जोधपुर4 घंटे पहले
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पश्चिमी राजस्थान के किसानों के लिए खजूर की खेती उन्नति का नया जरिया बन रही है। यहां के किसान अनार के बाद अब खजूर की तरफ भी रुख कर रहे हैं। पहले गुजरात के कच्छ क्षेत्र को खजूर का हब माना जाता था। अब इसमें पश्चिमी राजस्थान में भी इसकी खेती होने लगी है। खास बात यह है कि खजूर का पौधा यहां के खारे पानी में भी लग जाता है।
जोधपुर के केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान काजरी में गुजरात केआनंद कृषि विश्वविद्यालय से साल 2015 में एडीपी 1 किस्म के पौधे लाकर इन पर रिसर्च शुरू किया गया। इसके अच्छे परिणाम आए तो इसको लेकर किसानों को जागरूक किया गया। अब किसान काजरी से इसकी जानकारी लेकर खजूर की खेती कर रहे हैं।

शहर में काजरी के पास लगी रेहड़ी खजूर खरीदते शहरवासी।
वातावरण के अनुकूल पौधा काजरी के वैज्ञानिक डॉ. धीरज सिंह ने बताया- खजूर के लिए यदि यहां की जलवायु या पानी को देखा जाए तो मेरे ख्याल से पश्चिमी राजस्थान के लिए खजूर पूर्ण रूप से अनुकूल फल है। इसके उदाहरण के रूप में देख सकते हैं कि संपूर्ण जोधपुर से लेकर बाड़मेर, जैसलमेर तक किसानों का रुझान और इसकी खेती निरंतर बढ़ रही है।
जितने भी फलदार वृक्ष हैं,पौधे हैं उनमें खजूर सबसे ज़्यादा नमकीन पानी और वातावरण के लिए अनुकूल है। जहाँ तक जलवायु की बात है तो खजूर एक ऐसा पौधा है जो जड़ों में पानी और सिर के ऊपर सूर्य अगर हो तो सबसे ज़्यादा उत्पादन देता है। राजस्थान में मूल रूप से जो स्टेट गवर्नमेंट की मान्यता प्राप्त नर्सरी हैं वो खास तौर पर वरही, मेघजुल, अल्लावी जैसी कई किस्मों के पौधे बेचती हैं
एक हैक्टेटर में लग सकते हैं 156 पौधे उन्होंने बतया कि टिश्यूकल्चर पौधे का मूल्य 3500 से 5 हजार रुपये है। यह मूल्य पौधे की पौधा किस्म पर निर्भर करता है। इसमें आठ गुणा आठ मीटर की स्पेसिंग पर पौधों को लगाया जाता है। इस हिसाब से एक हेक्टयर में 156 पौधे लगाए जा सकते हैं। 6 से 8 साल बाद एक पौधा औसतन 120 किलोग्राम फल भी देता है। साधारण रूप से अगर उसको बाजार मूल्य सौ रुपये प्रति किलो भी मिल जाता है तो बारह से लेकर पंद्रह लाख रुपये तक की आमदनी किसान बड़ी आसानी से इससे कर सकता है।

खजूर के एक पौधे से सालाना 150 से 180 किलोग्राम फल (खजूर) प्राप्त किए जा सकते हैं।।
खजूर बड़ी आयु का पौधा
खजूर तीन वर्ष के बाद फल देना शुरू करता है। प्रारंभिक अवस्था में इसका फल थोड़ा कम उपज देता है परंतु जैसे-जैसे इसकी आयु बढ़ती जाती है इसकी उपज बढ़ती जाती है और बारह से लेकर चौदह वर्ष का पौधा 150 से 180 किलोग्राम फल (खजूर) प्रति वृक्ष दे सकता है। खजूर एक बड़ी आयु का पौधा माना जाता है और साधारण रूप में यह लेकर चालीस से लेकर पचास वर्ष तक फल देता है।
डॉ. धीरज सिंह ने बताया कि काजरी में खजूर के सीजन में पंद्रह से बीस किसान रोजाना हमारे इसकी खेती देखने, इसके बारे में जानकारी लेने तथा इसके पौधों की उपलब्धता के बारे में जानकारी लेने आते हैं। पिछले कुछ वर्षों में किसानों का बहुत तेजी से इसके लिए रुझान बढ़ा है। इसका मूल कारण शायद यह हो सकता है कि पश्चिमी राजस्थान की जमीन में पानी की जो क्वालिटी है,थोड़ी खराब है, पानी खारा है और गर्मी बहुत ज्यादा होती है । यह दोनों चीजें इस पौधे को पश्चिमी राजस्थान के लिए बड़ा अनुकूल पौधा बनाती हैं।
जुलाई से सितंबर है पौधा लगाने का सही समय
साधारण तौर पर इसको लगाने का सही समय जुलाई से सितंबर तक होता है। तीन साल बाद यह फल देना शुरू कर देता है। इसमें मेल और फीमेल पौधे अलग-अलग होते हैं। हम सलाह देते हैं कि किसान प्रति 10 पौधे के बीच में एक मेल पौधा लगाए। यदि किसी किसान के पास मेल (नर) पौधे की सुविधा नहीं है तो इसका पोलन है, वह 10 से 12 हजार रुपए किलो में मिलता है, तो आर्टिफिशियल पोलिनेशन करके अच्छी गुणवत्ता के फल प्राप्त कर सकते हैं।
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