियां भी की और कहा कि बोर्ड स्कूलों को इस तरह बंद नहीं कर सकता है।

कोर्ट ने अपने फैसले में कही ये मुख्य बातें, जानिए...
- अधिकारों का गलत इस्तेमाल: हाईकोर्ट ने कहा कि पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) द्वारा 22 मई 2026 को जारी आदेश में स्कूलों से नगर निगम या नगर पालिका के टाउन प्लानर से प्रमाणित नक्शा मांगना बोर्ड के अधिकारों का गलत इस्तेमाल लगता है।
- पुराने स्कूलों पर नई शर्तें थोपना गलत: कोर्ट ने साफ कहा कि जब ज़्यादातर एसोसिएट स्कूल 2013 से पहले से ही चल रहे हैं, तो इतने सालों बाद उनसे अचानक ऐसी शर्तें पूरी करने को कहने का कोई मतलब नहीं बनता।
- बोर्ड के फैसले पर लगाई स्टे: कोर्ट ने स्कूल संघ की दलीलों में पहली ही नज़र में दम माना और 22 मई वाले विवादित आदेश के लागू होने पर अगली सुनवाई तक अस्थाई रोक (स्टे) लगा दी। हाईकोर्ट ने इस अर्जी का निपटारा करते हुए मुख्य केस की अगली सुनवाई की तारीख 11 नवंबर 2026 तय की है।
स्कूल संचालकों ने याचिका में कही ये बातें, जानिए...
- बोर्ड का फैसला पूरी तरह मनमाना: स्कूल संघ पंजाब के महासचिव भुवनेश भट्ट ने बताया कि संगठन ने अपनी याचिका में कहा कि पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा 22 मई 2026 को जारी पत्र पूरी तरह गैर-कानूनी, मनमाना और बोर्ड के अधिकारों का दुरुपयोग है।
- 1650 स्कूलों के बंद होने का खतरा: याचिका में तर्क दिया गया कि अगर 30 सितंबर तक स्कूल आवेदन नहीं करते, तो 2028 में पंजाब के 1650 एसोसिएट स्कूलों पर ताले लटक जाएंगे। इससे लाखों बच्चों का भविष्य और पढ़ाई अधर में लटक जाएगी।
- 2013 से पहले से चल रहे हैं स्कूल: याचिकाकर्ताओं का कहना था कि राज्य में ज़्यादातर एसोसिएट स्कूल 4 अप्रैल 2013 से पहले से ही सफलतापूर्वक चल रहे हैं। ऐसे में इतने सालों बाद अचानक सीएलयू (CLU) और प्रमाणित नक्शे जैसी कठिन शर्तें थोपना नियम और इंसाफ के खिलाफ है।
- स्टाफ और बच्चों पर असर: संघ ने कोर्ट को बताया कि अगर बोर्ड के इस आदेश पर तुरंत रोक न लगाई गई, तो न केवल स्कूल बंद होंगे, बल्कि इनमें काम करने वाले हज़ारों शिक्षकों व कर्मचारियों की रोजी-रोटी छीन जाएगी।