July 31, 2026

इंदौर में 130 डिग्री टेढ़ी रीढ़ का सफल ऑपरेशन: लकवे से जूझ रहा किशोर फिर चलने लगा; जटिल स्पाइन सर्जरी से मिला नया जीवन - Indore News

रीढ़ की हड्डी का टेढ़ापन (स्कोलियोसिस) यदि समय पर पहचान में न आए तो यह जानलेवा जटिलताओं का कारण बन सकता है। ऐसा ही एक दुर्लभ मामला इंदौर में सामने आया, जहां 130 डिग्री तक टेढ़ी हो चुकी रीढ़ और पैरों में लकवे के लक्षणों से जूझ रहे 15 वर्षीय लड़के की कर

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बड़वानी निवासी प्रदीप इडियोपैथिक स्कोलियोसिस से पीड़ित था। सामान्य तौर पर 50 डिग्री से अधिक रीढ़ का झुकाव गंभीर माना जाता है, जबकि इस बच्चे की रीढ़ लगभग 130 डिग्री तक टेढ़ी हो चुकी थी। एक्स-रे और सीटी स्कैन में स्थिति बेहद गंभीर सामने आई।

शुरुआत में सर्जरी का जोखिम बहुत अधिक होने के कारण डॉक्टरों ने पूरी योजना और सावधानी के साथ इलाज शुरू किया। इसी दौरान बच्चे के पैरों में लकवे के लक्षण दिखाई देने लगे और उसे यूरिन करने में भी परेशानी होने लगी। हालत बिगड़ने पर एक्सपर्ट्स की टीम ने 22 जून को तुरंत ऑपरेशन करने का निर्णय लिया।

13 घंटे तक चला ऑपरेशन, कई चरणों में सीधी की गई रीढ़

- सर्जरी सुबह करीब 10 बजे शुरू हुई और रात करीब 11 बजे तक चली। पहले पेस में रीढ़ की हड्डी को शरीर के अगले हिस्से से, हार्ट के नीचे के हिस्से तक पहुंचकर मुक्त किया गया।

- इसके बाद पीछे की ओर से स्क्रू लगाकर रीढ़ को सीधा करने का प्रयास किया गया।

- जब इससे अपेक्षित सुधार नहीं मिला तो डॉक्टरों ने नियंत्रित तरीके से रीढ़ की कुछ हड्डियों को काटकर उनका दोबारा संतुलन बनाया। कई फेस में चली इस जटिल प्रक्रिया के बाद रीढ़ को संतुलित स्थिति में लाने में सफलता मिली।

चार दिन बाद लौट आई पैरों की हरकत

डॉ. प्रणव कुमार (शैल्बी हॉस्पिटल) ने बताया कि सर्जरी के बाद बच्चे की स्थिति लगातार बेहतर हो रही है। ऑपरेशन के महज चार दिन बाद उसके पैरों में संवेदनाएं लौट आईं और वह पैरों को हिलाने-चलाने लगा। यह दुर्लभ और जटिल सर्जरी बहुत कम होती है।

बच्चों में रीढ़ का टेढ़ापन दिखे तो तुरंत जांच जरूरी

डॉ. कुमार ने कहा कि बच्चों की रीढ़ में किसी भी प्रकार का टेढ़ापन सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। शुरुआती अवस्था में बीमारी की पहचान हो जाए तो कई मामलों में व्यायाम और नियमित उपचार से इसे बढ़ने से रोका जा सकता है।

उन्होंने बताया कि 5 से 7 वर्ष और 12 से 15 वर्ष की उम्र में बच्चों की हड्डियों का विकास तेजी से होता है। इस दौरान स्कोलियोसिस भी तेजी से बढ़ सकता है। यदि समय पर इलाज नहीं मिले तो स्थिति लकवे जैसी गंभीर जटिलता तक पहुंच सकती है।

विशेषज्ञ टीम और आधुनिक तकनीक से मिली सफलता

हॉस्पिटल के सीओओ वेंकटेश्वर, डिप्टी सीएओ अभिषेक चौरसिया और मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. विवेक जोशी ने कहा कि इस तरह की जटिल सर्जरी एक्सपर्ट्स डॉक्टरों, अत्याधुनिक तकनीक और समर्पित मेडिकल टीम के सामूहिक प्रयास का परिणाम है।