August 15, 2026

15 अगस्त की सुबह नहीं, रात के 12 बजे फहराया गया तिरंगा, बिहार के पूर्णिया में 80 साल से चली आ रही है परंपरा

Time Published: Saturday, August 15, 2026, 15:16 [IST]

Purnia Jhanda Chowk History: देश हर साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाता है, लेकिन बिहार के पूर्णिया में आजादी का जश्न एक दिन पहले ही शुरू हो जाता है। यहां झंडा चौक पर 14 अगस्त की रात 12 बजकर 1 मिनट पर तिरंगा फहराने की परंपरा करीब 80 वर्षों से चली आ रही है।

माना जाता है कि आजादी की घोषणा की खबर मिलते ही स्वतंत्रता सेनानियों ने इसी जगह सबसे पहले तिरंगा फहराया था। तभी से यह चौक देशभक्ति की अनोखी मिसाल बना हुआ है। हर साल आधी रात को राष्ट्रगान के साथ तिरंगा फहराया जाता है और पूरा इलाका देशभक्ति के रंग में डूब जाता है।

Purnia Jhanda Chowk History

आजादी की पहली रात से जुड़ी है कहानी

स्थानीय अधिवक्ता दिलीप कुमार दीपक के मुताबिक, आजादी से पहले उनके पिता रामरतन साह अपने साथियों के साथ मित्रा रेडियो दुकान पर स्वतंत्रता की घोषणा सुनने का इंतजार कर रहे थे। रात में जब रेडियो से भारत की आजादी की खबर आई तो वहां खुशी की लहर दौड़ गई। बताया जाता है कि इसी दौरान रामेश्वर प्रसाद सिंह ने साथियों के साथ बांस की बल्ली के सहारे तिरंगा फहराया। इसके बाद यह जगह झंडा चौक के नाम से प्रसिद्ध हो गई।

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12 बजकर 1 मिनट पर फहरता है तिरंगा

पूर्णिया के झंडा चौक पर 14 अगस्त की शाम से ही देशभक्ति का माहौल बन जाता है। चौक को तिरंगे की रोशनी से सजाया जाता है और देशभक्ति के गीतों के बीच बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं। जैसे ही रात के 12 बजकर 1 मिनट होते हैं, तिरंगा फहराया जाता है। राष्ट्रगान के साथ पूरा चौक देशभक्ति के जज्बे में डूब जाता है। खास बात यह है कि इस आयोजन में हर उम्र के लोग उत्साह से शामिल होते हैं।

सीमांचल की धरती से जुड़ी आजादी की याद

पूर्णिया का झंडा चौक सिर्फ एक स्थानीय आयोजन की वजह से खास नहीं है, बल्कि इसका इतिहास सीमांचल के उस दौर से जुड़ा है, जब देश आजादी और विभाजन के दर्द से गुजर रहा था। आजादी की खुशी के साथ लोगों के सामने देश के बंटवारे की पीड़ा भी थी। ऐसे समय में झंडा चौक पर फहराया गया तिरंगा स्वतंत्रता की खुशी और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक बन गया।

संसद और विधानसभा तक पहुंची पहचान की मांग

झंडा चौक को ऐतिहासिक और राष्ट्रीय पहचान देने की मांग लंबे समय से उठती रही है। पूर्णिया के पूर्व सांसद संतोष कुशवाहा संसद में इस स्थल को राजकीय दर्जा देने की मांग उठा चुके हैं। वहीं सदर विधायक विजय खेमका ने भी बिहार विधानसभा में झंडा चौक को उचित सम्मान दिलाने की बात रखी है। स्थानीय लोगों का मानना है कि आजादी की पहली रात से जुड़ी इस विरासत को सरकारी संरक्षण मिलना चाहिए।

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80 साल बाद भी कायम है देशभक्ति का जुनून

आजादी के 80 साल बाद भी पूर्णिया के झंडा चौक की यह परंपरा उसी उत्साह के साथ जारी है। पीढ़ियां बदलीं, शहर बदला और देश तेजी से आगे बढ़ा, लेकिन 14 अगस्त की आधी रात तिरंगा फहराने का सिलसिला नहीं बदला। स्थानीय युवाओं के लिए यह केवल ध्वजारोहण नहीं, बल्कि उन स्वतंत्रता सेनानियों को याद करने का मौका है, जिन्होंने आजादी की पहली रात तिरंगा फहराकर इतिहास रचा था। यही परंपरा इस चौक को खास बनाती है।