रेवाड़ी, गुरुग्राम, फरीदाबाद, सिरसा और भिवानी जैसे जिलों में नए अधिकारियों को तैनाती दी गई है, जबकि दो अफसरों का प्रमोशन विभागीय जांच के चलते रोक दिया गया है। इसके अलावा कुछ अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी सौंपी गई हैं।
मंत्री अनिल विज के बिजली विभाग में 13 अफसरों का प्रमोशन और तबादला किया गया।
- Published: 25 Jul 2026, 03:13 PM IST
- Last Updated: 25 Jul 2026, 04:25 PM IST
हरियाणा सरकार के ऊर्जा मंत्री अनिल विज के महकमे में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के हिसार स्थित मुख्य कार्यालय से जारी आधिकारिक आदेशों के तहत 13 कार्यकारी अभियंताओं (XEN) को पदोन्नत करके अधीक्षण अभियंता (SE) के पद पर तैनात किया गया है। इस बदलाव से सबसे ज्यादा प्रभाव हिसार क्षेत्र पर पड़ा है, जहां कई अफसरों को पदोन्नति के साथ अहम प्रभार सौंपे गए हैं।
डीएचबीवीएन एमडी की मंजूरी
निगम के प्रबंध निदेशक की स्वीकृति के उपरांत यह प्रशासनिक फेरबदल तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। पदोन्नति हासिल करने वाले सभी अभियंताओं को पे मैट्रिक्स लेवल-14 के अंतर्गत अधीक्षण अभियंता की जिम्मेदारी दी गई है। जारी किए गए निर्देशों के मुताबिक ये सभी अधिकारी एक साल की परिवीक्षा (प्रोबेशन) अवधि पर रहेंगे और इन्हें तय समय सीमा के भीतर अपनी नई पदस्थापना पर कार्यभार संभालना होगा।
इन जिलों में हुई नए अधिकारियों की तैनाती
- विजय पाल को रेवाड़ी
- प्रवीण यादव को गुरुग्राम
- अमित कम्बोज को फरीदाबाद
आशुतोष कुमार पांचाल को सिरसा
जितेन्द्र सिंह धुल को भिवानी भेजा गया है
इसके विपरीत, दिनेश शर्मा और शमशेर सिंह की पदोन्नति प्रक्रिया को फिलहाल होल्ड पर रख दिया गया है। इन दोनों के खिलाफ विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित होने के कारण इनके नामों को फिलहाल सूची से बाहर रखा गया है।
कई अधिकारियों को मिले अतिरिक्त प्रभार
- विजेंद्र सिंह (एसई/सीबीओ, हिसार) को एसई-आरएपीडीआरपी का अतिरिक्त जिम्मा मिला है।
- अविनाश यादव को एसई (सिविल), हिसार का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
- विकास कादियान पंचकूला स्थित एचईपीसी की जिम्मेदारी के साथ-साथ एसई (आईटी), हिसार का कामकाज भी संभालेंगे।
तय समय में पदभार नहीं संभालने पर रद्द होगा प्रमोशन
दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के प्रबंध निदेशक विक्रम सिंह ने स्पष्ट किया है कि निगम के कामकाज को और अधिक चुस्त-दुरुस्त और प्रभावी बनाने के लिए यह फेरबदल किया गया है। सभी पदोन्नत अधिकारियों को एक महीने के भीतर अपने नए कार्यक्षेत्र में ज्वॉइन करना अनिवार्य होगा।
निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्यभार ग्रहण न करने वाले अधिकारियों की पदोन्नति स्वतः रद्द मान ली जाएगी। निगम का मानना है कि इन बदलावों से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को निर्बाध व गुणवत्तापूर्ण बिजली मिल सकेगी।