October 15, 2026

'15 दिन में माफी वरना 5 करोड़ दो',बिहार के IPS कुंदन कृष्णन ने RJD सांसद सुधाकर सिंह को क्यों भेजा नोटिस?

Time Published: Thursday, October 15, 2026, 17:50 [IST]

बिहार के सीनियर आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के बक्सर से सांसद सुधाकर सिंह को मानहानि का एक कड़ा कानूनी नोटिस भेजा है। इस नोटिस में सांसद को साफ शब्दों में चेतावनी दी गई है कि वे 15 दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगें। अगर सांसद ऐसा करने से इनकार करते हैं, तो उन पर 5 करोड़ रुपये का भारी-भरकम सिविल हर्जाना और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356 के तहत आपराधिक मानहानि का मुकदमा ठोक दिया जाएगा।

दूसरी तरफ आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने सोशल मीडिया पर इस नोटिस को साझा करते हुए ऐलान किया है कि वे डरने वाले नहीं हैं और अपने बयों पर पूरी तरह कायम हैं। विवाद की जड़ भरत भूषण तिवारी की मौत और जमुई की एक घटना को लेकर सुधाकर सिंह के बयान हैं। हालांकि सांसद ने माफी मांगने से इनकार कर दिया है।

Kundan Krishnan legal notice

कुंदन कृष्णन ने सुधाकर सिंह को नोटिस क्यों भेजा?

कुंदन कृष्णन की ओर से उनके अधिवक्ता अपूर्व हर्ष ने यह नोटिस जारी किया है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि सुधाकर सिंह ने अपने बयानों में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। नोटिस भेजने वाले पक्ष का कहना है कि ये आरोप निराधार हैं और इनसे कुंदन कृष्णन की छवि के साथ उनकी पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।

विवाद का एक हिस्सा 17 जून 2026 को भोजपुर जिले के बिलौती गांव में पुलिस ऑपरेशन के दौरान भारत भूषण तिवारी की मौत से जुड़ा है। नोटिस के मुताबिक, इस घटना के बाद 24 जून को सुधाकर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसमें उन्होंने पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए और कुंदन कृष्णन को लेकर आरोप लगाए थे।

भरत भूषण तिवारी की मौत के मामले में क्या हुआ?

नोटिस में यह भी बताया गया है कि बिहार सरकार ने 20 जून 2026 को इस मामले की जांच के लिए रिटायर्ड जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग बनाया था। सुधाकर सिंह ने इस मामले में तत्कालीन पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की है।

सांसद का तर्क है कि घटना के समय कुंदन कृष्णन बिहार एसटीएफ के डीजी थे। इसलिए पुलिस कमान, पुलिस मुख्यालय और फैसले लेने वाले वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। यह सुधाकर सिंह की मांग है, जबकि नोटिस भेजने वाले पक्ष ने उनके आरोपों पर आपत्ति जताई है।

जमुई की घटना का भी नोटिस में जिक्र

कानूनी नोटिस में 22 सितंबर 2026 को एक निजी न्यूज पोर्टल को दिए गए सुधाकर सिंह के इंटरव्यू का भी उल्लेख है। यह मामला जमुई में एक किशोरी और उसके दोस्त के साथ कथित छेड़छाड़ और दुर्व्यवहार की घटना से जुड़ा है। नोटिस के मुताबिक, इस घटना पर बिहार पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाते हुए सांसद ने कुंदन कृष्णन के खिलाफ आरोप लगाए थे।

नोटिस भेजने वाले पक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताया है। साथ ही दावा किया गया है कि इस मामले में मुख्य आरोपी समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इन आरोपों और पुलिस कार्रवाई को लेकर दोनों पक्षों के बयानों में अंतर है।

सुधाकर सिंह बोले- माफी नहीं मांगूंगा

नोटिस मिलने की जानकारी सुधाकर सिंह ने सोशल मीडिया पर साझा की। उन्होंने साफ कहा कि वह माफी नहीं मांगेंगे और अपने बयान पर कायम हैं। सांसद के मुताबिक, भारत भूषण तिवारी की मौत और जमुई की घटना पर उन्होंने जनहित में सवाल उठाए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह नोटिस का जवाब कानूनी तरीके से देंगे और ऐसी धमकियों से पीछे नहीं हटेंगे।

15 दिन में माफी नहीं तो 5 करोड़ का मुकदमा

नोटिस में सुधाकर सिंह से 15 दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की गई है। साथ ही उन्हें जमीन माफिया, शराब माफिया और कथित फर्जी एनकाउंटर के मामलों में संरक्षण देने जैसे आरोप लगाने से बचने को कहा गया है। कुंदन कृष्णन पर पद के दुरुपयोग से जुड़े आरोप दोहराने पर भी आपत्ति जताई गई है।

नोटिस में चेतावनी दी गई है कि तय समय में माफी नहीं मिलने पर 5 करोड़ रुपये के हर्जाने का सिविल मुकदमा दायर किया जाएगा। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 के तहत आपराधिक मानहानि की कार्रवाई शुरू करने की बात भी कही गई है।

फिलहाल यह मामला कानूनी नोटिस और सांसद के जवाब तक पहुंचा है। नोटिस में लगाए गए आरोप अपने आप में अदालत से साबित हुए तथ्य नहीं हैं। आगे की स्थिति सुधाकर सिंह के कानूनी जवाब और जरूरत पड़ने पर शुरू होने वाली कार्रवाई से साफ होगी।