September 18, 2026

पैरों में चोट लगी,12 घंटे में 122KM की दौड़ पूरी: जयपुर के सूरज ने लद्दाख में जीता सिल्वर मेडल; रातभर नौकरी कर सुबह करता था ट्रेनिंग - Jaipur News

जयपुर6 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

जयपुर के सूरज मीणा ने लद्दाख मैराथन में 122 किलोमीटर सिल्क रूट अल्ट्रा दौड़ को 12 घंटे 35 मिनट में पूरा करके रिकॉर्ड बनाया है। सूरज ने इस दौड़ में सिल्वर मेडल जीता। इस सिल्क रूट अल्ट्रा दौड़ में पिछले 13 साल में लद्दाख से बाहर के किसी व्यक्ति ने इस तरह का कारनामा नहीं किया।

सूरज को ट्रेनिंग के दौरान दो बार पैरों में चोट लगी थी। इसके बाद फिजियोथेरेपिस्ट ने आराम करने के लिए कहा था, लेकिन सूरज ने धीरे-धीरे रिकवरी की। वहीं सूरज ‘बर्गर किंग’ में रातभर नौकरी करते थे। इसके बाद सुबह ट्रेनिंग के लिए पहुंच जाते थे। इस दौरान रनिंग के दौरान नींद के कारण एक खंभे से भी टकरा गया था।

सूरज को जीतने पर ट्रॉफी के साथ 3.50 लाख रुपए का पुरस्कार भी मिला। सूरज जयपुर में ‘सूरज बॉक्सर’ नाम से पहचान रखते हैं। इन्होंने कॅरियर की शुरुआत बॉक्सिंग में की थी, लेकिन कोविड के कारण इससे दूर होना पड़ा। इसके बाद इन्होंने रनिंग में कॅरियर बनाया।

सूरज की लद्दाख मैराथन में तीसरी भागीदारी थी। उन्होंने साल 2022 में फुल मैराथन में हिस्सा लिया था, जबकि पिछले साल खारदुंग ला चैलेंज रेस में दौड़े थे।

जयपुर से साइकिल से गए थे लद्दाख

सूरज ने साल 2024 में जयपुर से साइकिल चलाकर मनाली के रास्ते करीब 2,400 किलोमीटर का सफर 12 दिनों में तय कर लद्दाख पहुंचकर मैराथन में हिस्सा लिया था। इसके बाद उन्होंने कश्मीर के रास्ते लद्दाख से जयपुर तक करीब 1,500 किलोमीटर की साइकिल यात्रा भी 12 दिनों में पूरी की थी।

पहले देखें PHOTOS

लद्दाख मैराथन में रनिंग पूरी करने के बाद सूरज मीणा।

लद्दाख मैराथन में रनिंग पूरी करने के बाद सूरज मीणा।

सूरज मीणा के रनिंग पूरी करने के बाद उन्हें बधाई देते लोग।

सूरज मीणा के रनिंग पूरी करने के बाद उन्हें बधाई देते लोग।

लद्दाख में रनिंग पूरी करने के बाद लोगों से मिलते हुए सूरज।

लद्दाख में रनिंग पूरी करने के बाद लोगों से मिलते हुए सूरज।

सवाल: यह यात्रा कैसी रही? इस उपलब्धि तक पहुंचने का अनुभव कैसा रहा?

सूरज मीणा: लद्दाख मैराथन में सिल्क रूट अल्ट्रा (एसआरयू) में मैंने हिस्सा लिया था। यह 122 किलोमीटर की दौड़ है। मैंने इसे 12 घंटे 35 मिनट में पूरा किया और दूसरा स्थान हासिल किया। खास बात यह रही कि मैं नॉन-लद्दाखी प्रतिभागियों में पहले स्थान पर रहा। इस उपलब्धि के लिए मुझे 3 लाख 50 हजार रुपए का पुरस्कार, ट्रॉफी और रजत पदक मिला। इसके पीछे लंबे समय की मेहनत काफी संघर्ष रहा है।

सवाल: लद्दाख मैराथन को सबसे कठिन मैराथन में माना जाता है। इसकी तैयारी किस तरह की?

