August 12, 2026

झीरम घाटी कांड: 13 साल बाद फैसले की दहलीज पर मामला, 31 अगस्त को आएगा NIA की स्पेशल कोर्ट का फैसला

CG Jhiram Ghati Case : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नरसंहार मामले में 13 साल लंबे इंतजार के बाद अब फैसला आने वाला है। NIA की स्पेशल कोर्ट में मामले की अंतिम सुनवाई पूरी हो गई है। अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब 31 अगस्त को स्पेशल कोर्ट इस हाई प्रोफाइल मामले में अपना फैसला सुनाएगी।

तीन दिन तक चली अंतिम सुनवाई

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झीरम घाटी मामले की अंतिम सुनवाई लगातार तीन दिनों तक चली। सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष ने अदालत के सामने अपनी-अपनी दलीलें रखीं। स्पेशल जज अजय सिंह राजपूत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले में फैसला सुनाने के लिए 31 अगस्त की तारीख तय की। इस मामले में अदालत ने कुल 101 गवाहों को सुना है। वहीं, मामले में 10 आरोपियों से जुड़े पक्षों को भी अदालत के सामने सुना गया है।

25 मई 2013 को हुआ था झीरम घाटी नरसंहार

झीरम घाटी में 25 मई 2013 को कांग्रेस नेताओं के काफिले पर घात लगाकर हमला किया गया था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत 27 लोगों की मौत हुई थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। हमले के बाद से ही इसके पीछे की साजिश, हमले की परिस्थितियों और जिम्मेदार लोगों को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं। लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया के बाद अब यह मामला अदालत के फैसले तक पहुंच गया है।

अभियोजन और बचाव पक्ष ने रखीं दलीलें

अंतिम सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मामले में अपने आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत के सामने दलीलें रखीं। वहीं, बचाव पक्ष ने भी अपने तर्क पेश किए और आरोपों को लेकर अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब 31 अगस्त को आने वाले फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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13 साल बाद क्या साफ होगी झीरम की तस्वीर?

झीरम घाटी कांड को छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े हमलों में गिना जाता है। इस घटना के बाद से ही इसके पीछे की पूरी साजिश और उससे जुड़े कई सवाल चर्चा में रहे हैं। अब अदालत के फैसले से इस मामले की कानूनी तस्वीर काफी हद तक साफ होने की उम्मीद है। हालांकि, फैसले के बाद इस मामले के राजनीतिक मायने भी सामने आ सकते हैं। इतने वर्षों से झीरम कांड को लेकर राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे हैं। अब सभी की निगाहें 31 अगस्त पर हैं, जब NIA की स्पेशल कोर्ट इस मामले में अपना फैसला सुनाएगी। 13 साल से चले आ रहे इस मामले में अदालत का फैसला न सिर्फ कानूनी रूप से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

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