4 अप्रैल 2021 को बेगूसराय के वीरपुर थाना क्षेत्र के मुजफ्फरा स्थित कस्तूरबा गांधी रेसिडेंशियल स्कूल की वार्डन की लाश मिली थी। शुरुआत में इसे आत्महत्या बताया गया। मामला पटना हाईकोर्ट पहुंचा। इसके बाद हाईकोर्ट ने 8 अप्रैल 2026 पहली बार किसी आईपीएस का न
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इससे पहले बेगूसराय की वीरपुर थाने की पुलिस ने इसे आत्महत्या करार देकर मामले को फाइलों में दफन कर दिया था। पुलिस ने 31 अक्टूबर 2021 को फाइनल रिपोर्ट सौंपी थी। लेकिन मृतका की बेटी तेजस्वी कुमारी उर्फ मोनी कुमारी ने हार नहीं मानी। अपनी मां को न्याय दिलाने के लिए वो पटना हाईकोर्ट पहुंची।
विकास वैभव और उनकी SIT टीम की जांच में सामने आया कि जिस केस को पंखे से लटककर खुदकुशी बताया गया था, वो 15 लाख रुपए के लेनदेन में की गई हत्या है।
SIT ने वैज्ञानिक साक्ष्यों, फॉरेंसिक री-इवेल्यूएशन, हैंडराइटिंग मैच, पेन ड्राइव, सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल टावर लोकेशन के जरिए 16 सितंबर को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया गया है।
कस्तूरबा गांधी रेसिडेंशियल स्कूल की वार्डन की मौत का क्या मामला था? विकास वैभव की टीम ने कैसे 60 दिनों में आत्महत्या को हत्या करार दिया? विकास वैभव की टीम में कौन-कौन शामिल थे? पढ़िए पूरी रिपोर्ट।
सबसे पहले विकास वैभव की 'स्पेशल 6' टीम की 3 तस्वीरें देखिए

पटना हाईकोर्ट की ओर से जांच सौंपे जाने के बाद विकास वैभव और इनकी एसआईटी में शामिल 6 अधिकारियों ने क्राइम सीन पर दोबारा पड़ताल शुरू की थी।

जिस कस्तूरबा गर्ल्स रेसिडेंशियल स्कूल में रिंकू की लाश मिली थी, विकास वैभव और उनकी टीम ने उस स्कूल में क्राइम सीन को रिक्रिएट भी किया था।

स्कूल की बिल्डिंग में जाती विकास वैभव की टीम।
अब सबसे पहले हत्या के मोटिव को समझिए
SIT की जांच में ये बात सामने आई कि वारदात की वजह 15 लाख रुपए का विवाद था। वार्डन रिंकू कुमारी ने अपने ही गांव असुरारी के रहने वाले आरोपी कौशल कुमार को जमीन खरीदने के लिए किश्तों में लगभग 15 लाख रुपए दी थी। कौशल कुमार न तो जमीन की रजिस्ट्री कर रहा था और न ही पैसे वापस लौटा रहा था। रिंकू कुमारी लगातार उस पर अपनी रकम वापस करने या जमीन रजिस्ट्री करने का दबाव बना रही थी।
SIT ने जांच के दौरान मृतका के हैंडबैग से एक नोटबुक जब्त की। इस नोटबुक के पन्नों पर रिंकू कुमारी ने कौशल कुमार को दिए एक-एक रुपए का हिसाब दर्ज कर रखी थी। इतना ही नहीं, घटना से ठीक एक दिन पहले 3 अप्रैल 2021 रिंकू कुमारी ने कौशल कुमार को चेतावनी देते हुए एक पत्र भी लिखा था।
FSL ने इस लिखावट का मिलान मृतका के प्रामाणिक हस्ताक्षरों से किया, तो विशेषज्ञ ने पुष्टि की कि ये हैंडराइटिंग रिंकू कुमारी की ही है। इस साक्ष्य ने साबित कर दिया कि घटना के ठीक पहले दोनों के बीच पैसों को लेकर तनाव था और आरोपी के पास हत्या करने का मजबूत उद्देश्य मौजूद था।

4 अप्रैल की सुबह की पूरी कहानी
चश्मदीदों के बयान से बेनकाब हुए कातिल
SIT ने आईपीसी की धारा- 161 और धारा- 164 के तहत कई स्वतंत्र गवाहों और प्रत्यक्षदर्शियों के न्यायिक बयान दर्ज कराए। प्रत्यक्षदर्शी जितेन्द्र कुमार साह ने अपने बयान में बताया कि 4 अप्रैल 2021 की सुबह लगभग 6:15 बजे उसने रिंकू कुमारी को कौशल कुमार के साथ बाइक पर बीहट हाल्ट के पास बेगूसराय की ओर जाते देखा था। वो दोनों एक-दूसरे को पहले से जानते थे। एक अन्य गवाह ने सुबह 6:30 बजे मुजफ्फरा स्टैंड के पास दोनों को देखा था।

