
लक्ष्मण सिंहImage Credit source: Youtube/Shrimant Jainendra
दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपने अनोखे दावे की वजह से चर्चा में आए डॉ. लक्ष्मण सिंह इन दिनों सोशल मीडिया और लोगों के बीच काफी सुर्खियों में हैं. उनका कहना है कि उन्होंने अब तक 13 विषयों में यूजीसी नेट (UGC NET) परीक्षा पास की है. इनमें 3 विषयों में जेआरएफ (JRF) और 11 विषयों में नेट क्वालिफाई करने का दावा किया गया है. डॉ. सिंह बताते हैं कि पिछले 16 वर्षों से वो लगातार विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाएं और इंटरव्यू देते आ रहे हैं. 33 बार जेएनयू की प्रवेश परीक्षा भी पास कर चुके हैं, लेकिन आज तक उन्हें स्थायी चयन नहीं मिल पाया. आइये जानते हैं उनके बारे में.
अलग-अलग विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करनी पड़ी
डॉ. लक्ष्मण सिंह का शुरुआती शैक्षणिक सफर आसान नहीं रहा. बचपन में उन्हें पढ़ाई में कमजोर छात्र माना जाता था. वह चौथी कक्षा में एक बार और नौवीं कक्षा में लगातार दो बार फेल हुए. स्नातक की पढ़ाई के दौरान भी उन्हें कई बार असफलता का सामना करना पड़ा और अलग-अलग विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करनी पड़ी. आखिरकार उन्होंने 39 प्रतिशत अंकों के साथ ग्रेजुएशन पूरा किया.
नौवीं कक्षा में लगातार दो बार फेल हुए
मीडिया रिपोर्ट्स के मताबिक डॉ. सिंह नौवीं में दूसरी बार फेल होने के बाद उन्हें घर लौटने में भी डर लग रहा था. इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. लगातार मेहनत करते हुए उन्होंने जेएनयू की प्रवेश परीक्षा पास की. उनका दावा है कि उन्होंने वर्षों तक कई विश्वविद्यालयों में इंटरव्यू दिए, 33 बार जेएनयू की प्रवेश परीक्षा पास की, लेकिन अब तक स्थायी चयन नहीं हो सका. उनका कहना है कि पिछले 16 वर्षों से वो लगातार प्रयास कर रहे हैं.
ज्ञान की तलाश बनी सबसे बड़ी ताकत
डॉ. लक्ष्मण सिंह ने पढ़ाई को सिर्फ डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं माना, बल्कि ज्ञान अर्जित करने का जरिया बनाया. उनका दावा है कि उन्होंने 13 विषयों में यूजीसी नेट परीक्षा पास की है, जिनमें 2 विषयों में जेआरएफ और 11 विषयों में नेट शामिल है. समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, भारतीय संस्कृति, बौद्ध अध्ययन, जैन अध्ययन, गांधी एवं शांति अध्ययन और तुलनात्मक धर्म अध्ययन जैसे विषयों में उन्होंने सफलता हासिल की.
रिचर्च वर्क को आगे बढ़ाया
उन्होंने जेएनयू और जामिया मिल्लिया इस्लामिया से उच्च शिक्षा प्राप्त की तथा एमफिल और पीएचडी भी पूरी की. रिचर्च वर्क को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी. फारसी भाषा सीखने के उद्देश्य से ईरान भी गए, जहां समाज और संस्कृति पर अध्ययन किया. उन्होंने कई रिसर्च पेपर प्रकाशित किए और मध्य एशिया व भारतीय समाज से जुड़े विषयों पर भी काम किया.
युवाओं को दिया सीखने का संदेश
डॉ. लक्ष्मण सिंह का मानना है कि छात्रों का लक्ष्य केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि अपनी नॉलेज और सोच का विस्तार करना होना चाहिए. उनका कहना है कि अच्छी किताबें पढ़ने की आदत व्यक्ति के व्यक्तित्व को मजबूत बनाती है. उन्होंने कई विद्यार्थियों को जेएनयू और जामिया जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी में मार्गदर्शन भी दिया है.
सामाजिक मुद्दों पर भी सक्रियता
शिक्षा के अलावा वो सामाजिक मुद्दों पर भी सक्रिय रहे हैं. सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से कई मामलों को उठाया और सामाजिक विषयों पर काम किया. खेलों में भी उनकी रुचि रही है. उन्होंने पावरलिफ्टिंग में गोल्ड मेडल जीता और कठिन मोटरसाइकिल रैलियों में भी हिस्सा लिया.

सपना यादव
दिल्ली में जन्मीं सपना यादव TV9 भारतवर्ष डिजिटल में बतौर असिस्टेंट प्रड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता जगत में 4 वर्षों से ज्यादा के अनुभव के साथ काम जारी है. ह्यूमन इंटरेस्ट, राजनीति, वर्ल्ड, एजुकेशन, नॉलेज, करंट अफेयर्स से जुड़ी खबरों में खास दिलचस्पी रखती हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से BA Hons. हिस्ट्री की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने पत्रकारिता को लक्ष्य बनाया, फिर जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा इन टीवी जर्नलिज्म किया, जामिया से ही हिस्ट्री में मास्टर्स भी किया और फिर इसके बाद गुरु जम्बेश्वर साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया. मास कम्यूनिकेशन में पत्रकारिता की डिग्री लेने के बाद जमीनी स्तर पर खबरों के महत्व को समझा. इसके बाद उन्होंने बतौर ट्रेनी TV9 भारतवर्ष डिजिटल में एक साल तक काम किया. ट्रेनी के दौरान अलग-अलग तरह की खबरों का अनुभव लेने के बाद TV9 भारतवर्ष डिजिटल में असिस्टेंट प्रड्यूसर के पद पर काम शुरू किया. यहां पर एंकरिंग, वॉइस ओवर, वीडियो प्रोडक्शन, न्यूज राइटिंग जैसे काम किए. इस समय वह एजुकेशन डेस्क पर कार्यरत हैं और स्टूडेंट्स के लिए करियर से जुड़े विकल्पों, बोर्ड परीक्षाओं, नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं और यूनिवर्सिटीज की महत्वपूर्ण जानकारियों को कवर कर रही हैं. सपना यादव को ट्रेवल करना, लिखना- पढ़ना पसंद है और वो प्रकृति को करीब से महसूस करना ज्यादा पसंद करती हैं. पत्रकारिता में सफर अभी जारी है.
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