
बीरा 91 को बचाने का नया प्लान
Bira 91 Crisis: भारत में क्राफ्ट बियर के शौकीनों के बीच बीरा 91 एक जाना-माना नाम है. लेकिन बीते कुछ समय से ये कंपनी गहरे वित्तीय संकट से गुजर रही है. अब इस डूबती हुई कंपनी को बचाने के लिए इसके सबसे बड़े कर्जदाता एनि कट कैपिटल (Anicut Capital) ने कमान अपने हाथों में ले ली है. एनि कट कैपिटल के नेतृत्व वाले नए बोर्ड ने बीरा 91 में नई जान फूंकने के लिए एक बड़ा रीकैपिटलाइजेशन प्लान तैयार किया है. इस प्लान के तहत कंपनी के मौजूदा बड़े निवेशकों को बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी चल रही है ताकि कंपनी में नई पूंजी लाई जा सके.
बीरा 91 पर मंडराता भारी संकट
बीरा 91 की वित्तीय स्थिति इस वक्त बेहद खराब दौर से गुजर रही है. कंपनी पर करीब 1,000 से 1,500 करोड़ रुपये की भारी देनदारी है. पिछले एक साल से कंपनी का कामकाज पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है. हालात इतने खराब हो गए कि बीरा 91 के फाउंडर अंकुर जैन को बीती 22 जुलाई को कंपनी से इस्तीफा देना पड़ा. दो साल लंबे चले विवाद, रुकी हुई सैलरी के साथ बढ़ते कर्ज के कारण उन्होंने अपने परिवार समेत बोर्ड से दूरी बना ली. अंकुर जैन की 17.8 प्रतिशत हिस्सेदारी को कंपनी के सबसे बड़े कर्जदाता एनि कट कैपिटल ने टेकओवर कर लिया. इसके बदले जैन परिवार को कंपनी के प्रति सभी व्यक्तिगत देनदारियों से मुक्त कर दिया गया. उनके शेयर एनि कट कैपिटल द्वारा दिए गए लोन के लिए सिक्योरिटी के तौर पर रखे गए थे. आज के समय में बीरा 91 की ब्रांड वैल्यू महज 300 करोड़ रुपये के आसपास आंकी जा रही है.
पुराने निवेशकों को बाहर करने की तैयारी
कंपनी को फिर से खड़ा करने के लिए नए फंड्स की सख्त जरूरत है. लेकिन नए निवेशक, जिनमें फैमिली ऑफिस या प्राइवेट इक्विटी फर्में शामिल हैं, उनकी एक बड़ी शर्त है. वे चाहते हैं कि पैसा लगाने से पहले उन पुराने निवेशकों को बाहर किया जाए जो इस रिवाइवल प्लान में शामिल नहीं होना चाहते. फिलहाल कंपनी में जापान की किरिन होल्डिंग्स, पीक एक्सवी पार्टनर्स (Peak XV) के साथ बेल्जियम की सोफिना (Sofina) की कुल मिलाकर 41.1 प्रतिशत हिस्सेदारी है. इसके अलावा हाई नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) के साथ कुछ फैमिली ऑफिस के पास भी छोटी हिस्सेदारी है. सूत्र बताते हैं कि 20.1 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली जापानी कंपनी किरिन होल्डिंग्स ने अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए ग्लोबल फर्म EY को नियुक्त भी कर लिया है. किरिन साल 2021 में लंबे विजन के साथ कंपनी से जुड़ी थी, लेकिन अपनी ग्लोबल रणनीति के तहत अब वो बाहर निकलना चाहती है.
कर्जदाताओं को उठाना पड़ेगा नुकसान
कंपनी को संकट से निकालने की इस प्रक्रिया में वित्तीय कर्जदाताओं को भी बड़ा झटका लगने वाला है. ट्राइफेक्टा कैपिटल, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक सहित किरिन होल्डिंग्स जैसे लेनदारों को सेटलमेंट के ऑफर दिए गए हैं. एक सूत्र के मुताबिक, ये सभी ऑफर वैल्यूएशन पर सहमति बनने पर निर्भर करते हैं. वित्तीय कर्जदाताओं को अपने दिए गए लोन का एक बड़ा हिस्सा बट्टे खाते (write-off) में डालना पड़ेगा. उम्मीद जताई जा रही है कि उन्हें अपनी कुल दी गई रकम का बमुश्किल पांचवां हिस्सा (करीब 20 प्रतिशत) ही वापस मिल पाएगा. हालांकि, रिवाइवल प्लान के लिए सभी का साथ आना जरूरी है. बोर्ड की कमान सबसे बड़े कर्जदाता के हाथों में होने से अन्य हितधारकों का भरोसा भी बढ़ा है.
वेंडर्स के सामने रखा गया नया प्रस्ताव
कंपनी को दोबारा पटरी पर लाने के लिए हर पक्ष को साथ लेकर चलने की कोशिश हो रही है. बीरा 91 ने अपने करीब 60 बड़े वेंडर्स से भी संपर्क किया है. इन वेंडर्स से कहा गया है कि वे अपने बकाए का सेटलमेंट करें, साथ ही कंपनी को अपनी सेवाएं देना जारी रखें ताकि कामकाज फिर से शुरू हो सके. हालांकि इस पूरे मामले पर एनि कट कैपिटल, किरिन, पीक एक्सवी समेत किसी भी कंपनी ने आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है, जबकि ट्राइफेक्टा कैपिटल के साथ आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने भी फिलहाल चुप्पी साधी हुई है.

विभव शुक्ला
विभव शुक्ला वर्तमान में TV9 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर बिजनेस डेस्क पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता में उन्हें छह वर्षों का अनुभव है. विभव मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी. इसके बाद वह Inshorts और गुजरात फर्स्ट जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े रहे हैं.
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