स्कूल परिसर में संदिग्ध की एंट्री
एक प्रत्यक्षदर्शी ने बयान दिया कि 4 अप्रैल की सुबह करीब 7:30 बजे उसने एक व्यक्ति को आसमानी रंग की शर्ट, जूते और कंधे पर बैग लटकाए कस्तूरबा विद्यालय के मुख्य द्वार से अंदर जाते देखा था। उस वक्त स्कूल का मुख्य दरवाजा खुला था।
दोपहर 2:00 बजे स्थानीय लोगों के बीच हड़कंप मचा कि मैडम का शव कमरे में लटक रहा है। 29 जुलाई 2026 को SIT की ओर से जब गवाहों के सामने तस्वीरें रखी गई, तो उन्होंने मुख्य आरोपी कौशल कुमार और कस्तूरबा स्कूल के गार्ड अजीत कुमार उर्फ बबलू की पहचान की।

मुजफ्फरा के कस्तूरबा गांधी गर्ल्स रेसिडेंशियल स्कूल में जहां रिंकू की लाश लटकी मिली थी, वहां एसआईटी की टीम ने क्राइम सीन को रिक्रिएट किया था।

एसआईटी टीम को लीड कर रहे विकास वैभव और उनकी टीम ने कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल की छत पर जाकर पूरे कैंपस की जांच की थी।
फॉरेंसिक री-इवेल्यूएशन और मेडिकल बोर्ड का खुलासा
शुरुआती पुलिस जांच में दावा किया गया था कि रिंकू कुमारी ने पंखे से लटककर आत्महत्या की। लेकिन SIT ने जब घटनास्थल के फोटोग्राफ्स, प्रयुक्त रस्सी, पंखे की ऊंचाई, चौकी व कुर्सी की दूरी और गर्दन के निशानों का वैज्ञानिक पुनर्मूल्यांकन कराया, तो आत्महत्या का थ्योरी पूरी तरह गलत साबित हुई।
फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि शव के गर्दन पर पाए गए लिगेचर मार्क और खरोंच के निशान साधारण फांसी के नहीं थे। ये निशान इस बात का संकेत दे रहे थे कि पीड़िता ने अपनी जान बचाने के लिए कड़ा संघर्ष किया था।
मेडिकल बोर्ड का अंतिम निष्कर्ष… दम घुटने से हुई मौत
SIT की पहल पर बेगूसराय सिविल अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों का एक विशेष मेडिकल बोर्ड गठित किया गया। 22 जुलाई 2026 को मेडिकल बोर्ड ने अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी, जिसमें स्पष्ट कहा गया कि रिंकू की मौत का कारण एस्फिक्सिया यानी दम घुटना हुआ और रस्सी से गला दबाकर हत्या की संभावना को नकारा नहीं जा सकता है।

मृतका की बेटी याचिकाकर्ता तेजस्विनी ने बेगूसराय पुलिस के खिलाफ अपनी मां की मौत के मामले को पटना हाईकोर्ट लेकर पहुंची थी।
CDR, टावर लोकेशन और पेन ड्राइव ने खोली पोल
आरोपी कौशल कुमार ने पुलिस को गुमराह करने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन डिजिटल फुटप्रिंट्स से वो पकड़ा गया। SIT ने कौशल कुमार के मोबाइल नंबर के CDR और सेल-आईडी टावर लोकेशन का विश्लेषण किया गया।
1 अप्रैल से 4 अप्रैल 2021 के बीच का डेटा निकाला गया। इस डेटा के अनुसार, घटना के दिन और समय पर आरोपी की मौजूदगी घटनास्थल और उसके आसपास थी। वारदात को अंजाम देने के बाद वह अपने घर की दिशा में भागा था।
एसपी कार्यालय में सुरक्षित पेन ड्राइव से 58 वीडियो फाइलें बरामद हुई। फुटेज के वैज्ञानिक विश्लेषण से पता चला कि स्कूल के सीसीटीवी कैमरे को एक तय समय अवधि में साजिश के तहत बंद किया गया था। इसी ब्लैकआउट अवधि के दौरान कातिल स्कूल में घुसे और वारदात को अंजाम देकर निकल गए।

मां रिंकू देवी की तस्वीर के साथ उनकी बेटी तेजस्विनी। तस्वीर में दिख रहा है कि रिंकू देवी की लाश जमीन पर बैठी हुई अवस्था में थी।
पुराने थानेदार की संदिग्ध भूमिका, केस में लीपापोती की खुली परतें
SIT की जांच रिपोर्ट में 2021 में जांच करने वाले तत्कालीन थानाध्यक्ष सह अनुसंधानकर्ता (IO) की घोर लापरवाही सामने आया है। SIT ने पाया कि पूर्व अनुसंधान में जानबूझकर केस को कमजोर करने और आरोपियों को बचाने की कोशिश की गई।
घटनास्थल की फोटोग्राफी/वीडियोग्राफी तो कराई गई, लेकिन उन तस्वीरों को केस डायरी में संलग्न नहीं किया गया। फॉरेंसिक टीम की प्राथमिक रिपोर्ट में ही स्ट्रैंगुलेशन और हत्या के संकेत दिए गए थे, लेकिन तत्कालीन IO ने इस बिंदु पर जांच आगे बढ़ाने के बजाय फाइल दबा दी थी।
मृतका का टिफिन बॉक्स, हैंडबैग और घटना में प्रयुक्त रस्सी की विधिवत जब्ती सूची नहीं बनाई गई। मृतका का मोबाइल फोन बिना किसी जब्ती सूची दर्ज किए हफ्तों तक पुलिस सुरक्षा में अवैध रूप से रखा गया।