सूरज मीणा: इसकी तैयारी मैंने पिछले साल से ही शुरू कर दी थी। मैंने धीरे-धीरे अपनी ट्रेनिंग शुरू की। मैंने सोचा था कि मुझे यह दौड़ पूरी करनी है और अच्छा प्रदर्शन करना है। इसी दौरान मुझे आईटी बैंड की परेशानी हुई। फिजियोथेरेपिस्ट ने भी सलाह दी कि ज्यादा दौड़ न लगाऊं और ट्रेनिंग का समय कम करूं। मैंने ट्रेनिंग पूरी तरह बंद नहीं की। धीरे-धीरे उसमें आराम का समय बढ़ाया और अपनी क्षमता के हिसाब से दौड़ता रहा। चोट से रिकवरी के बाद फिर मैंने अपनी ट्रेनिंग बढ़ाई और लद्दाख की इस दौड़ के लिए खुद को तैयार किया।

इसके बाद दूसरी चोट हुई। उस समय मैं जिम में भी काम कर रहा था और मुझे शिन स्प्लिंट की समस्या हो गई। हालत यह थी कि दो-तीन किलोमीटर दौड़ने के बाद इतना दर्द होता था कि पैर चलाना मुश्किल हो जाता था। यहां तक कि पैर उठाने में भी दर्द होता था।

फिजियोथेरेपिस्ट ने कहा- ट्रेनिंग कम कर दो या आराम का समय बढ़ा दो। मैंने नौकरी छोड़ दी। नौकरी छोड़ने के बाद मैंने पूरा ध्यान रिकवरी और ट्रेनिंग पर लगाया और धीरे-धीरे वापस ट्रेनिंग बढ़ाई।

सवाल: 122 किलोमीटर की दौड़ में सबसे बड़ी परेशानी क्या आई?

सूरज मीणा: शुरुआत में किसी दूसरे रनर के साथ सीधा मुकाबला नहीं था। मेरा मुकाबला खुद से था। मैं लगातार अपने समय को लेकर चल रहा था। मेरा लक्ष्य था कि दौड़ को 13 से 14 घंटे में पूरा करूं। मेरे कोच महेश द्विवेदी ने भी मुझे इसी समय के हिसाब से तैयारी कराई थी। मैं यही सोच रहा था कि मुझे अपने तय समय के अंदर दौड़ पूरी करनी है।

सवाल: राजस्थान और लद्दाख की जलवायु में अंतर है। लद्दाख में ऊंचाई और मौसम भी की चुनौती के लिए राजस्थान में कैसे तैयारी की?

सूरज मीणा: मुझे लगता है कि राजस्थान और लद्दाख में कुछ चीजें समान हैं। राजस्थान में भी रेगिस्तान है और वहां भी कई जगह ऐसा ही वातावरण मिलता है। असली अंतर ऊंचाई का है। इसके लिए मैं नाहरगढ़ पर ट्रेनिंग करता था। सप्ताह में दो दिन हम वहां ट्रेनिंग के लिए जाते थे। इससे ऊंचाई पर दौड़ने की तैयारी में मदद मिली।

सवाल: आपको ‘सूरज बॉक्सर’ भी कहा जाता है। यह नाम कैसे पड़ा और बॉक्सिंग से आपकी शुरुआत कैसे हुई?

सूरज मीणा: मैंने साल 2014 में बॉक्सिंग शुरू की थी। बॉक्सिंग में मैंने राज्य स्तर पर दो पदक भी जीते हैं। इसके बाद कोविड के दौरान स्टेडियम करीब दो साल बंद रहा और मेरी बॉक्सिंग छूट गई। उसके बाद मैंने दौड़ना शुरू किया। उस समय मैं गांव में अकेला रहता था और सोचता था कि खाली समय में क्या किया जाए। फिर मैंने दौड़ना शुरू कर दिया। गांव के आसपास पहाड़ थे, तो मैं वहां दौड़ता और चढ़ाई करता था। धीरे-धीरे दौड़ना मेरी आदत बन गई और फिर यही मेरा जुनून बन गया।

सिल्वर मेडल के साथ सूरज मीणा।

सिल्वर मेडल के साथ सूरज मीणा।

सवाल: आपकी रनिंग की जर्नी भी काफी संघर्ष भरी रही। रात में नौकरी करते थे। शिफ्ट खत्म होने के बाद दौड़ने निकल जाते थे।

