October 2, 2026

बांग्लादेश में खसरे से चार और बच्चों की मौत, मृतकों की संख्या बढ़कर 1114 हुई

ढाका, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। शुक्रवार को इस बीमारी से चार और बच्चों की मौत हो गई। इसके साथ ही इस साल खसरे से हुई पुष्ट और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या बढ़कर 1,114 हो गई है।

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अनुसार, ये चार मौतें शुक्रवार सुबह तक पिछले 24 घंटों के दौरान दर्ज की गईं।

बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट यूएनबी के मुताबिक, चार मौतों में से एक की खसरे से मौत की पुष्टि हुई है, जबकि अन्य तीन मौतों को खसरे से हुई संदिग्ध मौतों के रूप में दर्ज किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, खसरे से हुई पुष्ट मौतों की संख्या 102 बनी हुई है, जबकि संदिग्ध मौतों की संख्या बढ़कर 1,012 हो गई है।

डीजीएचएस ने पिछले 24 घंटों के दौरान खसरे के 1,221 नए संदिग्ध मामले दर्ज किए। इसके बाद देश में संदिग्ध मामलों की कुल संख्या बढ़कर 1,94,084 हो गई है।

इसी अवधि में खसरे के 21 नए पुष्ट मामले भी सामने आए। इसके साथ ही पुष्ट मामलों की कुल संख्या बढ़कर 21,623 हो गई है।

पिछले सप्ताह स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने खसरे के मामलों में दोबारा तेजी के लिए पहले हुए टीकाकरण में कमियों और अस्पतालों में मरीजों के प्रबंधन से जुड़ी खामियों को जिम्मेदार बताया था। इनमें संक्रमित बच्चों की पहचान में देरी और उन्हें समय पर घर में अलग नहीं रखने जैसी समस्याएं शामिल हैं।

बांग्लादेश के प्रमुख समाचार पत्र 'द डेली स्टार' से बातचीत में सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ मुश्ताक हुसैन ने बताया कि टीका लगने के बाद बच्चों के शरीर में पर्याप्त रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने में आमतौर पर तीन से चार सप्ताह लगते हैं। इसलिए संक्रमण, अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों और मौतों का मौजूदा सिलसिला कम से कम एक और महीने तक जारी रह सकता है।

हाल ही में एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठन ने 2026 में बांग्लादेश में फैले खसरे को देश के हालिया इतिहास के सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक बताया था। संगठन ने इस बात पर चिंता जताई कि खसरा ऐसी बीमारी है, जिसे टीकाकरण के जरिए रोका जा सकता है।

कनाडा स्थित ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस (जीसीडीजी) ने 'प्रिवेंटेबल ट्रेजेडी: बांग्लादेश 2026 मीजल्स आउटब्रेक' शीर्षक से जारी अपनी रिपोर्ट में कहा कि आम लोगों को खसरे का यह प्रकोप अचानक आया हुआ लग सकता है, लेकिन महामारी विज्ञान के नजरिए से यह अप्रत्याशित नहीं था।

रिपोर्ट में कहा गया कि इस स्वास्थ्य संकट के पीछे कई कारण रहे। इनमें मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली पूर्व अंतरिम सरकार के दौरान 2024-2025 में टीकों की आपूर्ति और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में आई रुकावटें, नियमित टीकाकरण का छूटना, तय अतिरिक्त टीकाकरण कार्यक्रमों का रद्द होना, टीकों की खरीद में प्रशासनिक देरी और ज्यादा खतरे वाले लोगों की समय पर पहचान नहीं होना शामिल है।

--आईएएनएस

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