मौत से पहले रिंकू देवी ने कौशल को चेतावनी देते हुए एक चिट्ठी लिखी थी।
विकास वैभव की स्पेशल 6 में शामिल थे ये अधिकारी
पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित इस हाई-प्रोफाइल SIT का नेतृत्व मगध रेंज के आईजी विकास वैभव (IPS) ने किया। इस स्पेशल टीम में बेगूसराय के डीआईजी शैलेश कुमार सिन्हा, विशेष निगरानी इकाई बिहार के DSP अशोक कुमार झा, पूर्व मुजफ्फरपुर-1 DSP) अलय वत्स, बगहा DSP निहार भूषण, इंस्पेक्टर कुमार अभिनव एवं अमित कुमार को शामिल किया था।
16 सितंबर को कोर्ट में दाखिल चार्जशीट के साथ ही अब आरोपियों के खिलाफ न्यायिक ट्रायल (Trial) की प्रक्रिया शुरू होगी।
आत्महत्या-हत्या की गुत्थी को विकास वैभव ने कैसे सुलझाया?
आईजी विकास वैभव ने दैनिक भास्कर को बताया कि इस केस में इन्वेस्टिगेशन बहुत ही चुनौतीपूर्ण था। घटना के पांच साल गुजर चुके थे। ऐसे में कोई नया एविडेंस मिलता नहीं है। लेकिन जैसे ही SIT का गठन कर हम लोगों ने अपील की, कुछ प्रत्यक्षदर्शी आए और पूरी कहानी बयां की।
विकास वैभव ने बताया कि केस को सुसाइड बताया गया था, जबकि FSL की टीम ने गला घोंटकर मौत बताया था। हम लोगों को घटनास्थल से जुड़े कुछ फोटोग्राफ्स और वीडियो मिले। एक वीडियो में मृतका की आधी बॉडी जमीन से टिकी थी, सामान्य रूप से ये हैंगिंग नहीं हो सकता।
उन्होंने बताया कि मौत के समय रिंकू ने टिफिन खोल कर खाना शुरू किया था। कोई जब आत्महत्या करने जाएगा तो उस समय खाना खाने की बात नहीं सुझेगी। घटनास्थल पर कुर्सी गिरी हुई थी। इससे स्पष्ट हो गया था कि आत्महत्या नहीं थी।

विकास वैभव बोले- तत्कालीन थानेदार पर कार्रवाई के लिए लिखा गया है
विकास वैभव ने बताया कि डॉक्टर से पूछताछ में भी स्पष्ट हुआ कि मारकर लटकाया गया है। मेडिकल बोर्ड ने भी हत्या की पुष्टि कर दी। मृतका की लिखी चिट्ठी मिली तो उसकी जांच की गई, हैंडराइटिंग एक्सपर्ट ने भी चिट्ठी को सही बताया। टेक्निकल एविडेंस और आरोपी के बयान लिए गए, जिसके बाद हम लोगों ने चार्जशीट दाखिल कर दी। स्पीडी ट्रायल का अनुरोध भी किया गया है।
आईजी ने बताया कि तत्कालीन थानेदार ने अनदेखी की, मृतका की बेटी की बात नहीं सुनी गई। रिंकू की लाश के साथ लटकी रस्सी को भी जब्त नहीं किया गया था।
तत्कालीन थानेदार पर भी कार्रवाई करने के लिए लिखा गया है, क्योंकि उन्होंने जो किया उससे पुलिस की छवि धूमिल होती है। दो प्रत्यक्षदर्शी मिले, जिसमें से एक को आरोपी ने धक्का दिया था, जिसमें लगे चोट का निशान अभी भी उसके शरीर पर मौजूद हैं।
एक प्रत्यक्षदर्शी तो ऐसे सामने आए, जिन्होंने देखा था कि गला घोंटकर हत्या करने के बाद लटकाने का प्रयास किया जा रहा है। वे मृतका से मिलने जा रही थी, तो गार्ड ने गेट पर उसे रोका भी था।
घटना के समय एक और व्यक्ति वहां था, लेकिन काफी प्रयास के बाद भी उसे पहचाना नहीं जा सका है। उस समय अगर सही तरीके से अनुसंधान हुआ होता तो और भी बहुत चीज सामने आ सकती थी।