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दुर्ग-भिलाई3 घंटे पहले
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बाल श्रम और बच्चों की तस्करी की आशंका के बीच दुर्ग बस स्टैंड से 16 बच्चों के रेस्क्यू के मामले में अब तक किसी जिम्मेदार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू नहीं हो सकी है। रेस्क्यू के दो दिन बाद भी न तो पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है और न ही बाल कल्याण समिति (CWC) की रिपोर्ट पद्मनाभपुर थाने पहुंची है।
जिस व्यक्ति को बच्चों को लेने के लिए बस स्टैंड पर हिरासत में लिया गया था, उसे भी पूछताछ और बयान लेने के बाद छोड़ दिया गया।
मामले में चाइल्ड हेल्पलाइन, महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस की कार्रवाई फिलहाल एक-दूसरे की रिपोर्ट और प्रक्रिया का इंतजार करती नजर आ रही है। शुरुआती जांच में जब बच्चों को काम के लिए ले जाने की बात सामने आई थी, इसके बावजूद अब तक किसी के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया गया है।

चाइल्ड हेल्पलाइन के जिला परियोजना समन्वयक चंद्रप्रकाश पटेल ने बताया कि विभाग की ओर से आगे की प्रक्रिया महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस स्तर पर होगी। अपराध दर्ज करने या कानूनी कार्रवाई का निर्णय संबंधित थाना और सक्षम प्राधिकारी करेंगे।
DPO बोले- नाबालिगों की रिपोर्ट भेजी, बाकी कार्रवाई पुलिस की
जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) राजकुमार जांबुलकर ने बताया कि सातों नाबालिग बच्चों की सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट (SIR) तैयार कर भेजी गई है। रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार उन्हें परिजनों को सुपुर्द करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उन्होंने कहा कि आगे की आपराधिक कार्रवाई पुलिस के अधिकार क्षेत्र का विषय है।

पुलिस बोली- CWC की रिपोर्ट नहीं मिला, उसी के आधार पर होगी कार्रवाई
पद्मनाभपुर थाना प्रभारी प्रमोद रूसिया ने बताया कि अब तक बाल कल्याण समिति या महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। उनके अनुसार CWC न्यायिक शक्तियों वाली संस्था है और उसके प्रतिवेदन व निर्देश के आधार पर ही आगे अपराध दर्ज करने या अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
थाना प्रभारी ने यह भी पुष्टि की कि बस स्टैंड पर बच्चों को रिसीव करने पहुंचे व्यक्ति से पूछताछ की गई थी। उसका बयान दर्ज करने के बाद उसे छोड़ दिया गया। पुलिस का कहना है कि फिलहाल मामले में रिपोर्ट मिलने का इंतजार किया जा रहा है।
रेस्क्यू के वक्त सामने आए थे कई गंभीर तथ्य
बता दें कि राज्य बाल आयोग की सूचना पर चाइल्ड हेल्पलाइन, एसजेपीयू और पुलिस की संयुक्त टीम ने दुर्ग बस स्टैंड से रायपुर पासिंग बस में सवार 16 बच्चों को रेस्क्यू किया था।
शुरुआती पूछताछ में बच्चों ने बताया था कि उन्हें काम दिलाने के नाम पर लाया गया था। कुछ बच्चों ने उत्तर प्रदेश में 15 हजार रुपए मासिक वेतन का झांसा दिए जाने की बात कही थी, जबकि कुछ ने मशरूम फैक्ट्री में काम कराने की जानकारी दी थी। जांच में सात बच्चे नाबालिग पाए गए थे।
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दुर्ग बस स्टैंड से 16 बच्चों का रेस्क्यू
दुर्ग में बाल श्रम और बच्चों की तस्करी की आशंका के बीच बड़ी कार्रवाई की गई। राज्य बाल आयोग से मिली सूचना के बाद चाइल्ड हेल्पलाइन, स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट (SJPU) और पुलिस की संयुक्त टीम ने दुर्ग बस स्टैंड पर एक बस से 16 बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया। पढ़ें पूरी खबर…
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