बिलासपुर सिम्स के इंटर्न डॉक्टरों ने मासिक स्टाइपेंड ₹15,900 से बढ़ाकर ₹30,000 करने की मांग को लेकर काम बंद हड़ताल शुरू कर दी है। अपनी मांगों के समर्थन में इंटर्न डॉक्टरों ने जुलूस निकाला और प्रदर्शन किया।
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उन्होंने कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें स्टाइपेंड में बढ़ोतरी के लिए शासन से हस्तक्षेप की मांग की गई है। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के डॉ. नागेंद्र साहू ने बताया कि सिम्स के इंटर्न डॉक्टर 5 अगस्त से हड़ताल पर हैं।
डॉ. साहू ने जानकारी दी कि सिम्स में 180 इंटर्न डॉक्टर हैं, जबकि पूरे प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में इनकी संख्या लगभग 1000 है। इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड वर्ष 2023 से नहीं बढ़ाया गया है। उन्होंने पड़ोसी राज्य ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां इंटर्न डॉक्टरों को ₹44,000 मासिक स्टाइपेंड मिलता है। उन्होंने इस अंतर को छत्तीसगढ़ के जूनियर डॉक्टरों के साथ 'अन्याय' बताया।
मरीजों की सेवा में दिन-रात जुटे सिम्स के एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर पहली बार अपने अधिकारों और मेहनत के उचित मूल्य के लिए सड़क पर उतरे हैं। उन्होंने अपनी मांगों को लेकर जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है।

24 से 36 घंटे तक ड्यूटी देते हैं
डॉक्टरों का कहना है कि इंटर्नशिप अब केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रह गई है। अस्पताल की रोजमर्रा की चिकित्सा व्यवस्था में इंटर्न डॉक्टरों की अहम भूमिका होती है। ओपीडी से लेकर वार्ड, इमरजेंसी और मरीजों की देखभाल तक वे लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कई परिस्थितियों में उन्हें 24 से 36 घंटे तक लगातार ड्यूटी करनी पड़ती है।
काम डॉक्टरों जैसा, स्टाइपेंड इतना कम क्यों?
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने सवाल उठाया है कि जब इंटर्न डॉक्टर अस्पताल की नियमित चिकित्सा व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं और मरीजों की देखभाल में लगातार जिम्मेदारी निभाते हैं, तो उनके स्टाइपेंड का निर्धारण उनकी मेहनत और जिम्मेदारियों के अनुरूप क्यों नहीं किया जा रहा है?

एक ही डिग्री पर स्टाइपेंड में इतना अंतर
एसोसिएशन ने सवाल उठाया कि एक ही मेडिकल डिग्री, लगभग समान प्रशिक्षण और मरीजों की सेवा की जिम्मेदारी, लेकिन स्टाइपेंड में इतना बड़ा अंतर। यही अंतर अब छत्तीसगढ़ के इंटर्न डॉक्टरों के लिए बड़ा सवाल बन गया है।
वर्षों से मांग, अब भी शासन के विचाराधीन
एसोसिएशन का कहना है कि स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कोई नई नहीं है। डॉक्टरों की ओर से पहले भी संबंधित अधिकारियों को लिखित आवेदन दिए जा चुके हैं। स्वास्थ्य मंत्री और अन्य अधिकारियों से मुलाकात कर भी समस्या से अवगत कराया गया है।


ठोस पहल करे सरकार
डॉक्टरों के मुताबिक उन्हें समय-समय पर यही जानकारी दी गई कि स्टाइपेंड बढ़ाने से संबंधित प्रस्ताव शासन स्तर पर विचाराधीन है। लेकिन अब इंटर्न डॉक्टर चाहते हैं कि यह प्रक्रिया केवल फाइलों तक सीमित न रहे और जल्द ठोस निर्णय लिया जाए।
आर्थिक राहत ही नहीं सम्मान का सवाल
डॉक्टरों का कहना है कि यह सिर्फ आर्थिक राहत की मांग नहीं है। यह उनके श्रम, समय, जिम्मेदारी और मरीजों की सेवा के प्रति सम्मान का सवाल है। लंबे समय तक ड्यूटी करने वाले इंटर्न डॉक्टरों को उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप स्टाइपेंड मिलना चाहिए।