September 19, 2026

कॉम्फेड का 1432 करोड़ का मेगा टेंडर: ‘अपनों’ के लिए ऐसी शर्तें रखी कि स्थानीय बाहर हो गए - Patna News

पटना51 मिनट पहलेलेखक: मो. सिकंदर

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पोषण 2.0 के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों पर पहुंचाना है फोर्टिफाइड फूड, टेंडर में तीन बार बदलाव किया, ईएमडी 10 लाख से 28 करोड़ हुई

बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (कॉम्फेड) ने राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों पर ‘रेसिपी बेस्ड फोर्टिफाइड फूड’ की आपूर्ति के लिए 1432.12 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया है।

28 जुलाई 2026 को जारी इस टेंडर में तीन बार बदलाव व संशोधन किए गए। दो बार टेंडर की तिथि बढ़ाई गई और एक बार नियम व शर्तों में बदलाव किया गया। टेंडर भरने की तिथि 8 सितम्बर को समाप्त हो चुकी है। अभी किसी को टेंडर नहीं मिला है।

केवल चार बिडर ने टेंडर भरा है। उसमें से विभिन्न कारणों से दो के बाहर हो जाने की सूचना है। अब केवल दो बचे हैं। जब शुरू में टेंडर हुआ था तो उस समय ईएमडी (बयाना की राशि) 10 लाख रुपए थी, लेकिन बाद में इसे 28.64 करोड़ कर दिया गया। एक्सपर्ट बताते हैं कि तय की गई टेंडर की शर्तें राज्य की एमएसएमई नीति के बिल्कुल उलट थी। भारी-भरकम पूंजी और कड़े तकनीकी नियमों के कारण स्थानीय छोटे उद्यमी इसमें शामिल नहीं हो पाए। इस संबंध में कॉम्फेड के प्रबंध निदेशक शीर्षत कपिल अशोक से पक्ष लेना चाहा लेकिन उन्होंने न तो फोन उठाया, न ही मैसेज का जवाब दिया।

टेंडर के अन्य अहम पहलू

  • कॉम्फेड ने इस टेंडर को लेकर पहले ही केविएट दाखिल कर दिया है, ताकि हाईकोर्ट बिना कॉम्फेड का पक्ष सुने रोक जारी न कर सके।
  • निजी कंपनी को अपने खर्च पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा। कॉम्फेड सिर्फ लीज पर जमीन देगा। 15 साल बाद कंपनी को यह पूरा सेटअप बिना शर्त कॉम्फेड को सौंपना होगा।
  • आवंटित मूल्य के 0.25% की जगह बढ़ाकर 5% किया।

इन 4 बड़ी शर्तों के कारण स्थानीय एमएसएमई के लिए बंद हुए रास्ते

1. 286 गुना बढ़ी बयाना राशि (ईएमडी): मूल टेंडर में ईएमडी की रकम मात्र 10 लाख रुपये थी। तीसरे शुद्धिपत्र के जरिए इसे सीधे बढ़ाकर 28.64 करोड़ रुपये कर दिया गया। किसी भी स्थानीय एमएसएमई के लिए इतनी बड़ी बैंक गारंटी या नकदी देना संभव नहीं था।

2. 75 करोड़ का नेटवर्थ और 100 करोड़ का टर्नओवर: बोलीदाता का नेटवर्थ 31 मार्च 2026 तक न्यूनतम 75 करोड़ रुपये होना जरूरी था। साथ ही पिछले 5 वित्तीय वर्षों में आईसीडीएस या सरकारी आपूर्ति से न्यूनतम औसत टर्नओवर 100 करोड़ रुपये मांगा गया था।

3. बड़ा आपूर्ति अनुभव: प्रति वर्ष न्यूनतम 15,000 मीट्रिक टन फोर्टिफाइड फूड निर्माण व आपूर्ति का ट्रैक रिकॉर्ड मांगा गया था, जो राज्य की स्थानीय इकाइयों के पास नहीं है।

4. ज्वाइंट वेंचर पर कड़ा प्रतिबंध: अगर स्थानीय इकाइयां मिलकर समूह बनाती तो भी लीड मेंबर को तकनीकी और विनिर्माण की शर्तें अकेले पूरी करनी पड़ती। सहयोगी फर्म सिर्फ नेटवर्थ जोड़ सकती थी, जिससे साझा बोली लगाने का रास्ता भी बंद हो गया।

इस टेंडर में उठ रहे ये 5 बड़े सवाल

  • कॉम्फेड ने इसमें खुद को प्रोजेक्ट अथॉरिटी और नोडल एजेंसी बताया है। कॉम्फेड को यह अथॉरिटी और नोडल एजेंसी अधिकार किस विधिक एवं प्रशासनिक आधार पर प्राप्त हुआ है?
  • इस संबंध में बिहार सरकार के संबंधित विभाग द्वारा जारी सर्कुलर/ ऑफिस मेमोरेंडम/ डिपार्टमेंटल रेजोल्यूशन कौन-सा है?
  • कॉम्फेड की इस भूमिका को लेकर कोई कैबिनेट डिसीजन या कैबिनेट अप्रूवल किया गया है?
  • कॉम्फेड ने इस टेंडर में केविएट क्यों लगा दिया? क्या सभी टेंडर में ऐसा होता है?
  • आखिर वह कौन-सी एजेंसी, फर्म, बड़ा कॉर्पोरेट घराना है जिसके लिए किसी के इशारे पर यह टेंडर निकाला गया?

यह टेंडर एक पक्षीय और मनमाना है 1432.12 करोड़ के इतने बड़े सार्वजनिक महत्व के प्रोजेक्ट में बीडर के बीच लेवल प्लेइंग फिल्ड नहीं दिया गया। टेंडर में पहले से ही इतना संकुचित कर दिया गया कि कुछ बड़े औद्योगिक घरानों तक यह सीमित रह रह गया। प्रतिस्पर्धा को व्यापक बनाने की बजाय उसे कुछ अत्यंत बड़े और पूंजी-संपन्न खिलाड़ियों तक सीमित करने की संरचना तैयार की गई। यह टेंडर पूरी तरह एकपक्षीय और मनमाना है। संविधान के अनुच्छेद 14 का भी उल्लंघन है। टेंडर में केविएट लगा दिया गया है। यह व्यवस्था बड़े कॉरपोरेट के पक्ष में वित्तीय क्षमता का खेल और छोटे उद्यमों के लिए अत्यधिक जोखिम है।- संजीव सौरभ, एडवोकेट, सिविल कोर्ट

बिहार एमएसएमई नीति और टेंडर के नियमों में सीधा अंतर

सरकारी एमएसएमई नीति के नियमकॉम्फेड टेंडर की नई शर्तें
स्थानीय इकाइयों को टर्नओवर और पूर्व अनुभव में विशेष छूट100 करोड़ का टर्नओवर और 15,000 MT सप्लाई अनुभव अनिवार्य
छोटे उद्योगों को सरकारी खरीद में नेटवर्थ की बाध्यता से राहतन्यूनतम 75 करोड़ रुपये का नेटवर्थ होना अनिवार्य
नए उद्योगों को बिना गारंटी लोन व वित्तीय सहायताईएमडी 10 लाख से बढ़ाकर सीधे 28.64 करोड़ रुपये की गई
राज्य के भीतर बने उत्पादों को प्राथमिकता5 या अधिक राज्यों में आपूर्ति पर 50 अतिरिक्त तकनीकी अंक

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