सूरज मीणा: कोविड के बाद मैं जयपुर आया और मुझे पैसों की जरूरत थी, इसलिए मैंने नौकरी शुरू की। मैं बर्गर किंग में नाइट शिफ्ट करता था। मेरी ड्यूटी रात 7 बजे से सुबह 5 बजे तक होती थी। शिफ्ट खत्म होने के बाद मैं सुबह 5 बजे से ही ट्रेनिंग शुरू कर देता था।

कई बार नींद पूरी नहीं होती थी। एक बार तो दौड़ते-दौड़ते मुझे नींद आ गई और मैं एक खंभे से टकराकर गिर गया। गिरने के बाद मुझे पता चला कि मुझे दौड़ते समय नींद आ गई थी। कई जगह बैठते-बैठते भी नींद आ जाती थी। खाने का भी कोई तय समय नहीं था। कई बार खाना खाया और कई बार नहीं खा पाया। करीब दो साल मैंने इसी तरह नाइट शिफ्ट में काम किया और उसके साथ ट्रेनिंग जारी रखी। मुश्किल था, लेकिन दौड़ने का जुनून था, इसलिए ट्रेनिंग नहीं छोड़ी।

सवाल: आमतौर पर युवाओं को सरकारी नौकरी की तैयारी करने की सलाह दी जाती है। रजत पदक लेकर लौटे तो परिवार की क्या प्रतिक्रिया रही?

सूरज मीणा: घरवाले शुरुआत से कहते थे कि सरकारी नौकरी की तैयारी करो, पढ़ाई करो। उनका मानना था कि खेल में कुछ नहीं रखा है। जिस जगह से मैं आता हूं, वहां मेरे आसपास से खेलों में आने वाला मैं पहला व्यक्ति हूं। इसलिए आसपास के लोग भी कहते थे कि यह क्या कर रहा है, यह तो बेकार की चीज है। अब थोड़ा बदलाव आया है। जब मैंने रजत पदक जीता और यह उपलब्धि हासिल की तो घरवाले भी खुश हुए। अब उन्हें लगने लगा है कि हां, मैं कुछ कर रहा हूं। खेल के जरिए भी पहचान बनाई जा सकती है।

.

खबरें और भी हैं...

  • प्रधान, पंच-सरपंच के आरक्षण की लॉटरी 23-24 सितंबर को: 26 तक चुनाव कार्यक्रम की घोषणा संभव; पहले 2 बार हो चुकी है स्थगित

    26 तक चुनाव कार्यक्रम की घोषणा संभव; पहले 2 बार हो चुकी है स्थगित|जयपुर,Jaipur - Dainik Bhaskar0:37
    • कॉपी लिंक

    शेयर

  • जोधपुर: भाजपा के पास बहुमत,7 निर्दलीयों ने जॉइन की पार्टी: पाली में विधायक भूख हड़ताल पर बैठेंगे; अजमेर में भाजपा की मेयर प्रत्याशी की आपत्ति खारिज

    पाली में विधायक भूख हड़ताल पर बैठेंगे; अजमेर में भाजपा की मेयर प्रत्याशी की आपत्ति खारिज|जयपुर,Jaipur - Dainik Bhaskar1:33
    • कॉपी लिंक

    शेयर

  • जयपुर में 3 मंजिला बिल्डिंग में आग, 25 दुकानें जलीं: धुएं का गुबार छाया, साढ़े 7 घंटे में पाया काबू; अंदर रखे थे 5 सिलेंडर

    धुएं का गुबार छाया, साढ़े 7 घंटे में पाया काबू; अंदर रखे थे 5 सिलेंडर|जयपुर,Jaipur - Dainik Bhaskar2:08
    • कॉपी लिंक

    शेयर

  • जयपुर में दो दिन यूरोलॉजी के डॉक्टर्स का महाकुंभ: GURECON-2 सेमीनार में दिखाई जाएगी लाइव रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी; 200 से ज्यादा डॉक्टर्स होंगे शामिल

    GURECON-2 सेमीनार में दिखाई जाएगी लाइव रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी; 200 से ज्यादा डॉक्टर्स होंगे शामिल|जयपुर,Jaipur - Dainik Bhaskar0:45
    • कॉपी लिंक

    शेयर