गोरखपुर के नौका विहार में मंगलवार की शाम गोरक्ष प्रांत के गंगा समग्र की ओर से महा आरती एवं दीपोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महा आरती के बाद 1111 दीप जलाए गए। दीपों की रोशनी से नौका विहार का पूरा परिसर जगमगा उठा।
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कार्यक्रम में अधिक संख्या में श्रद्धालु, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा वर्ग, महिलाएं और आम नागरिक शामिल हुए। लोगों ने इस दौरान आरती और दीपोत्सव का जमकर फोटो और रील्स बनाया।
कार्यक्रम का उद्देश्य गंगा और अन्य जल स्रोतों की स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जल के प्रति लोगों में जिम्मेदारी की भावना बढ़ाना रहा। महा आरती के दौरान लोगों ने गंगा की निर्मलता और अविरलता बनाए रखने का सामूहिक संकल्प लिया।

गंगा संरक्षण केवल पूजा तक सीमित नहीं
गोरक्ष प्रांत के गंगा समग्र के संयोजक राजकिशोर मिश्रा ने कहा कि गंगा भारतीय संस्कृति, आस्था और जीवन परंपरा का आधार हैं। गंगा के प्रति श्रद्धा केवल पूजा और आराधना तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जल स्रोतों के संरक्षण की जिम्मेदारी भी समझनी होगी।
उन्होंने कहा कि 1111 दीपों का प्रज्वलन सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जल स्रोतों को स्वच्छ रखने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश है। यदि हर व्यक्ति अपने आसपास के जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने की जिम्मेदारी ले तो बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। गंगा संरक्षण किसी एक संस्था की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
स्वच्छता के लिए व्यवहार में बदलाव जरूरी
गंगा समग्र के सह संयोजक डॉ. चंद्रभूषण तिवारी ने कहा कि गंगा के प्रति श्रद्धा तभी सार्थक होगी, जब लोग अपने व्यवहार में बदलाव लाएं। नदियों और जल स्रोतों में प्लास्टिक और अन्य कचरा नहीं डालना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जल स्रोतों को प्रदूषित करने का असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा। दीपोत्सव का प्रत्येक दीप स्वच्छ जल, स्वच्छ पर्यावरण और स्वस्थ समाज का संदेश देता है। जनभागीदारी के बिना पर्यावरण संरक्षण के किसी भी अभियान को स्थायी सफलता नहीं मिल सकती।

1111 दीप बने जनजागरण और पर्यावरण चेतना का प्रतीक
डॉ. पवन कुमार पाण्डेय ने कहा कि नौका विहार में जलाए गए 1111 दीप जनजागरण, पर्यावरण चेतना और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रतीक हैं। कार्यक्रम में 1300 से अधिक लोगों की सहभागिता यह दिखाती है कि जल और पर्यावरण संरक्षण को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को जल संरक्षण और पर्यावरण अभियानों से जोड़ना जरूरी है। विद्यार्थियों में शुरुआत से ही जल, नदी और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने से आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।
गंगा गीत ने बांधा समां
कार्यक्रम में मृदुला मिश्रा ने गंगा गीत प्रस्तुत किया। गीत के जरिए गंगा की महिमा, भारतीय संस्कृति में उनके महत्व और संरक्षण की जरूरत का संदेश दिया गया। गंगा गीत के दौरान वातावरण भावपूर्ण हो गया। इसके बाद 1111 दीपों के प्रज्वलन के साथ नौका विहार का दृश्य आकर्षक नजर आया।

विद्यार्थियों ने संभाली व्यवस्थाएं
दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज, गोरखपुर से पहुंचे विद्यार्थियों ने स्वयंसेवक के रूप में कार्यक्रम में सहयोग किया। विद्यार्थियों ने आयोजन स्थल पर विभिन्न व्यवस्थाओं को संभालने के साथ लोगों के आवागमन और कार्यक्रम के सुचारु संचालन में भूमिका निभाई।
कार्यक्रम का संचालन दिनेश पाण्डेय और दुर्गा प्रसाद ने किया। आयोजन का संयोजन गंगा समग्र के प्रचार-प्रसार प्रमुख विनोद माथुर ने किया। आयोजन की तैयारियों और विभिन्न व्यवस्थाओं के समन्वय में सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों ने सहयोग किया।
कार्यक्रम में गौरव पाण्डेय, प्रणव पाण्डेय, अशोक चतुर्वेदी समेत गंगा समग्र से जुड़े कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।
आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
आयोजकों ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य आस्था को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ना है। गंगा संरक्षण का संदेश सिर्फ गंगा नदी तक सीमित नहीं है। नदियां, तालाब, पोखर, झील और दूसरे जल स्रोत भी जीवन का आधार हैं। इनके संरक्षण के लिए समाज के हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
लोगों से प्लास्टिक और कचरा जल स्रोतों में नहीं डालने, पानी की बर्बादी रोकने और आसपास स्वच्छता बनाए रखने की अपील की गई। कार्यक्रम का समापन गंगा संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरण सुरक्षा के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।