August 22, 2026

चीन पहुंचे भारत के 16 व्यापारी, फिर भी कारोबार बंद: नया सामान ले जाने की नहीं मिली परमिशन, गुंजी में व्यापारियों को करोड़ों का माल फंसा - Pithoragarh News

चीन ने पहले दावा किया था कि मंडी में व्यवस्था नहीं है इसलिए व्यापारियों को परमिशन नहीं दी गई।

6 साल बाद लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन सीमा व्यापार शुरू होने की उम्मीद जगी तो सीमांत क्षेत्र के व्यापारियों ने लाखों-करोड़ों रुपए का माल खरीदकर गुंजी पहुंचा दिया। लेकिन व्यापार शुरू होते ही नई परेशानी खड़ी हो गई। चीन ने पहले चरण में सिर्फ उन्हीं व्यापा

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इन 16 व्यापारियों को भी नया माल लेकर जाने की अनुमति नहीं मिली। अब तकलाकोट पहुंचे व्यापारी कारोबार करने के बजाय अपने पुराने सामान की स्थिति देखने और आगे की अनुमति का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर गुंजी में 50 से ज्यादा व्यापारी चीन की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।

सबसे बड़ी चिंता यह है कि व्यापार का सीजन जून से अक्टूबर तक ही रहता है। अगस्त खत्म होने को है और व्यापारियों का करोड़ों रुपए का माल गुंजी में रखा है। लगातार बारिश और खराब मौसम में सामान खराब होने का डर है। ऐसे में अनुमति में और देरी हुई तो छह साल बाद शुरू हुआ व्यापार इस साल भी उम्मीद के मुताबिक नहीं चल पाएगा।

चीन में स्थित मंडी में बिना सामान के बैठे व्यापारी।

चीन में स्थित मंडी में बिना सामान के बैठे व्यापारी।

पुराने माल वाले 16 व्यापारियों को ही पहले भेजा

साल 2019 में व्यापार बंद होने के बाद कई भारतीय व्यापारियों का सामान तकलाकोट मंडी में ही रह गया था। चीन ने पहले चरण में करीब 16 ऐसे व्यापारियों को सीमा पार करने की अनुमति दी है।

व्यापारियों को उम्मीद थी कि इस बार मंडी खुलने पर वे पुराना माल निकालने के साथ नया सामान भी लेकर जाएंगे। लेकिन चीन की ओर से नए माल के साथ जाने की अनुमति नहीं दी गई। इससे व्यापारी तकलाकोट पहुंचकर भी नया कारोबार शुरू नहीं कर पा रहे हैं।

छह साल बाद भी वही इंतजार

लिपुलेख व्यापार सिर्फ खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है। यह पिथौरागढ़ के सीमांत इलाके में रहने वाले रं समाज की पुरानी आर्थिक गतिविधि है। व्यापार बंद रहने के छह साल में स्थानीय कारोबारियों को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ।

इस साल व्यापार खुलने की उम्मीद में कई व्यापारियों ने अपनी जमा पूंजी लगाई और कुछ ने उधार लेकर सामान खरीदा। अब सामान गुंजी पहुंच चुका है, लेकिन चीन की मंजूरी नहीं मिलने से पैसा माल के रूप में अटका हुआ है।

गुंजी में 50 से ज्यादा व्यापारी इंतजार में

तकलाकोट जाने के लिए 50 से ज्यादा व्यापारी अब भी गुंजी में हैं। उन्होंने चीन को भेजे जाने वाला सामान पहले ही वहां पहुंचा दिया है।

इसमें गुड़, मिश्री, कॉस्मेटिक और दूसरे व्यापारिक सामान शामिल हैं। व्यापारियों के मुताबिक कई सामान लंबे समय से खुले या अस्थायी इंतजाम में रखा है। बारिश के कारण सामान खराब होने का खतरा बढ़ रहा है।

व्यापारियों की परेशानी इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि उन्हें यह साफ नहीं बताया गया है कि चीन की ओर से सभी व्यापारियों को कब अनुमति मिलेगी।

गुंजी में व्यापारियों का करोड़ों का सामान डंप है।

गुंजी में व्यापारियों का करोड़ों का सामान डंप है।

नई मंडी के कारण पहले ही दो बार टला व्यापार

व्यापार शुरू होने की तैयारी जून से ही चल रही थी। भारतीय व्यापारी अपना सामान लेकर सीमांत क्षेत्र तक पहुंच गए थे, लेकिन तकलाकोट में चीन की ओर से नई मंडी, गोदाम, दुकान और रहने की व्यवस्था पूरी नहीं होने के कारण शुरुआत टलती रही।

जुलाई में भी भारतीय व्यापारियों को सीमा पार करने की अनुमति नहीं मिल सकी। बाद में अगस्त से व्यापार शुरू करने पर सहमति बनी। अब पहले दल को तकलाकोट जाने की अनुमति तो मिली, लेकिन सभी व्यापारियों को सामान के साथ प्रवेश नहीं दिया गया।

व्यापारी पूछ रहे- मंडी तैयार है तो रोक क्यों?

व्यापारियों का कहना है कि अगर तकलाकोट में नई मंडी और दूसरी जरूरी सुविधाएं तैयार हो चुकी हैं तो सभी पंजीकृत व्यापारियों को एक साथ अनुमति मिलनी चाहिए।

उनका कहना है कि छह साल बाद व्यापार खुलने से पहले ही उन्होंने बड़ी रकम लगा दी। अब अनुमति नहीं मिलने से उनकी पूंजी फंसी हुई है। व्यापारियों को डर है कि सीजन खत्म होने तक अगर कारोबार शुरू नहीं हुआ तो इस साल का नुकसान भी उनके हिस्से आएगा।

केंद्रीय मंत्री से बात करेंगे व्यापारी

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा ने व्यापारियों की समस्या पर बातचीत करने की बात कही है। व्यापारियों को उम्मीद है कि केंद्र सरकार चीन के संबंधित अधिकारियों के सामने यह मामला उठाएगी।

व्यापारियों की मांग है कि सभी पात्र व्यापारियों को जल्द सीमा पार करने की अनुमति दी जाए, ताकि वे अपना सामान तकलाकोट ले जा सकें। अगर अगस्त के अंत तक मंजूरी नहीं मिली तो इस साल के व्यापार सीजन का बड़ा हिस्सा निकल जाएगा।

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